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कटघोरा में 13 हाथियों की जलक्रीड़ा, वीडियो वायरल
Digital Desk
सलिहाभाठा जलाशय में मस्ती करते दिखा हाथियों का झुंड, वन विभाग अलर्ट
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल में 13 हाथियों के झुंड का एक दुर्लभ और मनमोहक दृश्य सामने आया है। ऐतमा नगर परिक्षेत्र के सलिहाभाठा जलाशय में इन हाथियों को जलक्रीड़ा करते और ‘डस्ट बाथ’ लेते हुए देखा गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हाथियों का झुंड पानी में उतरकर एक-दूसरे पर सूंड़ से पानी उछालते हुए मस्ती कर रहा है। कुछ हाथी गहरे पानी में लोटपोट होते नजर आते हैं, जबकि अन्य किनारे पर खड़े होकर अपने शरीर पर सूखी मिट्टी और धूल डालते दिखाई देते हैं। यह पूरी गतिविधि प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है, जिसे देखकर स्थानीय लोग भी हैरान रह गए। सुबह और शाम के समय यह दृश्य और भी ज्यादा सक्रिय रहता है, जब हाथियों का झुंड जलस्रोतों की ओर पहुंचता है। हाथियों द्वारा धूल-मिट्टी अपने शरीर पर डालने की प्रक्रिया को ‘डस्ट बाथ’ कहा जाता है। यह उनकी प्राकृतिक आदत है, जो उन्हें तेज धूप, गर्मी और कीड़ों के हमले से बचाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलक्रीड़ा के बाद हाथी अक्सर इस प्रक्रिया को अपनाते हैं, जिससे उनकी त्वचा सुरक्षित रहती है और शरीर का तापमान भी नियंत्रित होता है। यह व्यवहार हाथियों के सामाजिक और प्राकृतिक जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, कटघोरा वनमंडल में हाथियों की आवाजाही कोई नई बात नहीं है, लेकिन इतने बड़े झुंड का एक साथ जलाशय में दिखाई देना दुर्लभ है। बताया जा रहा है कि इस इलाके में करीब 50 हाथियों का एक स्थायी दल विचरण करता है, जो अक्सर भोजन और पानी की तलाश में जंगलों से निकलकर खेतों और जलस्रोतों की ओर पहुंचता है। रात के समय इनकी गतिविधियां अधिक बढ़ जाती हैं, जिससे कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ानी पड़ती है। वीडियो वायरल होने के बाद कटघोरा वन विभाग तुरंत अलर्ट हो गया है। वन विभाग की टीम ने सलिहाभाठा जलाशय और आसपास के गांवों में गश्त तेज कर दी है। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे हाथियों के करीब जाने की कोशिश न करें और उन्हें किसी भी तरह से परेशान न करें। विभाग का कहना है कि ऐसे प्राकृतिक दृश्यों को दूर से देखना ही सुरक्षित और उचित है।
वन विभाग ने ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हाथियों के दिखने पर शोर न मचाया जाए, पटाखे न जलाए जाएं और किसी भी प्रकार की उकसाने वाली गतिविधि से बचा जाए। ऐसा करने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है, जो दोनों पक्षों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, गर्मी के मौसम में जंगलों में जलस्रोत सूखने लगते हैं, जिससे हाथियों के झुंड पानी की तलाश में नदी, तालाब और जलाशयों की ओर बढ़ते हैं। यही कारण है कि कटघोरा वनमंडल जैसे क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही अधिक देखी जाती है। इस समय वन विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
वन विभाग ने निगरानी को और मजबूत करते हुए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग भी शुरू किया है। इन तकनीकों के जरिए हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे उनकी लोकेशन ट्रैक करने में मदद मिलती है और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जा सकता है। यह पूरा दृश्य जहां एक ओर प्रकृति की सुंदरता और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी याद दिलाता है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। कटघोरा का यह वायरल वीडियो लोगों को प्रकृति के करीब लाने के साथ-साथ सतर्कता का संदेश भी दे रहा है।
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कटघोरा में 13 हाथियों की जलक्रीड़ा, वीडियो वायरल
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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल में 13 हाथियों के झुंड का एक दुर्लभ और मनमोहक दृश्य सामने आया है। ऐतमा नगर परिक्षेत्र के सलिहाभाठा जलाशय में इन हाथियों को जलक्रीड़ा करते और ‘डस्ट बाथ’ लेते हुए देखा गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हाथियों का झुंड पानी में उतरकर एक-दूसरे पर सूंड़ से पानी उछालते हुए मस्ती कर रहा है। कुछ हाथी गहरे पानी में लोटपोट होते नजर आते हैं, जबकि अन्य किनारे पर खड़े होकर अपने शरीर पर सूखी मिट्टी और धूल डालते दिखाई देते हैं। यह पूरी गतिविधि प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है, जिसे देखकर स्थानीय लोग भी हैरान रह गए। सुबह और शाम के समय यह दृश्य और भी ज्यादा सक्रिय रहता है, जब हाथियों का झुंड जलस्रोतों की ओर पहुंचता है। हाथियों द्वारा धूल-मिट्टी अपने शरीर पर डालने की प्रक्रिया को ‘डस्ट बाथ’ कहा जाता है। यह उनकी प्राकृतिक आदत है, जो उन्हें तेज धूप, गर्मी और कीड़ों के हमले से बचाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलक्रीड़ा के बाद हाथी अक्सर इस प्रक्रिया को अपनाते हैं, जिससे उनकी त्वचा सुरक्षित रहती है और शरीर का तापमान भी नियंत्रित होता है। यह व्यवहार हाथियों के सामाजिक और प्राकृतिक जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, कटघोरा वनमंडल में हाथियों की आवाजाही कोई नई बात नहीं है, लेकिन इतने बड़े झुंड का एक साथ जलाशय में दिखाई देना दुर्लभ है। बताया जा रहा है कि इस इलाके में करीब 50 हाथियों का एक स्थायी दल विचरण करता है, जो अक्सर भोजन और पानी की तलाश में जंगलों से निकलकर खेतों और जलस्रोतों की ओर पहुंचता है। रात के समय इनकी गतिविधियां अधिक बढ़ जाती हैं, जिससे कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ानी पड़ती है। वीडियो वायरल होने के बाद कटघोरा वन विभाग तुरंत अलर्ट हो गया है। वन विभाग की टीम ने सलिहाभाठा जलाशय और आसपास के गांवों में गश्त तेज कर दी है। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे हाथियों के करीब जाने की कोशिश न करें और उन्हें किसी भी तरह से परेशान न करें। विभाग का कहना है कि ऐसे प्राकृतिक दृश्यों को दूर से देखना ही सुरक्षित और उचित है।
वन विभाग ने ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हाथियों के दिखने पर शोर न मचाया जाए, पटाखे न जलाए जाएं और किसी भी प्रकार की उकसाने वाली गतिविधि से बचा जाए। ऐसा करने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है, जो दोनों पक्षों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, गर्मी के मौसम में जंगलों में जलस्रोत सूखने लगते हैं, जिससे हाथियों के झुंड पानी की तलाश में नदी, तालाब और जलाशयों की ओर बढ़ते हैं। यही कारण है कि कटघोरा वनमंडल जैसे क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही अधिक देखी जाती है। इस समय वन विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
वन विभाग ने निगरानी को और मजबूत करते हुए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग भी शुरू किया है। इन तकनीकों के जरिए हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे उनकी लोकेशन ट्रैक करने में मदद मिलती है और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जा सकता है। यह पूरा दृश्य जहां एक ओर प्रकृति की सुंदरता और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी याद दिलाता है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। कटघोरा का यह वायरल वीडियो लोगों को प्रकृति के करीब लाने के साथ-साथ सतर्कता का संदेश भी दे रहा है।
