दोस्ती क्यों हो रही है कम? क्या एडल्ट लाइफ में रिश्तों की जगह प्रोफेशनल नेटवर्किंग ले रही है

Priyanka Mathur

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नौकरी, परिवार और व्यस्त दिनचर्या के बीच पुराने दोस्तों से संपर्क बनाए रखना मुश्किल हो रहा है; वहीं करियर और काम से जुड़े रिश्तों को ज्यादा प्राथमिकता मिलने लगी है।

बचपन में दोस्ती के लिए किसी खास योजना की जरूरत नहीं पड़ती। स्कूल, कॉलेज या आसपास के लोगों के साथ रोज मिलने-जुलने से रिश्ते अपने आप बनते और मजबूत होते रहते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, नौकरी, परिवार, शहर बदलने और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच दोस्तों के लिए समय निकालना मुश्किल होने लगता है। यहीं से adult friendship का एक नया सवाल सामने आता है—क्या लोग दोस्ती को बनाए रखने की कोशिश कम कर रहे हैं और उसके बजाय ऐसे रिश्तों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जो उनके करियर या काम में मदद कर सकते हैं?

दोस्ती बनाए रखना मुश्किल क्यों होता है?

एडल्ट लाइफ में सबसे बड़ी चुनौती समय की होती है। ऑफिस का काम, आने-जाने का समय, परिवार और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के बीच दोस्तों से मिलने के लिए अलग समय निकालना आसान नहीं रहता। इसके अलावा लोग नौकरी या बेहतर अवसरों के लिए शहर बदलते हैं। दूरी बढ़ने के साथ रोजमर्रा की बातचीत कम होती जाती है। शुरुआत में सिर्फ व्यस्तता लगने वाला यह अंतर धीरे-धीरे रिश्ते में दूरी पैदा कर सकता है। कई बार दोस्ती खत्म नहीं होती, लेकिन उसकी फ्रीक्वेंसी बदल जाती है। रोज बात करने वाले दोस्त महीने में एक बार या साल में कुछ बार ही संपर्क में रह जाते हैं।

फिर प्रोफेशनल नेटवर्किंग क्यों बढ़ती है?

कामकाजी दुनिया में सही लोगों से संपर्क बनाए रखना करियर के लिए उपयोगी हो सकता है। नई नौकरी, बिजनेस अवसर, रेफरल, सलाह या इंडस्ट्री की जानकारी कई बार इसी नेटवर्क से मिलती है। LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म ने भी प्रोफेशनल रिश्तों को बनाए रखना आसान किया है। कुछ लोगों के लिए पुराने सहकर्मियों और इंडस्ट्री के संपर्कों के साथ नियमित रूप से जुड़े रहना अब करियर की रणनीति का हिस्सा बन चुका है। यानी दोस्ती में जहां भावनात्मक जुड़ाव मुख्य आधार होता है, वहीं प्रोफेशनल नेटवर्किंग में साझा काम, अवसर और पेशेवर हित ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

क्या हर रिश्ता नेटवर्किंग बन गया है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा। कई लोग करियर के साथ-साथ पुरानी दोस्ती को भी महत्व देते हैं। कुछ दोस्त वर्षों तक कम बातचीत के बावजूद एक-दूसरे के करीब रहते हैं। दूसरी तरफ, हर प्रोफेशनल संपर्क भी सिर्फ फायदे के लिए नहीं होता। ऑफिस या इंडस्ट्री से शुरू हुई दोस्ती वास्तविक निजी रिश्ते में बदल सकती है। समस्या तब महसूस होती है जब व्यक्ति के पास लोगों से जुड़ने के कई डिजिटल और पेशेवर साधन तो हों, लेकिन बिना किसी उद्देश्य के मिलने-बात करने वाले करीबी रिश्ते कम होते जाएं।

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सोशल मीडिया ने दोस्ती आसान की या सतही?

सोशल मीडिया की वजह से पुराने दोस्तों से संपर्क बनाए रखना पहले से आसान है। जन्मदिन की शुभकामना, फोटो पर कमेंट या मैसेज के जरिए संपर्क बना रह सकता है। लेकिन ऑनलाइन जुड़े रहना और वास्तविक दोस्ती एक ही चीज नहीं है। किसी की पोस्ट देखना यह जरूरी नहीं बताता कि दोनों लोग एक-दूसरे की जिंदगी में वास्तव में मौजूद भी हैं। यही वजह है कि कई लोगों के पास बड़ी ऑनलाइन contact list होने के बावजूद करीबी दोस्तों की संख्या सीमित हो सकती है।

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क्या कम दोस्त होना समस्या है?

जरूरी नहीं। उम्र बढ़ने के साथ लोगों की प्राथमिकताएं बदलती हैं और दोस्तियों की संख्या से ज्यादा उनकी गुणवत्ता महत्वपूर्ण हो सकती है। कुछ करीबी रिश्ते व्यक्ति को पर्याप्त भावनात्मक और सामाजिक सहारा दे सकते हैं। लेकिन अगर काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बिगड़ जाए और व्यक्ति के सामाजिक रिश्ते लगातार कमजोर होते जाएं, तो अकेलापन और सामाजिक दूरी की समस्या सामने आ सकती है। इसलिए सवाल यह नहीं कि प्रोफेशनल नेटवर्किंग अच्छी है या दोस्ती, बल्कि यह है कि क्या व्यस्त एडल्ट लाइफ में दोनों के लिए पर्याप्त जगह बच रही है।

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