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अमेरिका-ईरान में तनाव चरम पर, रडार साइट्स पर हमला और मिसाइल जवाबी कार्रवाई
Digital Desk
होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य टकराव बढ़ा, खाड़ी देशों में अलर्ट, वैश्विक चिंता गहरी
पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान की कई रडार साइट्स को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की बात कही है अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के गोरुक और केश्म आइलैंड पर स्थित रडार साइट्स पर सटीक हमले किए। इससे पहले होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में ईरान के चार ड्रोन हमलों को हवा में ही मार गिराया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह कार्रवाई संभावित बड़े हमलों को रोकने के लिए की गई।
इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी और उसके सहयोगी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमला किया है। इसके कुछ घंटों बाद CENTCOM ने दावा किया कि ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में कुल सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से छह को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि एक मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर ला दिया है। कुवैत और बहरीन में सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और एयरस्पेस मॉनिटरिंग सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है। क्षेत्रीय स्तर पर किसी बड़े युद्ध की आशंका को लेकर चिंता गहराती जा रही है।
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बयान दिया है कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता काफी कमजोर हो गई है। ट्रम्प के अनुसार, ईरान के पास अब उसकी कुल मिसाइल ताकत का केवल 21 से 22 प्रतिशत हिस्सा ही बचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट इस दावे से अलग तस्वीर पेश करती है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने अपनी 33 में से 30 मिसाइल साइट्स को फिर से सक्रिय कर लिया है और उसके पास अभी भी लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार मौजूद है। इस रिपोर्ट ने ट्रम्प के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सैन्य विश्लेषकों के बीच बहस को और बढ़ा दिया है।
पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं भी सामने आई हैं। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक समझौता होता है, तो वे ईरान के सुप्रीम लीडर से मिलने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यूरेनियम एनरिचमेंट से जुड़े मुद्दों पर पहले गंभीर बातचीत जरूरी है। दूसरी ओर ईरान में मानवीय कदम उठाते हुए 2000 से अधिक कैदियों की सजा माफ या कम कर दी गई है। इसमें वे कैदी शामिल नहीं हैं जिन पर जासूसी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप हैं। यह फैसला ईरान के सुप्रीम नेतृत्व की मंजूरी के बाद लिया गया है।
लेबनान में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दक्षिणी इलाकों में इजराइली हवाई हमलों की रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें कम से कम चार लोगों की मौत और कई अन्य घायल हुए हैं। सीजफायर बातचीत के बावजूद क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रहने से हालात और बिगड़ रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा असर देखा गया है। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात मई महीने में 84 प्रतिशत तक गिर गया है। अब ईरान बड़े टैंकरों की जगह छोटे जहाजों के माध्यम से तेल निर्यात कर रहा है ताकि प्रतिबंधों से बचा जा सके।
इसी बीच यूरोप में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। आयरलैंड ने इजराइल के दो वरिष्ठ मंत्रियों—इतामार बेन-ग्वीर और बेजालेल स्मोट्रिच—के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयरिश सरकार ने कहा कि इन नेताओं के बयान और नीतियां फिलिस्तीनियों के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा देती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
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अमेरिका-ईरान में तनाव चरम पर, रडार साइट्स पर हमला और मिसाइल जवाबी कार्रवाई
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पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान की कई रडार साइट्स को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की बात कही है अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के गोरुक और केश्म आइलैंड पर स्थित रडार साइट्स पर सटीक हमले किए। इससे पहले होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में ईरान के चार ड्रोन हमलों को हवा में ही मार गिराया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह कार्रवाई संभावित बड़े हमलों को रोकने के लिए की गई।
इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी और उसके सहयोगी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमला किया है। इसके कुछ घंटों बाद CENTCOM ने दावा किया कि ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में कुल सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से छह को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि एक मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर ला दिया है। कुवैत और बहरीन में सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और एयरस्पेस मॉनिटरिंग सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है। क्षेत्रीय स्तर पर किसी बड़े युद्ध की आशंका को लेकर चिंता गहराती जा रही है।
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बयान दिया है कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता काफी कमजोर हो गई है। ट्रम्प के अनुसार, ईरान के पास अब उसकी कुल मिसाइल ताकत का केवल 21 से 22 प्रतिशत हिस्सा ही बचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट इस दावे से अलग तस्वीर पेश करती है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने अपनी 33 में से 30 मिसाइल साइट्स को फिर से सक्रिय कर लिया है और उसके पास अभी भी लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार मौजूद है। इस रिपोर्ट ने ट्रम्प के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सैन्य विश्लेषकों के बीच बहस को और बढ़ा दिया है।
पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं भी सामने आई हैं। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक समझौता होता है, तो वे ईरान के सुप्रीम लीडर से मिलने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यूरेनियम एनरिचमेंट से जुड़े मुद्दों पर पहले गंभीर बातचीत जरूरी है। दूसरी ओर ईरान में मानवीय कदम उठाते हुए 2000 से अधिक कैदियों की सजा माफ या कम कर दी गई है। इसमें वे कैदी शामिल नहीं हैं जिन पर जासूसी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप हैं। यह फैसला ईरान के सुप्रीम नेतृत्व की मंजूरी के बाद लिया गया है।
लेबनान में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दक्षिणी इलाकों में इजराइली हवाई हमलों की रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें कम से कम चार लोगों की मौत और कई अन्य घायल हुए हैं। सीजफायर बातचीत के बावजूद क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रहने से हालात और बिगड़ रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा असर देखा गया है। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात मई महीने में 84 प्रतिशत तक गिर गया है। अब ईरान बड़े टैंकरों की जगह छोटे जहाजों के माध्यम से तेल निर्यात कर रहा है ताकि प्रतिबंधों से बचा जा सके।
इसी बीच यूरोप में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। आयरलैंड ने इजराइल के दो वरिष्ठ मंत्रियों—इतामार बेन-ग्वीर और बेजालेल स्मोट्रिच—के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयरिश सरकार ने कहा कि इन नेताओं के बयान और नीतियां फिलिस्तीनियों के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा देती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
