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विश्व समाचार: होर्मुज रूट, मामदानी-भागवत विवाद, ईरान प्रतिबंध और अन्य बड़ी खबरें
Sandeep Patel
26 अगस्त 2026 की प्रमुख विश्व खबरें: ईरान-ओमान होर्मुज रूट, कनाडा-अमेरिका टैरिफ, मामदानी-भागवत विवाद, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध और ऑपरेशन सिंदूर अपडेट।
ईरान-ओमान के अस्थायी होर्मुज समुद्री गलियारे से लेकर कनाडा के अमेरिकी सामान पर नए टैरिफ, न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर जोहरान मामदानी के विरोध और ईरान से जुड़े भारतीय कारोबारियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों तक, जानिए 26 अगस्त की प्रमुख वैश्विक खबरें। 26 अगस्त 2026 का वैश्विक घटनाक्रम पश्चिम एशिया, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण एशिया से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं से प्रभावित रहा। ईरान और ओमान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अस्थायी समुद्री व्यवस्था पर सहमति जताई है। कनाडा ने अमेरिकी वस्तुओं पर जवाबी टैरिफ की घोषणा की है, जबकि न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित न्यूयॉर्क कार्यक्रम का विरोध किया है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान के कथित पेट्रोलियम कारोबार को लेकर भारत स्थित कुछ कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टोरंटो में भारतीय कारोबारी समुदाय से मुलाकात की। वहीं, पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल्स पर भारतीय ड्रोन हमले को लेकर नई जानकारी दी है।
ईरान-ओमान ने बनाया होर्मुज रूट
ईरान और ओमान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास एक अस्थायी समुद्री गलियारा बनाने पर सहमति जताई है। प्रस्तावित मार्ग की चौड़ाई करीब सात समुद्री मील बताई गई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था रणनीतिक जलमार्ग के पूरी तरह दोबारा खुलने का संकेत नहीं है। तेहरान अब भी सैन्य दृष्टि से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद मानता है, जबकि अस्थायी व्यवस्था का उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों की नियंत्रित आवाजाही को संभव बनाना है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देश आगे एक स्थायी समुद्री व्यवस्था पर भी बातचीत करेंगे। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी बदलाव पर वैश्विक ऊर्जा बाजारों की नजर बनी हुई है।
कनाडा ने अमेरिका पर टैरिफ बढ़ाया
कनाडा ने अमेरिकी सामान पर 15%, 25% और 50% तक जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण व्यापारिक संबंध और खराब हो सकते हैं। नए शुल्क 8 सितंबर से लागू होने हैं। इनके दायरे में स्टील, डेयरी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं सहित कई अमेरिकी उत्पाद शामिल हैं। ओटावा ने व्यापार विवाद से प्रभावित कारोबारियों और कर्मचारियों की मदद के लिए 5.4 अरब डॉलर के सहायता पैकेज की भी घोषणा की है। ये कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के जवाब में उठाए गए हैं।
मामदानी ने भागवत कार्यक्रम का विरोध किया
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त को प्रस्तावित न्यूयॉर्क कार्यक्रम का विरोध किया है। भागवत को Universal Oneness Celebration कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करना है। मामदानी ने कहा कि वह इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते और RSS से जुड़ी जिस राजनीतिक विचारधारा को वह देखते हैं, उसे बहिष्कारी मानते हैं। हालांकि, मेयर ने यह भी स्वीकार किया कि न्यूयॉर्क प्रशासन के पास निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने का कानूनी अधिकार नहीं हो सकता है। नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों ने भी कार्यक्रम रद्द करने की मांग की है, जबकि आयोजकों ने इसे एकता और सामुदायिक संवाद पर केंद्रित कार्यक्रम बताया है।
ईरान कारोबार पर भारत की कंपनियों पर प्रतिबंध
अमेरिका ने चार भारत स्थित कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। वॉशिंगटन का आरोप है कि इनका संबंध ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से रहा है। यह कार्रवाई अमेरिका की Operation Economic Outcast के तहत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य गतिविधियों, साइबर खतरों और कथित अवैध तेल कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। नए प्रतिबंधों का असर ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है। यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका तेहरान की अंतरराष्ट्रीय आय और वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच सीमित करने के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है।
सीतारमण ने टोरंटो में की मुलाकात
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडा दौरे के दौरान टोरंटो में भारतीय मूल के कारोबारी नेताओं से मुलाकात की। बातचीत में भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों, निवेश और कारोबारी सहयोग को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा हुई। यह संपर्क ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच व्यापक कूटनीतिक चुनौतियों के बावजूद आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। भारतीय प्रवासी समुदाय तकनीक, वित्त, उद्यमिता और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है।
ऑपरेशन सिंदूर पर नई जानकारी
पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए एक भारतीय ड्रोन हमले को लेकर नई जानकारी दी है। उनके अनुसार, भारत में निर्मित Harop loitering munition ईंधन कम होने के बाद पाकिस्तान के किराना हिल्स से टकरा गया था। ड्रोन सर्गोधा के पास रडार प्रतिष्ठानों की तलाश कर रहा था। चौहान ने कहा कि भारत ने किराना हिल्स को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था। किराना हिल्स को लेकर विशेष ध्यान इसलिए रहा है क्योंकि इसे पाकिस्तान के रणनीतिक और परमाणु ढांचे से जोड़ा जाता है।
डॉली पार्टन का 80 वर्ष की उम्र में निधन
देश की मशहूर गायिका और संगीत हस्ती डॉली पार्टन का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके परिवार ने इसकी जानकारी दी। उनके निधन पर अमेरिका और दुनिया भर से श्रद्धांजलियां आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पार्टन के निधन पर शोक व्यक्त किया। पार्टन का करियर कई दशकों तक चला। वह गायिका और गीतकार के अलावा अभिनेत्री और परोपकारी के रूप में भी जानी जाती थीं। उनका निधन अमेरिकी लोकप्रिय संस्कृति और कंट्री म्यूजिक के एक बेहद प्रभावशाली दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
बिटकॉइन 80 हजार डॉलर के पार
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी तेजी देखने को मिली। बिटकॉइन कुछ समय के लिए 80,000 डॉलर के पार पहुंच गया और करीब 81,257 डॉलर तक गया। बाद में इसमें कुछ गिरावट आई, लेकिन तेजी ने क्रिप्टो बाजार में निवेशकों के बीच बढ़ते सकारात्मक रुझान को दिखाया। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले सप्ताह अरबों डॉलर की लीवरेज्ड शॉर्ट पोजिशन समाप्त हुईं, जिससे बिटकॉइन की तेजी को अतिरिक्त गति मिली। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि बिटकॉइन 80 हजार डॉलर के स्तर के ऊपर टिकता है या बाजार में फिर से अस्थिरता बढ़ती है।
सीजफायर पर फिर उठे सवाल
भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद हुए सीजफायर को लेकर भी बहस जारी रही। पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने युद्धविराम में बाहरी भूमिका के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि फैसला दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच बातचीत से हुआ था। उन्होंने यह भी पूछा कि आधिकारिक घोषणा से पहले अमेरिका को सीजफायर की जानकारी कैसे मिली। चौहान की टिप्पणी से युद्धविराम की प्रक्रिया और इसमें बाहरी पक्षों की भूमिका को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
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