- Hindi News
- धर्म
- नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व, रवि योग में साधना से बढ़ेगा आत्मबल
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व, रवि योग में साधना से बढ़ेगा आत्मबल
धर्म डेस्क
भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए श्रद्धालु कर रहे पूजा-अर्चना; जानें सही विधि, मंत्र और शुभ समय
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन शनिवार को मां चंद्रघंटा की पूजा पूरे देश में श्रद्धा और विधि-विधान के साथ की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन साहस, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए विशेष माना जाता है। इस बार तीसरे नवरात्रि पर रवि योग का शुभ संयोग बनने से पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार रवि योग देर रात 12:37 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 6:23 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। मंदिरों और घरों में श्रद्धालु मां चंद्रघंटा की प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार का होता है, जिससे उनका नाम पड़ा। सिंह पर विराजमान मां का यह रूप साहस, निर्भीकता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से भय, चिंता और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
पूजा विधि के तहत श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके बाद कलश स्थापना कर चंदन, रोली, हल्दी और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मां को दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाया जाता है और अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।
मंत्र जाप को भी इस दिन विशेष महत्व दिया गया है। “ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” और “ऊं चंद्रघंटायै नमः” मंत्रों का 108 बार जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। कई स्थानों पर श्रद्धालु पूरे दिन जप और भजन में लीन रहे।
धर्माचार्यों के अनुसार, पूजा के साथ आचरण की शुद्धता भी आवश्यक है। श्रद्धालुओं को दिनभर क्रोध, नकारात्मक सोच और विवाद से दूर रहने की सलाह दी जाती है। साथ ही कन्याओं को प्रसाद वितरित करना और पूजा के समय शंख या घंटी बजाना शुभ माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नवरात्रि का यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन का भी अवसर है। मां चंद्रघंटा की उपासना से आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन की बाधाओं को पार करने की शक्ति मिलती है।
फिलहाल देशभर में नवरात्रि के तीसरे दिन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में भी नवरात्रि के विभिन्न स्वरूपों के साथ यह धार्मिक उत्सव पूरे श्रद्धा भाव से जारी रहेगा।
----------------------
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व, रवि योग में साधना से बढ़ेगा आत्मबल
धर्म डेस्क
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन शनिवार को मां चंद्रघंटा की पूजा पूरे देश में श्रद्धा और विधि-विधान के साथ की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन साहस, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए विशेष माना जाता है। इस बार तीसरे नवरात्रि पर रवि योग का शुभ संयोग बनने से पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार रवि योग देर रात 12:37 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 6:23 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। मंदिरों और घरों में श्रद्धालु मां चंद्रघंटा की प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार का होता है, जिससे उनका नाम पड़ा। सिंह पर विराजमान मां का यह रूप साहस, निर्भीकता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से भय, चिंता और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
पूजा विधि के तहत श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके बाद कलश स्थापना कर चंदन, रोली, हल्दी और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मां को दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाया जाता है और अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।
मंत्र जाप को भी इस दिन विशेष महत्व दिया गया है। “ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” और “ऊं चंद्रघंटायै नमः” मंत्रों का 108 बार जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। कई स्थानों पर श्रद्धालु पूरे दिन जप और भजन में लीन रहे।
धर्माचार्यों के अनुसार, पूजा के साथ आचरण की शुद्धता भी आवश्यक है। श्रद्धालुओं को दिनभर क्रोध, नकारात्मक सोच और विवाद से दूर रहने की सलाह दी जाती है। साथ ही कन्याओं को प्रसाद वितरित करना और पूजा के समय शंख या घंटी बजाना शुभ माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नवरात्रि का यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन का भी अवसर है। मां चंद्रघंटा की उपासना से आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन की बाधाओं को पार करने की शक्ति मिलती है।
फिलहाल देशभर में नवरात्रि के तीसरे दिन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में भी नवरात्रि के विभिन्न स्वरूपों के साथ यह धार्मिक उत्सव पूरे श्रद्धा भाव से जारी रहेगा।
----------------------
