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आज का पंचांग 25 जुलाई 2026: देवशयनी एकादशी पर चातुर्मास का आरंभ, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
राशिफल
आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि पर बन रहा ब्रह्म योग, श्री हरि विष्णु के पूजन का विशेष महत्व
आज ही के दिन भगवान श्री हरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और क्षीर सागर में विश्राम करते हैं। इसी के साथ चार महीने के चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है। चातुर्मास के दौरान मुंडन, गृह प्रवेश, विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है और भक्ति, जप, तप तथा साधना का दौर आरंभ होता है।
विक्रम संवत और तिथि की स्थिति
हिंदू काल-गणना के अनुसार वर्तमान में विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी) और शक संवत 1948 (पराभव) चल रहा है। सूर्य वर्तमान में दक्षिणायन, उत्तर गोल और वर्षा ऋतु के प्रभाव में हैं।
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मास (महीना): आषाढ़ मास (शुक्ल पक्ष)
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तिथि: एकादशी तिथि दोपहर 11 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा।
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वार: शनिवार
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र गणना
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सूर्योदय: सुबह 05:58 बजे
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सूर्यास्त: शाम 07:08 बजे
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चंद्रोदय: दोपहर 04:05 बजे
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चन्द्रास्त: 26 जुलाई सुबह 02:42 बजे
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चंद्र राशि: चंद्रमा आज पूरे दिन और रात वृश्चिक राशि में संचार करेंगे।
नक्षत्र, योग और करण
आज शनिवार को ज्येष्ठा नक्षत्र पूरे दिन और रात व्याप्त रहेगा, जो अगले दिन 26 जुलाई की सुबह 7 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगा। इसके बाद मूल नक्षत्र की शुरुआत होगी।
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योग: रात 9 बजकर 9 मिनट तक ब्रह्म योग रहेगा, जो विद्या प्राप्त करने और धार्मिक कार्यों के संकल्प के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इसके पश्चात इंद्र योग आरंभ होगा।
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करण: सुबह 11 बजकर 34 मिनट तक विष्टि (भद्रा) करण रहेगा। इसके बाद बव करण का आरंभ होगा, जो देर रात तक रहेगा।
आज का शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
शास्त्रों में किसी भी शुभ व नए कार्य की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है:
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:19 बजे से 01:11 बजे तक (यह दिन का सबसे श्रेष्ठ और फलदायी समय है)।
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:45 बजे से 05:29 बजे तक।
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:56 बजे से 03:48 बजे तक।
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:17 बजे से 07:39 बजे तक।
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अमृत काल: रात्रि 09:40 बजे से 11:28 बजे तक।
आज का अशुभ काल और राहुकाल (Inauspicious Timings)
राहुकाल के दौरान किसी भी नए व्यापारिक सौदे, लंबी यात्रा या शुभ कार्य का शुभारंभ नहीं करना चाहिए:
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राहुकाल: सुबह 09:03 बजे से सुबह 10:45 बजे तक (दिल्ली समयानुसार)।
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यमगण्ड: दोपहर 02:23 बजे से शाम 04:01 बजे तक।
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गुलिक काल: सुबह 06:13 बजे से 07:51 बजे तक।
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दुर्मुहूर्त: सुबह 06:13 बजे से 07:05 बजे तक।
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भद्रा काल: सुबह 06:13 बजे से 11:34 बजे तक।
दिशा शूल और विशेष धार्मिक महत्व
आज शनिवार होने के कारण पूर्व दिशा में दिशा शूल रहेगा। यदि आज के दिन पूर्व दिशा की ओर यात्रा करना अत्यंत आवश्यक हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा अदरक या तिल खाकर प्रस्थान करें।
देवशयनी एकादशी का महत्व: एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के पीतांबरधारी स्वरूप की पूजा की जाती है। आज विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना, तुलसी में जल अर्पित करना और पीपल वृक्ष पर दीपक जलाना अत्यंत फलदायी रहता है। चूंकि आज शनिवार भी है, इसलिए श्री हरि विष्णु के साथ-साथ शनिदेव का पूजन करने से साधक को विशेष मानसिक और आर्थिक संबल प्राप्त होता है।
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आज का पंचांग 25 जुलाई 2026: देवशयनी एकादशी पर चातुर्मास का आरंभ, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
राशिफल
आज ही के दिन भगवान श्री हरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और क्षीर सागर में विश्राम करते हैं। इसी के साथ चार महीने के चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है। चातुर्मास के दौरान मुंडन, गृह प्रवेश, विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है और भक्ति, जप, तप तथा साधना का दौर आरंभ होता है।
विक्रम संवत और तिथि की स्थिति
हिंदू काल-गणना के अनुसार वर्तमान में विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी) और शक संवत 1948 (पराभव) चल रहा है। सूर्य वर्तमान में दक्षिणायन, उत्तर गोल और वर्षा ऋतु के प्रभाव में हैं।
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मास (महीना): आषाढ़ मास (शुक्ल पक्ष)
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तिथि: एकादशी तिथि दोपहर 11 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा।
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वार: शनिवार
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र गणना
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सूर्योदय: सुबह 05:58 बजे
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सूर्यास्त: शाम 07:08 बजे
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चंद्रोदय: दोपहर 04:05 बजे
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चन्द्रास्त: 26 जुलाई सुबह 02:42 बजे
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चंद्र राशि: चंद्रमा आज पूरे दिन और रात वृश्चिक राशि में संचार करेंगे।
नक्षत्र, योग और करण
आज शनिवार को ज्येष्ठा नक्षत्र पूरे दिन और रात व्याप्त रहेगा, जो अगले दिन 26 जुलाई की सुबह 7 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगा। इसके बाद मूल नक्षत्र की शुरुआत होगी।
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योग: रात 9 बजकर 9 मिनट तक ब्रह्म योग रहेगा, जो विद्या प्राप्त करने और धार्मिक कार्यों के संकल्प के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इसके पश्चात इंद्र योग आरंभ होगा।
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करण: सुबह 11 बजकर 34 मिनट तक विष्टि (भद्रा) करण रहेगा। इसके बाद बव करण का आरंभ होगा, जो देर रात तक रहेगा।
आज का शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
शास्त्रों में किसी भी शुभ व नए कार्य की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है:
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:19 बजे से 01:11 बजे तक (यह दिन का सबसे श्रेष्ठ और फलदायी समय है)।
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:45 बजे से 05:29 बजे तक।
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:56 बजे से 03:48 बजे तक।
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:17 बजे से 07:39 बजे तक।
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अमृत काल: रात्रि 09:40 बजे से 11:28 बजे तक।
आज का अशुभ काल और राहुकाल (Inauspicious Timings)
राहुकाल के दौरान किसी भी नए व्यापारिक सौदे, लंबी यात्रा या शुभ कार्य का शुभारंभ नहीं करना चाहिए:
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राहुकाल: सुबह 09:03 बजे से सुबह 10:45 बजे तक (दिल्ली समयानुसार)।
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यमगण्ड: दोपहर 02:23 बजे से शाम 04:01 बजे तक।
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गुलिक काल: सुबह 06:13 बजे से 07:51 बजे तक।
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दुर्मुहूर्त: सुबह 06:13 बजे से 07:05 बजे तक।
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भद्रा काल: सुबह 06:13 बजे से 11:34 बजे तक।
दिशा शूल और विशेष धार्मिक महत्व
आज शनिवार होने के कारण पूर्व दिशा में दिशा शूल रहेगा। यदि आज के दिन पूर्व दिशा की ओर यात्रा करना अत्यंत आवश्यक हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा अदरक या तिल खाकर प्रस्थान करें।
देवशयनी एकादशी का महत्व: एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के पीतांबरधारी स्वरूप की पूजा की जाती है। आज विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना, तुलसी में जल अर्पित करना और पीपल वृक्ष पर दीपक जलाना अत्यंत फलदायी रहता है। चूंकि आज शनिवार भी है, इसलिए श्री हरि विष्णु के साथ-साथ शनिदेव का पूजन करने से साधक को विशेष मानसिक और आर्थिक संबल प्राप्त होता है।
