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11 साल की बोधन बनीं ब्रिटिश चेस चैंपियन, श्रीयस रॉयल ने भी जीता खिताब
स्पोर्ट्स डेस्क
बोधन ने रैपिड टाईब्रेकर में त्रिशा को हराया, 17 वर्षीय श्रीयस 7.5 अंकों के साथ ओपन चैंपियन बने
भारतीय मूल की 11 साल की बोधन सिवानंदन ने ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया है। उन्होंने महिला वर्ग का खिताब अपने नाम कर लिया और ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला चैंपियन बनने का रिकॉर्ड बनाया। कोवेंट्री स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में 1 से 9 अगस्त तक हुई चैंपियनशिप में बोधन और आयरलैंड की त्रिशा कन्यामराला के बीच खिताब का फैसला रैपिड टाईब्रेकर से हुआ। क्लासिकल मुकाबलों के बाद दोनों के अंक बराबर थे, जिसके बाद बोधन ने प्लेऑफ में बेहतर प्रदर्शन करते हुए ट्रॉफी अपने नाम की। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि बोधन ने टूर्नामेंट के ओपन फॉर्मेट में कई मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबले खेले और महिला खिताब के लिए सबसे आगे रहीं।
आधिकारिक टूर्नामेंट रिकॉर्ड के मुताबिक 2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप 1 से 9 अगस्त तक यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में आयोजित हुई थी। बोधन की उम्र भले ही 11 साल है, लेकिन पिछले कुछ समय से वह ब्रिटेन के चेस सर्किट में लगातार बड़े नतीजे दे रही हैं। इस साल की शुरुआत में वह इंग्लैंड की टॉप महिला रैंकिंग तक पहुंची थीं। इससे पहले भी उन्होंने कम उम्र में कई रिकॉर्ड बनाए हैं। जुलाई में वह 2600 से ज्यादा रेटिंग वाले ग्रैंडमास्टर को हराने वाली सबसे कम उम्र की लड़की बनी थीं। ब्रिटिश चैंपियनशिप में भी उन्होंने अपनी क्षमता दिखाई और एक मुकाबले में ग्रैंडमास्टर अमीत घासी को हराकर काफी चर्चा बटोरी। टूर्नामेंट के दौरान बोधन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वह सिर्फ महिला वर्ग की प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि ओपन चैंपियनशिप के खिलाड़ियों के बीच भी मुकाबला करती रहीं। उनका प्रदर्शन रेटिंग के हिसाब से भी मजबूत रहा। बोधन की चेस यात्रा कोविड लॉकडाउन के समय शुरू हुई थी।
उस दौरान परिवार के एक परिचित के जरिए उन्हें चेस बोर्ड मिला और खेल में उनकी दिलचस्पी बढ़ती चली गई। नॉर्थ-वेस्ट लंदन में रहने वाली बोधन ने इसके बाद प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और कुछ ही वर्षों में जूनियर स्तर से आगे निकलकर सीनियर खिलाड़ियों को भी चुनौती देने लगीं। पिछले साल उन्होंने यूके ओपन महिला ब्लिट्ज चैंपियनशिप जीती थी और महिला रैपिड में भी खिताब साझा किया था। अब ब्रिटिश महिला क्लासिकल खिताब उनके रिकॉर्ड में एक और बड़ी उपलब्धि के तौर पर जुड़ गया है।
बोधन की उपलब्धि के साथ इसी चैंपियनशिप में 17 वर्षीय श्रीयस रॉयल ने भी भारतीय मूल के खिलाड़ियों का नाम रोशन किया। श्रीयस ने ओपन ब्रिटिश चैंपियनशिप का खिताब जीता और नौ राउंड के बाद 7.5 अंक के साथ सबसे ऊपर रहे। खास बात यह रही कि वह पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहे। इस जीत के साथ श्रीयस ब्रिटिश चैंपियनशिप जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने 1989 में माइकल एडम्स के नाम दर्ज उम्र के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक श्रीयस ने 9 में से 7.5 अंक हासिल किए और खिताब के साथ 10 हजार पाउंड की पुरस्कार राशि भी जीती। श्रीयस का जन्म बेंगलुरु में हुआ था और जब वह तीन साल के थे, तब अपने माता-पिता जितेंद्र और अंजू सिंह के साथ ब्रिटेन चले गए थे।
चेस में उनका सफर बहुत तेजी से आगे बढ़ा। महज 15 साल की उम्र में वह इंग्लैंड के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने थे। इस बार ब्रिटिश चैंपियनशिप में उन्होंने शुरुआत से ही खिताब की दौड़ में अपनी जगह बनाए रखी। सातवें राउंड में उन्होंने टॉप सीड ल्यूक मैकशेन को हराकर बढ़त बनाई और आखिरी दौर में 2022 के चैंपियन हैरी ग्रीव को भी मात दी। इसके साथ उनका स्कोर 7.5 अंक तक पहुंच गया। दिलचस्प बात यह भी है कि बोधन को टूर्नामेंट में मिली एकमात्र हार श्रीयस के खिलाफ ही हुई थी। यानी एक ही चैंपियनशिप में दोनों भारतीय मूल के युवा खिलाड़ियों ने अलग-अलग वर्गों में खिताब अपने नाम किया, जबकि आपस में हुए मुकाबले में श्रीयस का पलड़ा भारी रहा। इस साल की ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में युवाओं का प्रदर्शन पहले से ही चर्चा में था।
टूर्नामेंट में 108 खिलाड़ी शामिल थे और कुल पुरस्कार राशि 34 हजार पाउंड रखी गई थी। शुरुआती राउंड के बाद ही कई युवा खिलाड़ी शीर्ष स्थानों की दौड़ में दिखाई देने लगे थे। 2026 की चैंपियनशिप ब्रिटिश चेस के 122 साल पुराने आयोजन की कड़ी का हिस्सा रही। इस बार ओपन, महिला, सीनियर और जूनियर सहित कई प्रतियोगिताएं एक ही आयोजन के तहत हुईं। बोधन और श्रीयस के खिताब के बाद अब ब्रिटेन के चेस सर्किट में दोनों की अगली प्रतियोगिताओं पर नजर है। खास तौर पर बोधन के लिए यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने अभी 12 साल की उम्र भी पूरी नहीं की है और पहले ही ब्रिटिश महिला चैंपियनशिप अपने नाम कर चुकी हैं।
11 साल की बोधन बनीं ब्रिटिश चेस चैंपियन, श्रीयस रॉयल ने भी जीता खिताब
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय मूल की 11 साल की बोधन सिवानंदन ने ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया है। उन्होंने महिला वर्ग का खिताब अपने नाम कर लिया और ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला चैंपियन बनने का रिकॉर्ड बनाया। कोवेंट्री स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में 1 से 9 अगस्त तक हुई चैंपियनशिप में बोधन और आयरलैंड की त्रिशा कन्यामराला के बीच खिताब का फैसला रैपिड टाईब्रेकर से हुआ। क्लासिकल मुकाबलों के बाद दोनों के अंक बराबर थे, जिसके बाद बोधन ने प्लेऑफ में बेहतर प्रदर्शन करते हुए ट्रॉफी अपने नाम की। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि बोधन ने टूर्नामेंट के ओपन फॉर्मेट में कई मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबले खेले और महिला खिताब के लिए सबसे आगे रहीं।
आधिकारिक टूर्नामेंट रिकॉर्ड के मुताबिक 2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप 1 से 9 अगस्त तक यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में आयोजित हुई थी। बोधन की उम्र भले ही 11 साल है, लेकिन पिछले कुछ समय से वह ब्रिटेन के चेस सर्किट में लगातार बड़े नतीजे दे रही हैं। इस साल की शुरुआत में वह इंग्लैंड की टॉप महिला रैंकिंग तक पहुंची थीं। इससे पहले भी उन्होंने कम उम्र में कई रिकॉर्ड बनाए हैं। जुलाई में वह 2600 से ज्यादा रेटिंग वाले ग्रैंडमास्टर को हराने वाली सबसे कम उम्र की लड़की बनी थीं। ब्रिटिश चैंपियनशिप में भी उन्होंने अपनी क्षमता दिखाई और एक मुकाबले में ग्रैंडमास्टर अमीत घासी को हराकर काफी चर्चा बटोरी। टूर्नामेंट के दौरान बोधन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वह सिर्फ महिला वर्ग की प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि ओपन चैंपियनशिप के खिलाड़ियों के बीच भी मुकाबला करती रहीं। उनका प्रदर्शन रेटिंग के हिसाब से भी मजबूत रहा। बोधन की चेस यात्रा कोविड लॉकडाउन के समय शुरू हुई थी।
उस दौरान परिवार के एक परिचित के जरिए उन्हें चेस बोर्ड मिला और खेल में उनकी दिलचस्पी बढ़ती चली गई। नॉर्थ-वेस्ट लंदन में रहने वाली बोधन ने इसके बाद प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और कुछ ही वर्षों में जूनियर स्तर से आगे निकलकर सीनियर खिलाड़ियों को भी चुनौती देने लगीं। पिछले साल उन्होंने यूके ओपन महिला ब्लिट्ज चैंपियनशिप जीती थी और महिला रैपिड में भी खिताब साझा किया था। अब ब्रिटिश महिला क्लासिकल खिताब उनके रिकॉर्ड में एक और बड़ी उपलब्धि के तौर पर जुड़ गया है।
बोधन की उपलब्धि के साथ इसी चैंपियनशिप में 17 वर्षीय श्रीयस रॉयल ने भी भारतीय मूल के खिलाड़ियों का नाम रोशन किया। श्रीयस ने ओपन ब्रिटिश चैंपियनशिप का खिताब जीता और नौ राउंड के बाद 7.5 अंक के साथ सबसे ऊपर रहे। खास बात यह रही कि वह पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहे। इस जीत के साथ श्रीयस ब्रिटिश चैंपियनशिप जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने 1989 में माइकल एडम्स के नाम दर्ज उम्र के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक श्रीयस ने 9 में से 7.5 अंक हासिल किए और खिताब के साथ 10 हजार पाउंड की पुरस्कार राशि भी जीती। श्रीयस का जन्म बेंगलुरु में हुआ था और जब वह तीन साल के थे, तब अपने माता-पिता जितेंद्र और अंजू सिंह के साथ ब्रिटेन चले गए थे।
चेस में उनका सफर बहुत तेजी से आगे बढ़ा। महज 15 साल की उम्र में वह इंग्लैंड के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने थे। इस बार ब्रिटिश चैंपियनशिप में उन्होंने शुरुआत से ही खिताब की दौड़ में अपनी जगह बनाए रखी। सातवें राउंड में उन्होंने टॉप सीड ल्यूक मैकशेन को हराकर बढ़त बनाई और आखिरी दौर में 2022 के चैंपियन हैरी ग्रीव को भी मात दी। इसके साथ उनका स्कोर 7.5 अंक तक पहुंच गया। दिलचस्प बात यह भी है कि बोधन को टूर्नामेंट में मिली एकमात्र हार श्रीयस के खिलाफ ही हुई थी। यानी एक ही चैंपियनशिप में दोनों भारतीय मूल के युवा खिलाड़ियों ने अलग-अलग वर्गों में खिताब अपने नाम किया, जबकि आपस में हुए मुकाबले में श्रीयस का पलड़ा भारी रहा। इस साल की ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में युवाओं का प्रदर्शन पहले से ही चर्चा में था।
टूर्नामेंट में 108 खिलाड़ी शामिल थे और कुल पुरस्कार राशि 34 हजार पाउंड रखी गई थी। शुरुआती राउंड के बाद ही कई युवा खिलाड़ी शीर्ष स्थानों की दौड़ में दिखाई देने लगे थे। 2026 की चैंपियनशिप ब्रिटिश चेस के 122 साल पुराने आयोजन की कड़ी का हिस्सा रही। इस बार ओपन, महिला, सीनियर और जूनियर सहित कई प्रतियोगिताएं एक ही आयोजन के तहत हुईं। बोधन और श्रीयस के खिताब के बाद अब ब्रिटेन के चेस सर्किट में दोनों की अगली प्रतियोगिताओं पर नजर है। खास तौर पर बोधन के लिए यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने अभी 12 साल की उम्र भी पूरी नहीं की है और पहले ही ब्रिटिश महिला चैंपियनशिप अपने नाम कर चुकी हैं।
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