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जून में कालाष्टमी 2026: 8 जून को रहेगा विशेष संयोग, जानें पूजा का महत्व और व्रत नियम
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भगवान काल भैरव की आराधना का पावन दिन, श्रद्धालु रखेंगे व्रत
जून माह की मासिक कालाष्टमी इस वर्ष 8 जून 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। भगवान काल भैरव को समर्पित यह तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी व्रत रखा जाता है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट, भय और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। इस बार कालाष्टमी का पर्व सोमवार को पड़ रहा है, जिसे भगवान शिव का दिन माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच इस तिथि को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 8 जून को सुबह 3 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 9 जून को सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इसी अवधि में भक्त व्रत और पूजा का पालन करेंगे। बताया जा रहा है कि देश के कई शिव और काल भैरव मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। सुबह से ही श्रद्धालु स्नान कर भगवान शिव और काल भैरव की पूजा करेंगे तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन व्रत रखने वाले लोग सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र स्नान करते हैं। इसके बाद भगवान काल भैरव की विधिवत पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु दिनभर निर्जला या फलाहार व्रत भी रखते हैं। शाम के समय काल भैरव मंदिरों में दर्शन और विशेष आरती का आयोजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान भैरव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं। मान्यता है कि भगवान काल भैरव भगवान शिव का ही एक उग्र और शक्तिशाली स्वरूप हैं। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ था। उसी दौरान भगवान शिव ने क्रोधित होकर काल भैरव का रूप धारण किया और ब्रह्मा के पांचवें सिर का अंत कर दिया। इसके बाद से भगवान शिव के इस स्वरूप की पूजा काल भैरव के रूप में की जाने लगी। धार्मिक ग्रंथों में उन्हें समय का देवता भी कहा गया है। माना जाता है कि जो व्यक्ति काल भैरव की आराधना करता है, उसे समय और परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने की शक्ति मिलती है।
कालाष्टमी के दिन पितरों के निमित्त भी विशेष कर्मकांड किए जाते हैं। कई स्थानों पर सुबह के समय पूर्वजों के लिए तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है। धार्मिक जानकारों के अनुसार इस दिन किया गया दान और सेवा कार्य विशेष फलदायी माना जाता है। काशी, उज्जैन और अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। हालांकि इस बार भी स्थानीय मंदिरों में भक्तों की अच्छी खासी भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है। कालाष्टमी से जुड़ी एक और विशेष परंपरा कुत्तों को भोजन कराने की है। मान्यता है कि काला कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। इसी कारण भक्त इस दिन कुत्तों को दूध, दही, मिठाई या अन्य खाद्य सामग्री खिलाते हैं। कई लोग गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन भी कराते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे पुण्यदायी कार्य माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी इस अवसर पर सेवा कार्यों का आयोजन करती हैं।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि कालाष्टमी का व्रत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी अवसर माना जाता है। भक्त इस दिन काल भैरव स्तोत्र, शिव मंत्र और काल भैरव कथा का पाठ करते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरी रात जागरण कर भगवान शिव और महाकाल की महिमा का श्रवण भी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भय, रोग तथा मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है। 8 जून को पड़ने वाली मासिक कालाष्टमी को लेकर देशभर के शिव भक्तों में उत्साह का माहौल है। मंदिरों में विशेष सजावट और पूजा की तैयारियां जारी हैं। श्रद्धालु भगवान काल भैरव की आराधना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में शुभ फल प्रदान करता है तथा भगवान शिव और काल भैरव की कृपा प्राप्त होती है।
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जून में कालाष्टमी 2026: 8 जून को रहेगा विशेष संयोग, जानें पूजा का महत्व और व्रत नियम
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जून माह की मासिक कालाष्टमी इस वर्ष 8 जून 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। भगवान काल भैरव को समर्पित यह तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी व्रत रखा जाता है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट, भय और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। इस बार कालाष्टमी का पर्व सोमवार को पड़ रहा है, जिसे भगवान शिव का दिन माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच इस तिथि को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 8 जून को सुबह 3 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 9 जून को सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इसी अवधि में भक्त व्रत और पूजा का पालन करेंगे। बताया जा रहा है कि देश के कई शिव और काल भैरव मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। सुबह से ही श्रद्धालु स्नान कर भगवान शिव और काल भैरव की पूजा करेंगे तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन व्रत रखने वाले लोग सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र स्नान करते हैं। इसके बाद भगवान काल भैरव की विधिवत पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु दिनभर निर्जला या फलाहार व्रत भी रखते हैं। शाम के समय काल भैरव मंदिरों में दर्शन और विशेष आरती का आयोजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान भैरव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं। मान्यता है कि भगवान काल भैरव भगवान शिव का ही एक उग्र और शक्तिशाली स्वरूप हैं। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ था। उसी दौरान भगवान शिव ने क्रोधित होकर काल भैरव का रूप धारण किया और ब्रह्मा के पांचवें सिर का अंत कर दिया। इसके बाद से भगवान शिव के इस स्वरूप की पूजा काल भैरव के रूप में की जाने लगी। धार्मिक ग्रंथों में उन्हें समय का देवता भी कहा गया है। माना जाता है कि जो व्यक्ति काल भैरव की आराधना करता है, उसे समय और परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने की शक्ति मिलती है।
कालाष्टमी के दिन पितरों के निमित्त भी विशेष कर्मकांड किए जाते हैं। कई स्थानों पर सुबह के समय पूर्वजों के लिए तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है। धार्मिक जानकारों के अनुसार इस दिन किया गया दान और सेवा कार्य विशेष फलदायी माना जाता है। काशी, उज्जैन और अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। हालांकि इस बार भी स्थानीय मंदिरों में भक्तों की अच्छी खासी भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है। कालाष्टमी से जुड़ी एक और विशेष परंपरा कुत्तों को भोजन कराने की है। मान्यता है कि काला कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। इसी कारण भक्त इस दिन कुत्तों को दूध, दही, मिठाई या अन्य खाद्य सामग्री खिलाते हैं। कई लोग गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन भी कराते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे पुण्यदायी कार्य माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी इस अवसर पर सेवा कार्यों का आयोजन करती हैं।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि कालाष्टमी का व्रत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी अवसर माना जाता है। भक्त इस दिन काल भैरव स्तोत्र, शिव मंत्र और काल भैरव कथा का पाठ करते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरी रात जागरण कर भगवान शिव और महाकाल की महिमा का श्रवण भी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भय, रोग तथा मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है। 8 जून को पड़ने वाली मासिक कालाष्टमी को लेकर देशभर के शिव भक्तों में उत्साह का माहौल है। मंदिरों में विशेष सजावट और पूजा की तैयारियां जारी हैं। श्रद्धालु भगवान काल भैरव की आराधना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में शुभ फल प्रदान करता है तथा भगवान शिव और काल भैरव की कृपा प्राप्त होती है।
