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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: मीराबाई के आंसू, नीरज का सिल्वर और भारत के 10 यादगार पल जिन्होंने रचा इतिहास
स्पोर्ट्स डेस्क
39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत, कई खिलाड़ियों ने बनाए नए रिकॉर्ड, संघर्ष, जज्बे और ऐतिहासिक प्रदर्शन ने जीता दुनिया का दिल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय खेल इतिहास के लिए कई मायनों में यादगार बन गए। ग्लासगो में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारत ने कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। खिलाड़ियों ने न केवल शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि कई ऐसे भावुक और प्रेरणादायक पल भी दिए, जिन्हें खेल प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे।
कहीं राष्ट्रगान सुनकर मीराबाई चानू की आंखें नम हो गईं, तो कहीं चोट के बावजूद खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी। किसी ने संघर्ष से निकलकर इतिहास बनाया, तो किसी ने पहली बार देश को नया गौरव दिलाया। आइए जानते हैं भारत के 10 ऐसे खास पल, जिन्होंने इस कॉमनवेल्थ गेम्स को ऐतिहासिक बना दिया।
1. मीराबाई चानू के आंसुओं ने जीत लिया देश का दिल
भारतीय वेटलिफ्टिंग स्टार मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। लेकिन सबसे भावुक पल तब आया, जब पदक समारोह के दौरान भारतीय राष्ट्रगान बजा। हमेशा मुस्कुराती नजर आने वाली मीराबाई खुद को रोक नहीं सकीं और उनकी आंखों से आंसू बह निकले। यह दृश्य करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व और भावनाओं से भर देने वाला था।
2. नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह बने सबसे बड़े सरप्राइज
जेवलिन थ्रो में भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीतकर एक और उपलब्धि अपने नाम की। हालांकि इस स्पर्धा में सबसे ज्यादा चर्चा युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह की रही। अंतिम प्रयास में उन्होंने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया और सभी को चौंका दिया।
3. गुलवीर सिंह ने रचा ट्रैक एंड फील्ड का नया इतिहास
लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह भारत के सबसे सफल एथलीटों में शामिल रहे। उन्होंने 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर और 5 हजार मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रच दिया। पहली बार किसी भारतीय धावक ने ट्रैक एंड फील्ड में दो व्यक्तिगत पदक जीतने का कारनामा किया।
4. तेजस्विन शंकर ने दर्द से लड़कर जीता सम्मान
डेकाथलन खिलाड़ी तेजस्विन शंकर पूरे टूर्नामेंट में चोट से जूझते रहे। हाई जंप के दौरान घुटने में चोट लगने के बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता नहीं छोड़ी। उन्होंने दसों स्पर्धाओं में हिस्सा लेकर ब्रॉन्ज मेडल जीता और साबित किया कि जज्बा किसी भी दर्द से बड़ा होता है।
5. अस्मिता डे ने दिलाया जूडो का पहला स्वर्ण
त्रिपुरा की युवा जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को कॉमनवेल्थ इतिहास का पहला जूडो गोल्ड दिलाया। आर्थिक कठिनाइयों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची अस्मिता की कहानी पूरे टूर्नामेंट की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में गिनी गई।
6. लवलीना का पदक मुकाबले से पहले ही तय
महिला 75 किलोग्राम बॉक्सिंग वर्ग में केवल पांच प्रतिभागियों के होने के कारण लवलीना बोरगोहेन सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गईं। इस वजह से उनका पदक पहले ही सुनिश्चित हो गया। उन्होंने एक मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई और अंततः सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह इस प्रतियोगिता की सबसे अनोखी घटनाओं में से एक रही।
7. प्रवीण चित्रावेल ने चार साल पुरानी कसक मिटाई
ट्रिपल जंप खिलाड़ी प्रवीण चित्रावेल वर्ष 2022 में मामूली अंतर से पदक से चूक गए थे। इस बार उन्होंने 16.58 मीटर की शानदार छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीत लिया और चार साल पुरानी निराशा को सफलता में बदल दिया।
8. महिला मुक्केबाजों का स्वर्णिम प्रदर्शन
भारतीय महिला बॉक्सिंग टीम ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया। साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मिन लांबोरिया, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पहली बार एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पांच महिला मुक्केबाज स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं।
9. पैरा एथलेटिक्स में तीन बार डबल पोडियम
भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। तीन अलग-अलग स्पर्धाओं में भारत ने डबल पोडियम हासिल किया। महिला शॉटपुट, पुरुष शॉटपुट और 100 मीटर दौड़ में भारतीय खिलाड़ियों ने एक साथ दो-दो पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
10. झंडू कुमार की संघर्ष से सफलता तक की कहानी
भारत का पहला पदक पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने दिलाया। पोलियो से प्रभावित झंडू कभी सब्जियां बेचते थे और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। खेल जारी रखने के लिए उन्होंने अपना रिक्शा तक बेच दिया। उनका पदक केवल खेल उपलब्धि नहीं बल्कि संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल भी बन गया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 केवल पदकों की संख्या तक सीमित नहीं रहे। इस प्रतियोगिता ने भारत को कई नए सितारे दिए, खिलाड़ियों के संघर्ष को दुनिया के सामने रखा और यह साबित किया कि भारतीय खेल लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहना भारतीय दल की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, जूडो और पैरा स्पोर्ट्स जैसे कई खेलों में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर भविष्य के लिए उम्मीदें और मजबूत कर दी हैं।
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: मीराबाई के आंसू, नीरज का सिल्वर और भारत के 10 यादगार पल जिन्होंने रचा इतिहास
स्पोर्ट्स डेस्क
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय खेल इतिहास के लिए कई मायनों में यादगार बन गए। ग्लासगो में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारत ने कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। खिलाड़ियों ने न केवल शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि कई ऐसे भावुक और प्रेरणादायक पल भी दिए, जिन्हें खेल प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे।
कहीं राष्ट्रगान सुनकर मीराबाई चानू की आंखें नम हो गईं, तो कहीं चोट के बावजूद खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी। किसी ने संघर्ष से निकलकर इतिहास बनाया, तो किसी ने पहली बार देश को नया गौरव दिलाया। आइए जानते हैं भारत के 10 ऐसे खास पल, जिन्होंने इस कॉमनवेल्थ गेम्स को ऐतिहासिक बना दिया।
1. मीराबाई चानू के आंसुओं ने जीत लिया देश का दिल
भारतीय वेटलिफ्टिंग स्टार मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। लेकिन सबसे भावुक पल तब आया, जब पदक समारोह के दौरान भारतीय राष्ट्रगान बजा। हमेशा मुस्कुराती नजर आने वाली मीराबाई खुद को रोक नहीं सकीं और उनकी आंखों से आंसू बह निकले। यह दृश्य करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व और भावनाओं से भर देने वाला था।
2. नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह बने सबसे बड़े सरप्राइज
जेवलिन थ्रो में भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीतकर एक और उपलब्धि अपने नाम की। हालांकि इस स्पर्धा में सबसे ज्यादा चर्चा युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह की रही। अंतिम प्रयास में उन्होंने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया और सभी को चौंका दिया।
3. गुलवीर सिंह ने रचा ट्रैक एंड फील्ड का नया इतिहास
लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह भारत के सबसे सफल एथलीटों में शामिल रहे। उन्होंने 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर और 5 हजार मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रच दिया। पहली बार किसी भारतीय धावक ने ट्रैक एंड फील्ड में दो व्यक्तिगत पदक जीतने का कारनामा किया।
4. तेजस्विन शंकर ने दर्द से लड़कर जीता सम्मान
डेकाथलन खिलाड़ी तेजस्विन शंकर पूरे टूर्नामेंट में चोट से जूझते रहे। हाई जंप के दौरान घुटने में चोट लगने के बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता नहीं छोड़ी। उन्होंने दसों स्पर्धाओं में हिस्सा लेकर ब्रॉन्ज मेडल जीता और साबित किया कि जज्बा किसी भी दर्द से बड़ा होता है।
5. अस्मिता डे ने दिलाया जूडो का पहला स्वर्ण
त्रिपुरा की युवा जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को कॉमनवेल्थ इतिहास का पहला जूडो गोल्ड दिलाया। आर्थिक कठिनाइयों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची अस्मिता की कहानी पूरे टूर्नामेंट की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में गिनी गई।
6. लवलीना का पदक मुकाबले से पहले ही तय
महिला 75 किलोग्राम बॉक्सिंग वर्ग में केवल पांच प्रतिभागियों के होने के कारण लवलीना बोरगोहेन सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गईं। इस वजह से उनका पदक पहले ही सुनिश्चित हो गया। उन्होंने एक मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई और अंततः सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह इस प्रतियोगिता की सबसे अनोखी घटनाओं में से एक रही।
7. प्रवीण चित्रावेल ने चार साल पुरानी कसक मिटाई
ट्रिपल जंप खिलाड़ी प्रवीण चित्रावेल वर्ष 2022 में मामूली अंतर से पदक से चूक गए थे। इस बार उन्होंने 16.58 मीटर की शानदार छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीत लिया और चार साल पुरानी निराशा को सफलता में बदल दिया।
8. महिला मुक्केबाजों का स्वर्णिम प्रदर्शन
भारतीय महिला बॉक्सिंग टीम ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया। साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मिन लांबोरिया, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पहली बार एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पांच महिला मुक्केबाज स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं।
9. पैरा एथलेटिक्स में तीन बार डबल पोडियम
भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। तीन अलग-अलग स्पर्धाओं में भारत ने डबल पोडियम हासिल किया। महिला शॉटपुट, पुरुष शॉटपुट और 100 मीटर दौड़ में भारतीय खिलाड़ियों ने एक साथ दो-दो पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
10. झंडू कुमार की संघर्ष से सफलता तक की कहानी
भारत का पहला पदक पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने दिलाया। पोलियो से प्रभावित झंडू कभी सब्जियां बेचते थे और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। खेल जारी रखने के लिए उन्होंने अपना रिक्शा तक बेच दिया। उनका पदक केवल खेल उपलब्धि नहीं बल्कि संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल भी बन गया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 केवल पदकों की संख्या तक सीमित नहीं रहे। इस प्रतियोगिता ने भारत को कई नए सितारे दिए, खिलाड़ियों के संघर्ष को दुनिया के सामने रखा और यह साबित किया कि भारतीय खेल लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहना भारतीय दल की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, जूडो और पैरा स्पोर्ट्स जैसे कई खेलों में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर भविष्य के लिए उम्मीदें और मजबूत कर दी हैं।
