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नॉर्वे चेस में प्रज्ञानानंदा का कमाल, कार्लसन को हराकर रचा इतिहास
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय ग्रैंडमास्टर ने दुनिया के नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में दी मात, गुकेश लगातार दूसरे दौर में हारे जबकि दिव्या देशमुख ने महिला वर्ग में शानदार जीत दर्ज की
नॉर्वे चेस 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में बना हुआ है। बुधवार को टूर्नामेंट में सबसे बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला, जब भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और सात बार के चैंपियन मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में हरा दिया। इस जीत के साथ प्रज्ञानानंदा ने न केवल तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल किए, बल्कि टूर्नामेंट की अंक तालिका में भी मजबूत स्थिति बना ली। दूसरी ओर मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को लगातार दूसरे दौर में हार का सामना करना पड़ा। महिला वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए बिबिसारा असाउबायेवा को हराकर दूसरा स्थान हासिल कर लिया।
नॉर्वे चेस के इस मुकाबले पर दुनिया भर के शतरंज प्रेमियों की नजर थी, क्योंकि कार्लसन अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेल रहे थे। शुरुआत से ही मुकाबला बेहद संतुलित नजर आया। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआती चालों में काफी सतर्कता दिखाई, लेकिन मध्य खेल में प्रज्ञानानंदा ने बेहतरीन रणनीति के जरिए कार्लसन पर दबाव बनाना शुरू किया। समय कम होने के दौरान मैच और ज्यादा रोमांचक हो गया। आखिरकार भारतीय खिलाड़ी ने शानदार धैर्य दिखाते हुए कार्लसन को मात दे दी।
यह पहली बार नहीं है जब प्रज्ञानानंदा ने कार्लसन को क्लासिकल फॉर्मेट में हराया हो। इससे पहले भी वह नॉर्वे चेस 2024 में कार्लसन को पराजित कर चुके हैं। लगातार दूसरी बार दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी को हराना भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर के आत्मविश्वास और तेजी से बढ़ते स्तर को दिखाता है। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि मुकाबला बेहद करीबी था और टाइम स्क्रैम्बल में नतीजा किसी भी दिशा में जा सकता था। उन्होंने माना कि कार्लसन जैसे खिलाड़ी के खिलाफ हर चाल पर दबाव महसूस होता है, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा।
इस जीत के बाद प्रज्ञानानंदा 4.5 अंक के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं मैग्नस कार्लसन इस हार के बाद छह खिलाड़ियों की तालिका में सबसे नीचे चले गए हैं। कार्लसन के लिए यह टूर्नामेंट अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। लगातार खराब नतीजों ने उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि अभी टूर्नामेंट में कई मुकाबले बाकी हैं।
दूसरी तरफ भारतीय विश्व चैंपियन डी गुकेश की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनका मुकाबला लगभग पांच घंटे तक चला। क्लासिकल गेम ड्रॉ रहा, लेकिन आर्मगेडन टाईब्रेकर में फिरोजा ने बाजी मार ली। इस हार के बाद गुकेश की टूर्नामेंट में लगातार दूसरी हार दर्ज हुई। युवा भारतीय खिलाड़ी इस समय 3.5 अंक के साथ चौथे स्थान पर हैं।
फिरोजा इस टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि चोटिल होने के बावजूद उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया। मुकाबले के बाद वह व्हीलचेयर और मून बूट में दिखाई दिए, लेकिन इसका असर उनके खेल पर नहीं पड़ा। लगातार जीत के दम पर उन्होंने 7.5 अंक के साथ टूर्नामेंट में अपनी बढ़त मजबूत कर ली है। गुकेश के लिए आने वाला दौर और भी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि अगले मुकाबले में उनका सामना मैग्नस कार्लसन से होगा। शतरंज प्रशंसकों की नजर अब इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हुई है।
महिला वर्ग में भारत की युवा खिलाड़ी दिव्या देशमुख लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने टूर्नामेंट लीडर बिबिसारा असाउबायेवा को आर्मगेडन में हराकर बड़ी जीत दर्ज की। यह दिव्या की लगातार तीसरी टाईब्रेकर जीत रही। इस जीत के बाद वह 4.5 अंक लेकर दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं। दिव्या का आत्मविश्वास और दबाव में खेलने की क्षमता उन्हें इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत खिलाड़ियों में शामिल कर रही है। वहीं भारत की अनुभवी खिलाड़ी कोनेरू हम्पी को अन्ना मुजिचुक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। हम्पी फिलहाल दो अंक के साथ तालिका में आखिरी स्थान पर हैं। हालांकि टूर्नामेंट अभी बाकी है और उनके पास वापसी का मौका रहेगा।
नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का यह सीजन भारतीय खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रज्ञानानंदा, गुकेश और दिव्या जैसे युवा खिलाड़ी लगातार दुनिया के बड़े नामों को चुनौती दे रहे हैं। खास तौर पर प्रज्ञानानंदा की जीत ने भारतीय शतरंज जगत में नई ऊर्जा भर दी है। कम उम्र में जिस तरह उन्होंने कार्लसन जैसे दिग्गज को दो बार हराया है, उससे उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा है।
टूर्नामेंट में आर्मगेडन फॉर्मेट भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। शतरंज में आर्मगेडन एक सडन-डेथ टाईब्रेकर होता है, जिसमें ड्रॉ की कोई संभावना नहीं रहती। क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ होने पर परिणाम निकालने के लिए यह फॉर्मेट अपनाया जाता है। इस प्रारूप में खिलाड़ियों पर समय का अतिरिक्त दबाव रहता है और छोटी गलती भी हार का कारण बन सकती है। भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित किया है कि विश्व शतरंज में भारत की नई पीढ़ी तेजी से अपनी जगह बना रही है। आने वाले मुकाबलों में भी सभी की नजर प्रज्ञानानंदा और गुकेश पर बनी रहेगी।
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नॉर्वे चेस में प्रज्ञानानंदा का कमाल, कार्लसन को हराकर रचा इतिहास
स्पोर्ट्स डेस्क
नॉर्वे चेस 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में बना हुआ है। बुधवार को टूर्नामेंट में सबसे बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला, जब भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और सात बार के चैंपियन मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में हरा दिया। इस जीत के साथ प्रज्ञानानंदा ने न केवल तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल किए, बल्कि टूर्नामेंट की अंक तालिका में भी मजबूत स्थिति बना ली। दूसरी ओर मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को लगातार दूसरे दौर में हार का सामना करना पड़ा। महिला वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए बिबिसारा असाउबायेवा को हराकर दूसरा स्थान हासिल कर लिया।
नॉर्वे चेस के इस मुकाबले पर दुनिया भर के शतरंज प्रेमियों की नजर थी, क्योंकि कार्लसन अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेल रहे थे। शुरुआत से ही मुकाबला बेहद संतुलित नजर आया। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआती चालों में काफी सतर्कता दिखाई, लेकिन मध्य खेल में प्रज्ञानानंदा ने बेहतरीन रणनीति के जरिए कार्लसन पर दबाव बनाना शुरू किया। समय कम होने के दौरान मैच और ज्यादा रोमांचक हो गया। आखिरकार भारतीय खिलाड़ी ने शानदार धैर्य दिखाते हुए कार्लसन को मात दे दी।
यह पहली बार नहीं है जब प्रज्ञानानंदा ने कार्लसन को क्लासिकल फॉर्मेट में हराया हो। इससे पहले भी वह नॉर्वे चेस 2024 में कार्लसन को पराजित कर चुके हैं। लगातार दूसरी बार दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी को हराना भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर के आत्मविश्वास और तेजी से बढ़ते स्तर को दिखाता है। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि मुकाबला बेहद करीबी था और टाइम स्क्रैम्बल में नतीजा किसी भी दिशा में जा सकता था। उन्होंने माना कि कार्लसन जैसे खिलाड़ी के खिलाफ हर चाल पर दबाव महसूस होता है, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा।
इस जीत के बाद प्रज्ञानानंदा 4.5 अंक के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं मैग्नस कार्लसन इस हार के बाद छह खिलाड़ियों की तालिका में सबसे नीचे चले गए हैं। कार्लसन के लिए यह टूर्नामेंट अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। लगातार खराब नतीजों ने उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि अभी टूर्नामेंट में कई मुकाबले बाकी हैं।
दूसरी तरफ भारतीय विश्व चैंपियन डी गुकेश की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनका मुकाबला लगभग पांच घंटे तक चला। क्लासिकल गेम ड्रॉ रहा, लेकिन आर्मगेडन टाईब्रेकर में फिरोजा ने बाजी मार ली। इस हार के बाद गुकेश की टूर्नामेंट में लगातार दूसरी हार दर्ज हुई। युवा भारतीय खिलाड़ी इस समय 3.5 अंक के साथ चौथे स्थान पर हैं।
फिरोजा इस टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि चोटिल होने के बावजूद उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया। मुकाबले के बाद वह व्हीलचेयर और मून बूट में दिखाई दिए, लेकिन इसका असर उनके खेल पर नहीं पड़ा। लगातार जीत के दम पर उन्होंने 7.5 अंक के साथ टूर्नामेंट में अपनी बढ़त मजबूत कर ली है। गुकेश के लिए आने वाला दौर और भी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि अगले मुकाबले में उनका सामना मैग्नस कार्लसन से होगा। शतरंज प्रशंसकों की नजर अब इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हुई है।
महिला वर्ग में भारत की युवा खिलाड़ी दिव्या देशमुख लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने टूर्नामेंट लीडर बिबिसारा असाउबायेवा को आर्मगेडन में हराकर बड़ी जीत दर्ज की। यह दिव्या की लगातार तीसरी टाईब्रेकर जीत रही। इस जीत के बाद वह 4.5 अंक लेकर दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं। दिव्या का आत्मविश्वास और दबाव में खेलने की क्षमता उन्हें इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत खिलाड़ियों में शामिल कर रही है। वहीं भारत की अनुभवी खिलाड़ी कोनेरू हम्पी को अन्ना मुजिचुक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। हम्पी फिलहाल दो अंक के साथ तालिका में आखिरी स्थान पर हैं। हालांकि टूर्नामेंट अभी बाकी है और उनके पास वापसी का मौका रहेगा।
नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का यह सीजन भारतीय खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रज्ञानानंदा, गुकेश और दिव्या जैसे युवा खिलाड़ी लगातार दुनिया के बड़े नामों को चुनौती दे रहे हैं। खास तौर पर प्रज्ञानानंदा की जीत ने भारतीय शतरंज जगत में नई ऊर्जा भर दी है। कम उम्र में जिस तरह उन्होंने कार्लसन जैसे दिग्गज को दो बार हराया है, उससे उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा है।
टूर्नामेंट में आर्मगेडन फॉर्मेट भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। शतरंज में आर्मगेडन एक सडन-डेथ टाईब्रेकर होता है, जिसमें ड्रॉ की कोई संभावना नहीं रहती। क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ होने पर परिणाम निकालने के लिए यह फॉर्मेट अपनाया जाता है। इस प्रारूप में खिलाड़ियों पर समय का अतिरिक्त दबाव रहता है और छोटी गलती भी हार का कारण बन सकती है। भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित किया है कि विश्व शतरंज में भारत की नई पीढ़ी तेजी से अपनी जगह बना रही है। आने वाले मुकाबलों में भी सभी की नजर प्रज्ञानानंदा और गुकेश पर बनी रहेगी।
