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युद्ध के बीच ईरान की तेल से रिकॉर्ड कमाई, खाड़ी देश संकट में
अंतराष्ट्रीय न्यूज
खार्ग टर्मिनल से निर्यात जारी रखकर ईरान ने बनाई बढ़त; अन्य खाड़ी देशों की तेल-गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने तेल और गैस कारोबार से उल्लेखनीय आर्थिक बढ़त हासिल की है। अमेरिका और इजराइल के साथ तनावपूर्ण हालात के बावजूद ईरान का प्रमुख खार्ग टर्मिनल सक्रिय बना हुआ है, जहां से देश अपने लगभग 90% तेल का निर्यात कर रहा है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, खार्ग आइलैंड स्थित इस टर्मिनल को सीधे निशाना नहीं बनाए जाने से ईरान को संचालन जारी रखने का मौका मिला। सैन्य ठिकानों पर हमलों के बावजूद ऊर्जा ढांचे को बचाए जाने से निर्यात प्रभावित नहीं हुआ।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और S&P ग्लोबल के आंकड़े बताते हैं कि ईरान रोजाना 17 से 20 लाख बैरल तेल निर्यात कर रहा है। इसके साथ ही, बिना पहचान वाले टैंकरों के जरिए सप्लाई जारी रखने की रणनीति भी अपनाई गई है।
आर्थिक बढ़त कैसे मिली
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपने प्रभाव का भी फायदा उठाया है। यहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे आय में और इजाफा हुआ है।हालांकि साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमलों से कुछ असर पड़ा, लेकिन गैस सप्लाई पूरी तरह बाधित नहीं हुई।
खाड़ी देशों पर दबाव
इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर अन्य खाड़ी देशों पर पड़ा है। सऊदी अरब, कतर, इराक, कुवैत और यूएई जैसे प्रमुख उत्पादकों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।
सुरक्षा जोखिम और समुद्री मार्गों में बाधा के चलते इन देशों का उत्पादन लगभग 70% तक गिर गया है। कई स्थानों पर स्टोरेज भर जाने से उत्पादन रोकना पड़ा, जबकि निर्यात के विकल्प सीमित हो गए हैं।
तेल बाजार में उछाल
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो लंबे समय बाद उच्च स्तर है।ऊंची कीमतों का असर आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है, खासकर भारत जैसे देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित करने के लिए अमेरिका ने ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। इस कदम से बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आने की संभावना है, जिससे कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।
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युद्ध के बीच ईरान की तेल से रिकॉर्ड कमाई, खाड़ी देश संकट में
अंतराष्ट्रीय न्यूज
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने तेल और गैस कारोबार से उल्लेखनीय आर्थिक बढ़त हासिल की है। अमेरिका और इजराइल के साथ तनावपूर्ण हालात के बावजूद ईरान का प्रमुख खार्ग टर्मिनल सक्रिय बना हुआ है, जहां से देश अपने लगभग 90% तेल का निर्यात कर रहा है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, खार्ग आइलैंड स्थित इस टर्मिनल को सीधे निशाना नहीं बनाए जाने से ईरान को संचालन जारी रखने का मौका मिला। सैन्य ठिकानों पर हमलों के बावजूद ऊर्जा ढांचे को बचाए जाने से निर्यात प्रभावित नहीं हुआ।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और S&P ग्लोबल के आंकड़े बताते हैं कि ईरान रोजाना 17 से 20 लाख बैरल तेल निर्यात कर रहा है। इसके साथ ही, बिना पहचान वाले टैंकरों के जरिए सप्लाई जारी रखने की रणनीति भी अपनाई गई है।
आर्थिक बढ़त कैसे मिली
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपने प्रभाव का भी फायदा उठाया है। यहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे आय में और इजाफा हुआ है।हालांकि साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमलों से कुछ असर पड़ा, लेकिन गैस सप्लाई पूरी तरह बाधित नहीं हुई।
खाड़ी देशों पर दबाव
इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर अन्य खाड़ी देशों पर पड़ा है। सऊदी अरब, कतर, इराक, कुवैत और यूएई जैसे प्रमुख उत्पादकों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।
सुरक्षा जोखिम और समुद्री मार्गों में बाधा के चलते इन देशों का उत्पादन लगभग 70% तक गिर गया है। कई स्थानों पर स्टोरेज भर जाने से उत्पादन रोकना पड़ा, जबकि निर्यात के विकल्प सीमित हो गए हैं।
तेल बाजार में उछाल
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो लंबे समय बाद उच्च स्तर है।ऊंची कीमतों का असर आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है, खासकर भारत जैसे देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित करने के लिए अमेरिका ने ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। इस कदम से बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आने की संभावना है, जिससे कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।
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