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जैवलिन छोड़ रग्बी में चमकीं अमनदीप कौर, बनीं स्टार खिलाड़ी
स्पोर्ट्स डेस्क
ऑक्शन में घंटों अनसोल्ड रहने के बाद चेन्नई बुल्स ने खरीदा, 1.6 लाख की बोली के बाद बनीं ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’
पंजाब की 24 वर्षीय अमनदीप कौर की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। कभी जैवलिन थ्रो में भविष्य बनाने का सपना देखने वाली अमनदीप ने रग्बी में कदम रखा और हाल ही में रग्बी प्रीमियर लीग 2026 में ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’ का खिताब अपने नाम कर लिया। यह उपलब्धि उनके लिए आसान नहीं थी, क्योंकि इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता उतार-चढ़ाव और संघर्षों से भरा रहा। शुरुआती दौर में जिस खिलाड़ी को किसी टीम ने लंबे समय तक नहीं चुना, वही बाद में पूरे टूर्नामेंट की सबसे चर्चित खिलाड़ी बन गईं।
अप्रैल में हुई लीग की पहली नीलामी के दिन अमनदीप के लिए हालात काफी कठिन थे। सुबह 9 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक वह अनसोल्ड रहीं और किसी भी टीम ने उन्हें नहीं खरीदा। यह समय उनके लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन था, क्योंकि उम्मीदें लगातार टूट रही थीं। लेकिन किस्मत ने आखिरी समय पर करवट ली। रात करीब 8 बजे उनकी एक दोस्त ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि उन्हें चेन्नई बुल्स ने 1.6 लाख रुपये की बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल कर लिया है। यह खबर उनके लिए राहत और खुशी दोनों लेकर आई। खास बात यह रही कि वह नीलामी में संयुक्त रूप से तीसरी सबसे महंगी खिलाड़ी भी बनीं। इसके बाद अमनदीप ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया और चेन्नई बुल्स को लीग स्टेज में शीर्ष स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। टीम भले ही फाइनल जीत नहीं सकी, लेकिन उपविजेता रही और अमनदीप का प्रदर्शन सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया।
अमनदीप का सफर सिर्फ खेल बदलने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से जीवन की दिशा बदलने जैसा था। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब की रहने वाली अमनदीप ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी से फिजिकल एजुकेशन में ग्रेजुएशन किया है। शुरुआत में वह जैवलिन थ्रो में करियर बनाना चाहती थीं, लेकिन आर्थिक परेशानियों और ट्रेनिंग की अस्थिरता ने उनके रास्ते मुश्किल कर दिए। उनके कोच का सेंटर बदल जाने के कारण नियमित अभ्यास प्रभावित हुआ और यहीं से उनके खेल करियर में बड़ा बदलाव आया। इसी दौरान उन्होंने रग्बी की ओर रुख किया। न्यूजीलैंड की खिलाड़ी पोर्टिया वुडमैन के खेल और आक्रामक शैली ने उन्हें काफी प्रभावित किया और उन्होंने रग्बी को गंभीरता से लेना शुरू किया। धीरे-धीरे रग्बी उनके लिए सिर्फ खेल नहीं बल्कि अपनी ऊर्जा और भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम बन गया।
परिवार की मंजूरी भी इस सफर में आसान नहीं थी। उनके भाई, जो खुद एक पहलवान हैं, शुरुआत में रग्बी को लेकर काफी संशय में थे। उनका मानना था कि अमनदीप को व्यक्तिगत खेलों पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन अमनदीप ने अपने फैसले पर भरोसा बनाए रखा। रग्बी के दौरान उन्हें कई बार चोटें भी आईं, कभी सिर में टांके लगे तो कभी हाथ में फ्रैक्चर हुआ। उन्होंने कई बार अपनी चोटों की जानकारी परिवार से छिपाई, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उन्हें खेल छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए। लेकिन समय के साथ उनका प्रदर्शन और समर्पण देखकर परिवार का नजरिया पूरी तरह बदल गया।
2025 में अमनदीप को पहली बार भारतीय रग्बी टीम के नेशनल कैंप में बुलाया गया। यह उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। चीन और श्रीलंका दौरे के लिए जब अंतिम 14 खिलाड़ियों का चयन हुआ, तो उनका नाम सबसे पहले लिया गया। यह उनके लिए गर्व का क्षण था, क्योंकि उन्होंने उसी टीम के साथ खेलना शुरू किया, जिसकी कप्तान शिखा यादव को वह पहले सिर्फ वीडियो में देखकर सीखती थीं। चीन में एशियन रग्बी सेवन सीरीज के दौरान उन्होंने पहली बार भारत की जर्सी पहनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
आज अमनदीप कौर का लक्ष्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। वह भारत के लिए एशियन गेम्स में मेडल जीतने का सपना देख रही हैं। उनका मानना है कि मेहनत और आत्मविश्वास के साथ कोई भी खिलाड़ी किसी भी स्तर तक पहुंच सकता है। जैवलिन से रग्बी तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि सही दिशा और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी खेल में चमक सकती है। अमनदीप की कहानी अब युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनती जा रही है, खासकर उन लोगों के लिए जो शुरुआत में असफलताओं से जूझ रहे हैं।
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जैवलिन छोड़ रग्बी में चमकीं अमनदीप कौर, बनीं स्टार खिलाड़ी
स्पोर्ट्स डेस्क
पंजाब की 24 वर्षीय अमनदीप कौर की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। कभी जैवलिन थ्रो में भविष्य बनाने का सपना देखने वाली अमनदीप ने रग्बी में कदम रखा और हाल ही में रग्बी प्रीमियर लीग 2026 में ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’ का खिताब अपने नाम कर लिया। यह उपलब्धि उनके लिए आसान नहीं थी, क्योंकि इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता उतार-चढ़ाव और संघर्षों से भरा रहा। शुरुआती दौर में जिस खिलाड़ी को किसी टीम ने लंबे समय तक नहीं चुना, वही बाद में पूरे टूर्नामेंट की सबसे चर्चित खिलाड़ी बन गईं।
अप्रैल में हुई लीग की पहली नीलामी के दिन अमनदीप के लिए हालात काफी कठिन थे। सुबह 9 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक वह अनसोल्ड रहीं और किसी भी टीम ने उन्हें नहीं खरीदा। यह समय उनके लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन था, क्योंकि उम्मीदें लगातार टूट रही थीं। लेकिन किस्मत ने आखिरी समय पर करवट ली। रात करीब 8 बजे उनकी एक दोस्त ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि उन्हें चेन्नई बुल्स ने 1.6 लाख रुपये की बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल कर लिया है। यह खबर उनके लिए राहत और खुशी दोनों लेकर आई। खास बात यह रही कि वह नीलामी में संयुक्त रूप से तीसरी सबसे महंगी खिलाड़ी भी बनीं। इसके बाद अमनदीप ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया और चेन्नई बुल्स को लीग स्टेज में शीर्ष स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। टीम भले ही फाइनल जीत नहीं सकी, लेकिन उपविजेता रही और अमनदीप का प्रदर्शन सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया।
अमनदीप का सफर सिर्फ खेल बदलने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से जीवन की दिशा बदलने जैसा था। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब की रहने वाली अमनदीप ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी से फिजिकल एजुकेशन में ग्रेजुएशन किया है। शुरुआत में वह जैवलिन थ्रो में करियर बनाना चाहती थीं, लेकिन आर्थिक परेशानियों और ट्रेनिंग की अस्थिरता ने उनके रास्ते मुश्किल कर दिए। उनके कोच का सेंटर बदल जाने के कारण नियमित अभ्यास प्रभावित हुआ और यहीं से उनके खेल करियर में बड़ा बदलाव आया। इसी दौरान उन्होंने रग्बी की ओर रुख किया। न्यूजीलैंड की खिलाड़ी पोर्टिया वुडमैन के खेल और आक्रामक शैली ने उन्हें काफी प्रभावित किया और उन्होंने रग्बी को गंभीरता से लेना शुरू किया। धीरे-धीरे रग्बी उनके लिए सिर्फ खेल नहीं बल्कि अपनी ऊर्जा और भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम बन गया।
परिवार की मंजूरी भी इस सफर में आसान नहीं थी। उनके भाई, जो खुद एक पहलवान हैं, शुरुआत में रग्बी को लेकर काफी संशय में थे। उनका मानना था कि अमनदीप को व्यक्तिगत खेलों पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन अमनदीप ने अपने फैसले पर भरोसा बनाए रखा। रग्बी के दौरान उन्हें कई बार चोटें भी आईं, कभी सिर में टांके लगे तो कभी हाथ में फ्रैक्चर हुआ। उन्होंने कई बार अपनी चोटों की जानकारी परिवार से छिपाई, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उन्हें खेल छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए। लेकिन समय के साथ उनका प्रदर्शन और समर्पण देखकर परिवार का नजरिया पूरी तरह बदल गया।
2025 में अमनदीप को पहली बार भारतीय रग्बी टीम के नेशनल कैंप में बुलाया गया। यह उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। चीन और श्रीलंका दौरे के लिए जब अंतिम 14 खिलाड़ियों का चयन हुआ, तो उनका नाम सबसे पहले लिया गया। यह उनके लिए गर्व का क्षण था, क्योंकि उन्होंने उसी टीम के साथ खेलना शुरू किया, जिसकी कप्तान शिखा यादव को वह पहले सिर्फ वीडियो में देखकर सीखती थीं। चीन में एशियन रग्बी सेवन सीरीज के दौरान उन्होंने पहली बार भारत की जर्सी पहनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
आज अमनदीप कौर का लक्ष्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। वह भारत के लिए एशियन गेम्स में मेडल जीतने का सपना देख रही हैं। उनका मानना है कि मेहनत और आत्मविश्वास के साथ कोई भी खिलाड़ी किसी भी स्तर तक पहुंच सकता है। जैवलिन से रग्बी तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि सही दिशा और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी खेल में चमक सकती है। अमनदीप की कहानी अब युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनती जा रही है, खासकर उन लोगों के लिए जो शुरुआत में असफलताओं से जूझ रहे हैं।
