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Vasant Panchami 2026: 23 जनवरी को होगी वसंत पंचमी, सरस्वती पूजा के लिए मिलेगा 5 घंटे 20 मिनट का शुभ मुहूर्त
धर्म डेस्क
माघ शुक्ल पंचमी पर बनेगा परिघ और रवि योग, ज्ञान-कला की देवी सरस्वती की पूजा से जुड़े मुहूर्त, तिथि और धार्मिक महत्व स्पष्ट
वर्ष 2026 में वसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी मनाने की परंपरा है। इस दिन विद्या, कला और वाणी की देवी मां सरस्वती की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस बार सरस्वती पूजा के लिए 5 घंटे 20 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दृक पंचांग के मुताबिक, पंचमी तिथि की शुरुआत 23 जनवरी को तड़के 2 बजकर 28 मिनट पर होगी और इसका समापन 24 जनवरी को रात 1 बजकर 46 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर वसंत पंचमी 23 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसी दिन देशभर में शिक्षण संस्थानों, मंदिरों और घरों में सरस्वती पूजा संपन्न होगी।
पंचांग के अनुसार, 23 जनवरी को सरस्वती पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस दौरान देवी सरस्वती की पूजा, पुस्तक पूजन और विद्यारंभ जैसे कार्य करना शुभ माना गया है। इसके अलावा, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक बताया गया है।
इस वर्ष वसंत पंचमी पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं। पूजा के समय परिघ योग रहेगा, जो प्रातःकाल से दोपहर 3 बजकर 59 मिनट तक मान्य होगा। इसके बाद शिव योग का आरंभ होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, परिघ योग को कार्यसिद्धि और सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है। इसके साथ ही वसंत पंचमी के दिन रवि योग का भी संयोग बन रहा है, जो दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रहेगा।
नक्षत्र की बात करें तो इस दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा। हालांकि, दोपहर 11 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक राहुकाल रहेगा, इस दौरान पूजा से बचने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी से ऋतुराज वसंत का आगमन होता है। प्रकृति में हरियाली और पीले रंग की छटा दिखाई देने लगती है। इसी कारण इस दिन पीले वस्त्र पहनने और पीले पुष्प अर्पित करने की परंपरा है। किसान इस दिन नई फसल की बालियां देवी-देवताओं को अर्पित करते हैं।
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा करने से ज्ञान, एकाग्रता और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
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