‘Gaslighting’ से ‘Toxic’ तक: सोशल मीडिया पर Mental Health Terms का बढ़ता इस्तेमाल, क्या खो रहा है असली मतलब?

Priyanka Mathur

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Therapy-speak ने मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत को आसान बनाया है, लेकिन मनमाने इस्तेमाल से गंभीर मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं का अर्थ धुंधला होने और गलत self-diagnosis का खतरा भी बढ़ रहा है

सोशल मीडिया पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े शब्द अब रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन गए हैं। Instagram, TikTok और दूसरे प्लेटफॉर्म पर ‘gaslighting’, ‘toxic’, ‘trauma’, ‘burnout’, ‘narcissist’ और ‘boundaries’ जैसे शब्द रिश्तों, ऑफिस और निजी अनुभवों को समझाने के लिए खूब इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसका फायदा यह है कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर लोगों के बीच बातचीत बढ़ी है। लेकिन समस्या तब सामने आती है, जब जटिल मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं को छोटे वीडियो या पोस्ट में इतना सरल कर दिया जाता है कि उनका असली अर्थ ही बदल जाता है।

‘Therapy-speak’ क्या है?

मनोविज्ञान से जुड़े शब्दों का सामान्य बातचीत में इस्तेमाल बढ़ने को अक्सर ‘therapy-speak’ कहा जाता है। इससे लोगों को अपनी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए नई भाषा मिल सकती है, लेकिन इन शब्दों का गलत इस्तेमाल भ्रम भी पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए, किसी बात पर असहमति होना अपने आप में gaslighting नहीं है। इस शब्द का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को उसकी अपनी यादों, अनुभवों या वास्तविकता की समझ पर लगातार संदेह करने के लिए प्रभावित या manipulate किया जाता है।

हर खराब रिश्ता ‘toxic’ नहीं

सोशल मीडिया पर ‘toxic relationship’ शब्द भी बहुत आम है। लेकिन एक बहस, नाराजगी या मतभेद को तुरंत toxic कहना सही नहीं है। हानिकारक रिश्तों में अक्सर व्यवहार का एक लगातार पैटर्न दिखाई देता है, जैसे emotional manipulation, disrespect, control, jealousy या abuse। इसलिए किसी एक घटना और लंबे समय से चले आ रहे हानिकारक व्यवहार के बीच अंतर समझना जरूरी है।

‘Burnout’ और ‘depression’ में फर्क

कुछ दिनों तक ज्यादा काम करने या लगातार deadlines के बाद थकान को ‘burnout’ कहना आम हो गया है। इसी तरह सामान्य उदासी को ‘depression’ और व्यवस्थित आदत को ‘OCD’ कहना भी सोशल मीडिया पर देखने को मिलता है। ऐसे clinical terms का सामान्य अनुभवों के लिए लगातार इस्तेमाल उनकी वास्तविक गंभीरता को कमजोर कर सकता है। बिना पर्याप्त जानकारी के खुद को किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का label देना भी सही तरीका नहीं है।

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छोटे वीडियो में गायब हो जाता है context

Mental health content का बड़ा हिस्सा short-form videos के जरिए लोगों तक पहुंच रहा है। इससे जटिल विषय आसान भाषा में समझना संभव हुआ है, लेकिन कुछ सेकंड के वीडियो में जरूरी संदर्भ छूट सकता है। यही वजह है कि किसी पोस्ट या वीडियो में इस्तेमाल किए गए psychological label को तुरंत खुद या किसी दूसरे व्यक्ति पर लागू करना जोखिम भरा हो सकता है।

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‘Gaslighting’ और ‘Trauma’ का बढ़ता इस्तेमाल

हर असहमति को gaslighting बताने से वास्तविक समस्या समझने के बजाय बातचीत एक label पर केंद्रित हो सकती है। इसी तरह trauma शब्द का इस्तेमाल भी सोशल मीडिया पर कई तरह के मुश्किल अनुभवों के लिए किया जाने लगा है। 2024 के एक अध्ययन में TikTok पर #trauma से जुड़े 143 वीडियो का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन वीडियो में trauma को अलग-अलग व्यक्तिगत अनुभवों और व्यवहारों से जोड़ा गया था, जिससे इस अवधारणा की सीमाएं व्यापक होती दिखाई दीं।

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फिर क्या ये शब्द इस्तेमाल नहीं करने चाहिए?

ऐसा भी नहीं है। Mental health vocabulary का आम बातचीत में आना सकारात्मक बदलाव हो सकता है। ‘boundary’, ‘burnout’ या ‘emotional manipulation’ जैसे शब्द किसी व्यक्ति को अपनी परेशानी समझने और उस पर बात शुरू करने में मदद कर सकते हैं। समस्या शब्दों के इस्तेमाल में नहीं, बल्कि बिना संदर्भ और गलत अर्थ में इस्तेमाल करने में है। किसी गंभीर या लगातार बनी समस्या की स्थिति में सोशल मीडिया के self-diagnosis पर निर्भर रहने के बजाय qualified mental-health professional से सलाह लेना ज्यादा उचित है।

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