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सिद्दारमैया के इस्तीफे की तैयारी, कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन लगभग तय
नेशनल डेस्क
राहुल गांधी की बैठकों के बाद बनी सहमति, डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा तेज
कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कई महीनों से चल रहा नेतृत्व संकट अब खत्म होता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने आखिरकार पद छोड़ने का मन बना लिया है और माना जा रहा है कि वह जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ लगातार चली बैठकों और राजनीतिक मंथन के बाद यह फैसला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने सत्ता साझेदारी के पुराने फार्मूले को लागू करने का संकेत साफ तौर पर दे दिया है, जिसके बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं, जिनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने हिस्सा लिया। इन बैठकों में कर्नाटक के मौजूदा राजनीतिक हालात, सरकार के भीतर बढ़ती खींचतान और नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्दारमैया को 2023 विधानसभा चुनाव के बाद हुए सत्ता साझेदारी समझौते की याद दिलाई। उस समय कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद यह तय हुआ था कि मुख्यमंत्री पद को लेकर ढाई-ढाई साल का फार्मूला लागू किया जाएगा। शुरुआती कार्यकाल सिद्दारमैया को दिया गया था, जबकि बाद में नेतृत्व परिवर्तन कर डीके शिवकुमार को मौका देने की बात कही गई थी।
बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में कुछ और समय मांगा था। उनका तर्क था कि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश करने और कुछ लंबित योजनाओं को पूरा करने के बाद पद छोड़ना चाहते हैं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व तत्काल बदलाव के पक्ष में दिखाई दिया। पार्टी हाईकमान का मानना था कि अगर तय समझौते को लागू नहीं किया गया तो इससे पार्टी की विश्वसनीयता और संगठनात्मक अनुशासन पर असर पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान राहुल गांधी ने साफ कहा कि पार्टी को अपने वादों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और अनुशासित तरीके से लागू करना जरूरी है। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी दोनों नेताओं से पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में यह तर्क दिया कि 2025 या 2026 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक लिखित समझौता नहीं हुआ था। लेकिन पार्टी नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाया कि संगठन और सरकार दोनों के संतुलन के लिए अब बदलाव जरूरी है।
दिल्ली में बैठकों के बाद सिद्दारमैया ने अपने करीबी नेताओं और समर्थक मंत्रियों से भी चर्चा की। बताया जाता है कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने विश्वस्त सहयोगियों के साथ लंबी बैठक की। कुछ नेताओं ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी, लेकिन अंत में उन्होंने हाईकमान के निर्णय को स्वीकार करने का संकेत दे दिया।
सूत्रों के अनुसार सिद्दारमैया ने अपने समर्थकों से कहा कि वह हमेशा से यह कहते रहे हैं कि राहुल गांधी जब भी कहेंगे, वह इस्तीफा दे देंगे। अब जब पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दे दिया है, तो वह और इंतजार नहीं करेंगे। इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई।
इस घटनाक्रम के बीच डीके शिवकुमार की सक्रियता भी बढ़ गई है। पार्टी कार्यालय और विधानसभा के भीतर उनके समर्थक लगातार उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा रहे हैं। कई नेताओं का मानना है कि शिवकुमार ने 2023 चुनाव में संगठन को मजबूत करने और कांग्रेस को सत्ता में लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद देना राजनीतिक रूप से संतुलित कदम माना जा रहा है।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी भी तरह के सार्वजनिक विवाद से बचना चाहता है। पार्टी नहीं चाहती कि नेतृत्व परिवर्तन के दौरान राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसी स्थिति बने, जहां अंदरूनी खींचतान लंबे समय तक सुर्खियों में रही थी। इसी वजह से कांग्रेस हाईकमान लगातार दोनों नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
कर्नाटक में यह बदलाव कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। 2014 के बाद कई राज्यों में पार्टी को क्षेत्रीय नेताओं और संगठन के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई हुई है। ऐसे में कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण सफलतापूर्वक होने पर कांग्रेस इसे अनुशासित संगठन की मिसाल के रूप में पेश कर सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सिद्दारमैया औपचारिक रूप से कब इस्तीफा देते हैं और कांग्रेस विधायक दल की अगली बैठक में किसे नया नेता चुना जाता है। फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है और आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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सिद्दारमैया के इस्तीफे की तैयारी, कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन लगभग तय
नेशनल डेस्क
कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कई महीनों से चल रहा नेतृत्व संकट अब खत्म होता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने आखिरकार पद छोड़ने का मन बना लिया है और माना जा रहा है कि वह जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ लगातार चली बैठकों और राजनीतिक मंथन के बाद यह फैसला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने सत्ता साझेदारी के पुराने फार्मूले को लागू करने का संकेत साफ तौर पर दे दिया है, जिसके बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं, जिनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने हिस्सा लिया। इन बैठकों में कर्नाटक के मौजूदा राजनीतिक हालात, सरकार के भीतर बढ़ती खींचतान और नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्दारमैया को 2023 विधानसभा चुनाव के बाद हुए सत्ता साझेदारी समझौते की याद दिलाई। उस समय कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद यह तय हुआ था कि मुख्यमंत्री पद को लेकर ढाई-ढाई साल का फार्मूला लागू किया जाएगा। शुरुआती कार्यकाल सिद्दारमैया को दिया गया था, जबकि बाद में नेतृत्व परिवर्तन कर डीके शिवकुमार को मौका देने की बात कही गई थी।
बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में कुछ और समय मांगा था। उनका तर्क था कि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश करने और कुछ लंबित योजनाओं को पूरा करने के बाद पद छोड़ना चाहते हैं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व तत्काल बदलाव के पक्ष में दिखाई दिया। पार्टी हाईकमान का मानना था कि अगर तय समझौते को लागू नहीं किया गया तो इससे पार्टी की विश्वसनीयता और संगठनात्मक अनुशासन पर असर पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान राहुल गांधी ने साफ कहा कि पार्टी को अपने वादों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और अनुशासित तरीके से लागू करना जरूरी है। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी दोनों नेताओं से पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में यह तर्क दिया कि 2025 या 2026 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक लिखित समझौता नहीं हुआ था। लेकिन पार्टी नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाया कि संगठन और सरकार दोनों के संतुलन के लिए अब बदलाव जरूरी है।
दिल्ली में बैठकों के बाद सिद्दारमैया ने अपने करीबी नेताओं और समर्थक मंत्रियों से भी चर्चा की। बताया जाता है कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने विश्वस्त सहयोगियों के साथ लंबी बैठक की। कुछ नेताओं ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी, लेकिन अंत में उन्होंने हाईकमान के निर्णय को स्वीकार करने का संकेत दे दिया।
सूत्रों के अनुसार सिद्दारमैया ने अपने समर्थकों से कहा कि वह हमेशा से यह कहते रहे हैं कि राहुल गांधी जब भी कहेंगे, वह इस्तीफा दे देंगे। अब जब पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दे दिया है, तो वह और इंतजार नहीं करेंगे। इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई।
इस घटनाक्रम के बीच डीके शिवकुमार की सक्रियता भी बढ़ गई है। पार्टी कार्यालय और विधानसभा के भीतर उनके समर्थक लगातार उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा रहे हैं। कई नेताओं का मानना है कि शिवकुमार ने 2023 चुनाव में संगठन को मजबूत करने और कांग्रेस को सत्ता में लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद देना राजनीतिक रूप से संतुलित कदम माना जा रहा है।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी भी तरह के सार्वजनिक विवाद से बचना चाहता है। पार्टी नहीं चाहती कि नेतृत्व परिवर्तन के दौरान राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसी स्थिति बने, जहां अंदरूनी खींचतान लंबे समय तक सुर्खियों में रही थी। इसी वजह से कांग्रेस हाईकमान लगातार दोनों नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
कर्नाटक में यह बदलाव कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। 2014 के बाद कई राज्यों में पार्टी को क्षेत्रीय नेताओं और संगठन के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई हुई है। ऐसे में कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण सफलतापूर्वक होने पर कांग्रेस इसे अनुशासित संगठन की मिसाल के रूप में पेश कर सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सिद्दारमैया औपचारिक रूप से कब इस्तीफा देते हैं और कांग्रेस विधायक दल की अगली बैठक में किसे नया नेता चुना जाता है। फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है और आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।
