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सिंहस्थ से आगे की सोच: कैसे नासिक अगले 30 वर्षों की जल सुरक्षा की नींव रख रहा है
Digital desk
देश में जब भी किसी बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारी होती है, तो सबसे पहले सड़कें, पुल, घाट और सौंदर्यीकरण कीचर्चा होती है। लेकिन किसी भी शहर की असली पहचान उन परियोजनाओं से बनती है जो आम नागरिकों को रोज़मर्रा कीजिंदगी में बेहतर सुविधाएं देती हैं। जलापूर्ति, सीवरेज, शोधन संयंत्र और भविष्य की जरूरतों के अनुसार बनाई गईआधारभूत संरचना ही किसी शहर को वास्तव में टिकाऊ बनाती है।
महाराष्ट्र का धार्मिक और सांस्कृतिक शहर नासिक आज इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2027 में यहां सिंहस्थकुंभ का आयोजन होना है, जहां लगभग 12 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। लेकिन नासिक महानगरपालिकाइस आयोजन को केवल कुछ महीनों की तैयारी तक सीमित नहीं रख रही। शहर ने इसे अगले 30 से 40 वर्षों कीआवश्यकताओं के अनुरूप अपनी बुनियादी संरचना विकसित करने के अवसर के रूप में लिया है।
इसी दूरदृष्टि का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है मुकणे जलापूर्ति परियोजना।
आज नासिक तेजी से विकसित हो रहा है। नए आवासीय क्षेत्र बस रहे हैं, औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और शहर काविस्तार लगातार हो रहा है। वर्तमान में लगभग 99 प्रतिशत आबादी नल जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी हुई है और शहर कीजलशोधन क्षमता लगभग 615 एमएलडी है। लेकिन आने वाले वर्षों में यह क्षमता पर्याप्त नहीं होगी।
अनुमान है कि वर्ष 2040 तक नासिक की आबादी लगभग 37.71 लाख और वर्ष 2055 तक 57.58 लाख तक पहुंचजाएगी। इसके साथ पानी की मांग भी क्रमशः 583 एमएलडी और 882 एमएलडी तक पहुंचने का अनुमान है। यहीकारण है कि नगर प्रशासन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आज निवेश कर रहा है।
लगभग 400 करोड़ रुपये की मुकणे जलापूर्ति परियोजना के माध्यम से शहर की पूरी जलापूर्ति प्रणाली को आधुनिकबनाया जा रहा है। परियोजना के तहत विल्होली में 274 एमएलडी क्षमता का नया जलशोधन संयंत्र स्थापित कियाजाएगा। इसके साथ 2 एमएलडी क्षमता का आधुनिक एमबीआर संयंत्र भी बनाया जा रहा है। विल्होली से नीलगिरीबाग तक नई पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे साधुग्राम सहित कई क्षेत्रों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। इसकेअलावा नई ग्रैविटी मेन पाइपलाइन, ऊंचे जलाशय (ईएसआर) और वितरण नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है।
परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका उद्देश्य केवल पानी की उपलब्धता बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे वितरणतंत्र को अधिक विश्वसनीय बनाना है। शहर के नवविकसित क्षेत्रों तक समान रूप से पानी पहुंचाने के साथ-साथ पुरानेक्षेत्रों पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा। भविष्य में 24×7 जलापूर्ति व्यवस्था की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदममाना जा रहा है।
एक नजर में मुकणे जलापूर्ति परियोजना
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
| कुल परियोजना लागत | ₹400 करोड़ |
| नया जलशोधन संयंत्र | 274 एमएलडी |
| एमबीआर संयंत्र | 2 एमएलडी |
| परियोजना पूर्ण होने का लक्ष्य | मार्च 2027 |
| दीर्घकालिक लक्ष्य | अगले 30 वर्षों की जल सुरक्षा |
परियोजना के वित्तपोषण का तरीका भी उतना ही उल्लेखनीय है। नासिक महानगरपालिका ने वर्ष 2026 में पहली बार₹200 करोड़ के ग्रीन म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए। किसी नगर निकाय द्वारा पर्यावरणीय और जल अवसंरचनापरियोजना के लिए पूंजी बाजार से इस प्रकार धन जुटाना एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसके अलावा अर्बनचैलेंज फंड और राज्य सरकार के सहयोग से परियोजना को वित्तीय मजबूती दी जा रही है।
तकनीकी दृष्टि से भी इस परियोजना को आधुनिक बनाया जा रहा है। पूरी जलापूर्ति प्रणाली एससीएडीए (SCADA) आधारित होगी, जिससे जलशोधन और वितरण नेटवर्क की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। पीएमआईएस (Project Monitoring Information System) के माध्यम से परियोजना की प्रगति पर नजर रखी जाएगी, जबकि TÜV SÜD South Asia जैसी स्वतंत्र एजेंसी गुणवत्ता परीक्षण करेगी।
नासिक के सामने एक बड़ी चुनौती जलापूर्ति के दौरान होने वाली पानी की हानि भी रही है। वर्ष 2017-18 के ऑडिट केअनुसार लगभग 49 प्रतिशत पानी वितरण के दौरान ही नष्ट हो जाता था, जिसका प्रमुख कारण पुरानी पाइपलाइनें थीं।अमृत योजना के तहत इन्हें चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है। साथ ही लगभग 2.5 लाख स्मार्ट एएमआर वाटर मीटरलगाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इस नुकसान को घटाकर 20 से 25 प्रतिशततक लाया जाए।
मुख्य बातें
आज जब अधिकांश शहर तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने में व्यस्त हैं, नासिक भविष्य की तैयारी कर रहा है।सिंहस्थ 2027 निश्चित रूप से इस विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन मुकणे जलापूर्ति परियोजना यहबताती है कि शहर की सोच केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह निवेश आने वाले 30 से 40 वर्षों तक नासिककी जल सुरक्षा, आर्थिक विकास और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में किया जा रहा है।
किसी भी शहर का वास्तविक विकास वही होता है जो आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए।नासिक आज उसी सोच के साथ अपनी बुनियादी संरचना को नया आकार दे रहा है।
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सिंहस्थ से आगे की सोच: कैसे नासिक अगले 30 वर्षों की जल सुरक्षा की नींव रख रहा है
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महाराष्ट्र का धार्मिक और सांस्कृतिक शहर नासिक आज इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2027 में यहां सिंहस्थकुंभ का आयोजन होना है, जहां लगभग 12 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। लेकिन नासिक महानगरपालिकाइस आयोजन को केवल कुछ महीनों की तैयारी तक सीमित नहीं रख रही। शहर ने इसे अगले 30 से 40 वर्षों कीआवश्यकताओं के अनुरूप अपनी बुनियादी संरचना विकसित करने के अवसर के रूप में लिया है।
इसी दूरदृष्टि का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है मुकणे जलापूर्ति परियोजना।
आज नासिक तेजी से विकसित हो रहा है। नए आवासीय क्षेत्र बस रहे हैं, औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और शहर काविस्तार लगातार हो रहा है। वर्तमान में लगभग 99 प्रतिशत आबादी नल जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी हुई है और शहर कीजलशोधन क्षमता लगभग 615 एमएलडी है। लेकिन आने वाले वर्षों में यह क्षमता पर्याप्त नहीं होगी।
अनुमान है कि वर्ष 2040 तक नासिक की आबादी लगभग 37.71 लाख और वर्ष 2055 तक 57.58 लाख तक पहुंचजाएगी। इसके साथ पानी की मांग भी क्रमशः 583 एमएलडी और 882 एमएलडी तक पहुंचने का अनुमान है। यहीकारण है कि नगर प्रशासन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आज निवेश कर रहा है।
लगभग 400 करोड़ रुपये की मुकणे जलापूर्ति परियोजना के माध्यम से शहर की पूरी जलापूर्ति प्रणाली को आधुनिकबनाया जा रहा है। परियोजना के तहत विल्होली में 274 एमएलडी क्षमता का नया जलशोधन संयंत्र स्थापित कियाजाएगा। इसके साथ 2 एमएलडी क्षमता का आधुनिक एमबीआर संयंत्र भी बनाया जा रहा है। विल्होली से नीलगिरीबाग तक नई पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे साधुग्राम सहित कई क्षेत्रों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। इसकेअलावा नई ग्रैविटी मेन पाइपलाइन, ऊंचे जलाशय (ईएसआर) और वितरण नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है।
परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका उद्देश्य केवल पानी की उपलब्धता बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे वितरणतंत्र को अधिक विश्वसनीय बनाना है। शहर के नवविकसित क्षेत्रों तक समान रूप से पानी पहुंचाने के साथ-साथ पुरानेक्षेत्रों पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा। भविष्य में 24×7 जलापूर्ति व्यवस्था की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदममाना जा रहा है।
एक नजर में मुकणे जलापूर्ति परियोजना
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
| कुल परियोजना लागत | ₹400 करोड़ |
| नया जलशोधन संयंत्र | 274 एमएलडी |
| एमबीआर संयंत्र | 2 एमएलडी |
| परियोजना पूर्ण होने का लक्ष्य | मार्च 2027 |
| दीर्घकालिक लक्ष्य | अगले 30 वर्षों की जल सुरक्षा |
परियोजना के वित्तपोषण का तरीका भी उतना ही उल्लेखनीय है। नासिक महानगरपालिका ने वर्ष 2026 में पहली बार₹200 करोड़ के ग्रीन म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए। किसी नगर निकाय द्वारा पर्यावरणीय और जल अवसंरचनापरियोजना के लिए पूंजी बाजार से इस प्रकार धन जुटाना एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसके अलावा अर्बनचैलेंज फंड और राज्य सरकार के सहयोग से परियोजना को वित्तीय मजबूती दी जा रही है।
तकनीकी दृष्टि से भी इस परियोजना को आधुनिक बनाया जा रहा है। पूरी जलापूर्ति प्रणाली एससीएडीए (SCADA) आधारित होगी, जिससे जलशोधन और वितरण नेटवर्क की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। पीएमआईएस (Project Monitoring Information System) के माध्यम से परियोजना की प्रगति पर नजर रखी जाएगी, जबकि TÜV SÜD South Asia जैसी स्वतंत्र एजेंसी गुणवत्ता परीक्षण करेगी।
नासिक के सामने एक बड़ी चुनौती जलापूर्ति के दौरान होने वाली पानी की हानि भी रही है। वर्ष 2017-18 के ऑडिट केअनुसार लगभग 49 प्रतिशत पानी वितरण के दौरान ही नष्ट हो जाता था, जिसका प्रमुख कारण पुरानी पाइपलाइनें थीं।अमृत योजना के तहत इन्हें चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है। साथ ही लगभग 2.5 लाख स्मार्ट एएमआर वाटर मीटरलगाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इस नुकसान को घटाकर 20 से 25 प्रतिशततक लाया जाए।
मुख्य बातें
आज जब अधिकांश शहर तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने में व्यस्त हैं, नासिक भविष्य की तैयारी कर रहा है।सिंहस्थ 2027 निश्चित रूप से इस विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन मुकणे जलापूर्ति परियोजना यहबताती है कि शहर की सोच केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह निवेश आने वाले 30 से 40 वर्षों तक नासिककी जल सुरक्षा, आर्थिक विकास और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में किया जा रहा है।
किसी भी शहर का वास्तविक विकास वही होता है जो आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए।नासिक आज उसी सोच के साथ अपनी बुनियादी संरचना को नया आकार दे रहा है।
