पंडवानी गायिका तीजन बाई की तबीयत बिगड़ी, रायपुर एम्स में भर्ती, हालत गंभीर

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पद्म विभूषण सम्मानित लोक कलाकार MICU में भर्ती, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही इलाज

छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित लोक कलाकार तीजन बाई की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और फिलहाल उनका इलाज मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट यानी MICU में चल रहा है। तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर कला जगत, साहित्य जगत और उनके प्रशंसकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। देशभर से लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद तीजन बाई को रायपुर एम्स के ट्रॉमा और इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत MICU में शिफ्ट कर दिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डी. के. सिंह ने बताया कि जनरल मेडिसिन विभाग के साथ पल्मोनरी मेडिसिन और नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ भी इलाज में शामिल हैं।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि डॉक्टरों ने अभी स्वास्थ्य संबंधी विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया है। एम्स परिसर में उनके परिजनों और करीबी लोगों की आवाजाही बनी हुई है।

तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में लोक कला की एक बड़ी पहचान मानी जाती हैं। उन्होंने पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया और भारतीय लोक परंपरा को दुनिया के सामने नई पहचान दिलाई। उनकी तबीयत खराब होने की खबर सामने आते ही सोशल media पर भी लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। कई कलाकारों, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने चिंता व्यक्त की है।

तीजन बाई का जन्म 8 अगस्त 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन अटारी गांव में हुआ था। बताया जाता है कि जिस दिन उनका जन्म हुआ था उस दिन तीज पर्व था, इसलिए उनका नाम तीजन रखा गया। बेहद साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने लोक कला की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज देश ही नहीं दुनिया भी जानती है।

उन्होंने पंडवानी शैली में महाभारत की कथाओं को अपने अनोखे अंदाज में प्रस्तुत कर लोक गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मंच पर उनका प्रस्तुतीकरण, आवाज का उतार-चढ़ाव और अभिनय शैली दर्शकों को बांधे रखती थी। यही वजह रही कि उन्होंने गांवों की चौपालों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी खास पहचान बनाई।

साल 1980 के दशक में तीजन बाई ने सांस्कृतिक राजदूत के रूप में कई देशों की यात्राएं कीं। इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विटजरलैंड, तुर्किये और माल्टा सहित कई देशों में उन्होंने भारतीय लोक कला का प्रदर्शन किया। विदेशी मंचों पर पंडवानी को मिली सराहना ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उनके कार्यक्रमों को भारतीय संस्कृति और लोक परंपरा की मजबूत अभिव्यक्ति माना गया।

लोक कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई बड़े सम्मानों से नवाजा। वर्ष 1988 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिला। इसके बाद संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। साल 2019 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा भी उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं।

तीजन बाई ने केवल कला को आगे नहीं बढ़ाया, बल्कि लोक कलाकारों की नई पीढ़ी को भी प्रेरित किया। उनके संघर्ष और उपलब्धियों को कई युवा कलाकार मिसाल के तौर पर देखते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर तक पहुंचने की उनकी यात्रा आज भी लोगों को प्रेरित करती है।

छत्तीसगढ़ में तीजन बाई को राज्य की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। उनकी आवाज और पंडवानी शैली ने प्रदेश की लोक परंपरा को नई ऊर्जा दी। राज्य के कई हिस्सों में लोग मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना वाले संदेश साझा कर रहे हैं।

राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत की कई हस्तियों ने भी चिंता जताई है। कई लोगों ने कहा कि तीजन बाई केवल कलाकार नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति की जीवित विरासत हैं। ऐसे में उनका स्वस्थ रहना पूरे कला जगत के लिए जरूरी है। एम्स प्रशासन का कहना है कि फिलहाल उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है और जरूरत के अनुसार सभी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आने वाले दिनों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।

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28 May 2026 By Vaishnavi.J

पंडवानी गायिका तीजन बाई की तबीयत बिगड़ी, रायपुर एम्स में भर्ती, हालत गंभीर

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छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित लोक कलाकार तीजन बाई की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और फिलहाल उनका इलाज मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट यानी MICU में चल रहा है। तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर कला जगत, साहित्य जगत और उनके प्रशंसकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। देशभर से लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद तीजन बाई को रायपुर एम्स के ट्रॉमा और इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत MICU में शिफ्ट कर दिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डी. के. सिंह ने बताया कि जनरल मेडिसिन विभाग के साथ पल्मोनरी मेडिसिन और नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ भी इलाज में शामिल हैं।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि डॉक्टरों ने अभी स्वास्थ्य संबंधी विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया है। एम्स परिसर में उनके परिजनों और करीबी लोगों की आवाजाही बनी हुई है।

तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में लोक कला की एक बड़ी पहचान मानी जाती हैं। उन्होंने पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया और भारतीय लोक परंपरा को दुनिया के सामने नई पहचान दिलाई। उनकी तबीयत खराब होने की खबर सामने आते ही सोशल media पर भी लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। कई कलाकारों, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने चिंता व्यक्त की है।

तीजन बाई का जन्म 8 अगस्त 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन अटारी गांव में हुआ था। बताया जाता है कि जिस दिन उनका जन्म हुआ था उस दिन तीज पर्व था, इसलिए उनका नाम तीजन रखा गया। बेहद साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने लोक कला की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज देश ही नहीं दुनिया भी जानती है।

उन्होंने पंडवानी शैली में महाभारत की कथाओं को अपने अनोखे अंदाज में प्रस्तुत कर लोक गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मंच पर उनका प्रस्तुतीकरण, आवाज का उतार-चढ़ाव और अभिनय शैली दर्शकों को बांधे रखती थी। यही वजह रही कि उन्होंने गांवों की चौपालों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी खास पहचान बनाई।

साल 1980 के दशक में तीजन बाई ने सांस्कृतिक राजदूत के रूप में कई देशों की यात्राएं कीं। इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विटजरलैंड, तुर्किये और माल्टा सहित कई देशों में उन्होंने भारतीय लोक कला का प्रदर्शन किया। विदेशी मंचों पर पंडवानी को मिली सराहना ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उनके कार्यक्रमों को भारतीय संस्कृति और लोक परंपरा की मजबूत अभिव्यक्ति माना गया।

लोक कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई बड़े सम्मानों से नवाजा। वर्ष 1988 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिला। इसके बाद संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। साल 2019 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा भी उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं।

तीजन बाई ने केवल कला को आगे नहीं बढ़ाया, बल्कि लोक कलाकारों की नई पीढ़ी को भी प्रेरित किया। उनके संघर्ष और उपलब्धियों को कई युवा कलाकार मिसाल के तौर पर देखते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर तक पहुंचने की उनकी यात्रा आज भी लोगों को प्रेरित करती है।

छत्तीसगढ़ में तीजन बाई को राज्य की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। उनकी आवाज और पंडवानी शैली ने प्रदेश की लोक परंपरा को नई ऊर्जा दी। राज्य के कई हिस्सों में लोग मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना वाले संदेश साझा कर रहे हैं।

राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत की कई हस्तियों ने भी चिंता जताई है। कई लोगों ने कहा कि तीजन बाई केवल कलाकार नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति की जीवित विरासत हैं। ऐसे में उनका स्वस्थ रहना पूरे कला जगत के लिए जरूरी है। एम्स प्रशासन का कहना है कि फिलहाल उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है और जरूरत के अनुसार सभी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आने वाले दिनों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/pandwani-singer-teejan-bais-health-deteriorated-condition-critical-admitted-in/article-54403

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