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आज का पंचांग : चैत्र नवरात्रि 5वां दिन, जानें पूजा और शुभ मुहूर्त
धर्म डेस्क
लक्ष्मी पंचमी के पावन दिन मां स्कंदमाता की पूजा और अभिजीत मुहूर्त में किए जाने वाले शुभ कार्यों से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
23 मार्च 2026 को चैत्र मास की शुक्ल पंचमी तिथि पर पूरे देश में लक्ष्मी पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित है और नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा विशेष महत्व रखती है। इस वर्ष अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा, जो पूजा, निवेश या किसी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है।
तिथि: शुक्ल पंचमी – शाम 06:38 तक, तत्पश्चात षष्ठी
योग: विष्कुंभ – दोपहर 12:22 तक
करण: बव (07:56 AM तक), बालव (06:38 PM तक), कौवलव (24 मार्च 05:21 AM तक)
सूर्योदय: 06:22 AM, सूर्यास्त: 06:34 PM
चंद्र उदय: 09:00 AM, चंद्रास्त: 11:25 PM
नक्षत्र: कृत्तिका (सायं 08:49 तक)
दिन का महत्व और पौराणिक दृष्टिकोण
चैत्र शुक्ल पंचमी को लक्ष्मी पंचमी कहा जाता है। यह हिंदू नव वर्ष के पहले सप्ताह में आता है और कल्पादि तिथि के रूप में नया आरंभ करने का संकेत देता है। इस दिन घर और कार्यस्थल पर पूजा-अर्चना करने से पूरे वर्ष संपत्ति, सुख और सफलता बनी रहती है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा से इच्छाओं की पूर्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
पूजा और शुभ कार्य
अभिजीत मुहूर्त में पूजा, निवेश या शुभ कार्य करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस दिन तेज बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग कर बड़े कार्य किए जा सकते हैं। यदि गुस्सा या तनाव महसूस हो, तो इसे सुधार और आत्म-निरीक्षण का संकेत मानकर नियंत्रण में रखना चाहिए। घर और व्यवसाय के स्थानों को साफ और व्यवस्थित रखना विशेष महत्व रखता है।
लक्ष्मी पंचमी और नवरात्रि के पांचवें दिन का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टि से है, बल्कि व्यवसाय, परिवार और सामाजिक जीवन में सफलता और संतुलन लाने में भी सहायक है। देशभर में लोग इस अवसर पर पूजा-अर्चना, जागरण और धार्मिक अनुष्ठान कर पूरे वर्ष समृद्धि सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।
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आज का पंचांग : चैत्र नवरात्रि 5वां दिन, जानें पूजा और शुभ मुहूर्त
धर्म डेस्क
23 मार्च 2026 को चैत्र मास की शुक्ल पंचमी तिथि पर पूरे देश में लक्ष्मी पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित है और नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा विशेष महत्व रखती है। इस वर्ष अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा, जो पूजा, निवेश या किसी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है।
तिथि: शुक्ल पंचमी – शाम 06:38 तक, तत्पश्चात षष्ठी
योग: विष्कुंभ – दोपहर 12:22 तक
करण: बव (07:56 AM तक), बालव (06:38 PM तक), कौवलव (24 मार्च 05:21 AM तक)
सूर्योदय: 06:22 AM, सूर्यास्त: 06:34 PM
चंद्र उदय: 09:00 AM, चंद्रास्त: 11:25 PM
नक्षत्र: कृत्तिका (सायं 08:49 तक)
दिन का महत्व और पौराणिक दृष्टिकोण
चैत्र शुक्ल पंचमी को लक्ष्मी पंचमी कहा जाता है। यह हिंदू नव वर्ष के पहले सप्ताह में आता है और कल्पादि तिथि के रूप में नया आरंभ करने का संकेत देता है। इस दिन घर और कार्यस्थल पर पूजा-अर्चना करने से पूरे वर्ष संपत्ति, सुख और सफलता बनी रहती है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा से इच्छाओं की पूर्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
पूजा और शुभ कार्य
अभिजीत मुहूर्त में पूजा, निवेश या शुभ कार्य करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस दिन तेज बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग कर बड़े कार्य किए जा सकते हैं। यदि गुस्सा या तनाव महसूस हो, तो इसे सुधार और आत्म-निरीक्षण का संकेत मानकर नियंत्रण में रखना चाहिए। घर और व्यवसाय के स्थानों को साफ और व्यवस्थित रखना विशेष महत्व रखता है।
लक्ष्मी पंचमी और नवरात्रि के पांचवें दिन का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टि से है, बल्कि व्यवसाय, परिवार और सामाजिक जीवन में सफलता और संतुलन लाने में भी सहायक है। देशभर में लोग इस अवसर पर पूजा-अर्चना, जागरण और धार्मिक अनुष्ठान कर पूरे वर्ष समृद्धि सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।
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