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आज का पंचांग 21 मार्च 2026: चैत्र शुक्ल तृतीया, शुभ मुहूर्त और गणगौर-पर्व का महत्व
धर्म डेस्क
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मत्स्य जयंती और गणगौर पूजा, जानें पूजा के लिए श्रेष्ठ समय, राहुकाल और अन्य महत्वपूर्ण विवरण
आज शनिवार, 21 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि है, जो रात्रि 11:56 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसके पश्चात चतुर्थी तिथि आरंभ होगी। इस पावन अवसर पर देशभर में 'मत्स्य जयंती' और 'गणगौर पूजा' का उत्सव मनाया जा रहा है। विशेष रूप से भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य अवतार का स्मरण और माता पार्वती व भगवान शिव की आराधना इस दिन सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
आज चंद्रदेव मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में स्थित हैं, जिसका स्वामी केतु है। अश्विनी नक्षत्र की सक्रियता से लोगों में उत्साह, फुर्ती और आत्मविश्वास बढ़ेगा, जो कार्यक्षेत्र और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक परिणाम दे सकता है। साथ ही, आज इन्द्र योग का संयोग है, जो बड़ी इच्छाओं की पूर्ति और कार्यों में सफलता के लिए शुभ माना जाता है।
पूजा-अनुष्ठानों के लिए आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक है। वहीं, शुभ अमृत काल सायं 05:58 बजे से 07:27 बजे तक रहेगा। राहुकाल सुबह 09:26 बजे से 10:57 बजे तक है, जिसे शुभ कार्यों के लिए टालना उचित रहेगा। अन्य अशुभ समयों में गुलिकाल (06:24 से 07:55 बजे) और यमगण्ड (02:00 से 03:31 बजे) शामिल हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय क्रमशः 06:24 बजे और 18:33 बजे निर्धारित है।
मत्स्य जयंती का महत्व विशेष है। चैत्र शुक्ल तृतीया को भगवान विष्णु ने सत्य युग में जल प्रलय से प्रजा की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था। इस अवसर पर विष्णु मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और पूजा की जाती है। आज दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:07 बजे तक मत्स्य जयंती का मुहूर्त रहेगा, जिसमें भक्त विधिपूर्वक भगवान के इस अवतार का स्मरण करते हैं।
गणगौर पूजा का उत्सव राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में विशेष रूप से मनाया जाता है। 'गण' शिव और 'गौर' पार्वती का प्रतीक है। अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना के लिए व्रत करती हैं। महिलाएं मिट्टी से गौरा जी की प्रतिमा बनाकर उसे श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक गीतों के साथ पूजन करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन पूजा और व्रत करने से न केवल व्यक्तिगत सौभाग्य बढ़ता है, बल्कि परिवार में सामंजस्य और कल्याण भी आता है। आज का दिन धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अत्यंत शुभ है।
संपूर्ण पंचांग विवरण के अनुसार, आज की पूजा और अनुष्ठानों में सावधानी और नियम पालन के साथ भाग लेने से आध्यात्मिक लाभ अधिक होगा। भक्त सुबह से ही नक्षत्र, योग और तिथि की जानकारी के अनुसार अनुष्ठान आरंभ कर सकते हैं।
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आज का पंचांग 21 मार्च 2026: चैत्र शुक्ल तृतीया, शुभ मुहूर्त और गणगौर-पर्व का महत्व
धर्म डेस्क
आज शनिवार, 21 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि है, जो रात्रि 11:56 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसके पश्चात चतुर्थी तिथि आरंभ होगी। इस पावन अवसर पर देशभर में 'मत्स्य जयंती' और 'गणगौर पूजा' का उत्सव मनाया जा रहा है। विशेष रूप से भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य अवतार का स्मरण और माता पार्वती व भगवान शिव की आराधना इस दिन सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
आज चंद्रदेव मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में स्थित हैं, जिसका स्वामी केतु है। अश्विनी नक्षत्र की सक्रियता से लोगों में उत्साह, फुर्ती और आत्मविश्वास बढ़ेगा, जो कार्यक्षेत्र और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक परिणाम दे सकता है। साथ ही, आज इन्द्र योग का संयोग है, जो बड़ी इच्छाओं की पूर्ति और कार्यों में सफलता के लिए शुभ माना जाता है।
पूजा-अनुष्ठानों के लिए आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक है। वहीं, शुभ अमृत काल सायं 05:58 बजे से 07:27 बजे तक रहेगा। राहुकाल सुबह 09:26 बजे से 10:57 बजे तक है, जिसे शुभ कार्यों के लिए टालना उचित रहेगा। अन्य अशुभ समयों में गुलिकाल (06:24 से 07:55 बजे) और यमगण्ड (02:00 से 03:31 बजे) शामिल हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय क्रमशः 06:24 बजे और 18:33 बजे निर्धारित है।
मत्स्य जयंती का महत्व विशेष है। चैत्र शुक्ल तृतीया को भगवान विष्णु ने सत्य युग में जल प्रलय से प्रजा की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था। इस अवसर पर विष्णु मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और पूजा की जाती है। आज दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:07 बजे तक मत्स्य जयंती का मुहूर्त रहेगा, जिसमें भक्त विधिपूर्वक भगवान के इस अवतार का स्मरण करते हैं।
गणगौर पूजा का उत्सव राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में विशेष रूप से मनाया जाता है। 'गण' शिव और 'गौर' पार्वती का प्रतीक है। अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना के लिए व्रत करती हैं। महिलाएं मिट्टी से गौरा जी की प्रतिमा बनाकर उसे श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक गीतों के साथ पूजन करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन पूजा और व्रत करने से न केवल व्यक्तिगत सौभाग्य बढ़ता है, बल्कि परिवार में सामंजस्य और कल्याण भी आता है। आज का दिन धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अत्यंत शुभ है।
संपूर्ण पंचांग विवरण के अनुसार, आज की पूजा और अनुष्ठानों में सावधानी और नियम पालन के साथ भाग लेने से आध्यात्मिक लाभ अधिक होगा। भक्त सुबह से ही नक्षत्र, योग और तिथि की जानकारी के अनुसार अनुष्ठान आरंभ कर सकते हैं।
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