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भारत ने संभाली 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की जिम्मेदारी, ग्लासगो में मशाल हस्तांतरण के साथ हुआ भव्य स्वागत
स्पोर्ट्स डेस्क
क्लोजिंग सेरेमनी में नीरज चोपड़ा, पीटी ऊषा और भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने लिया सम्मान, शंकर महादेवन, मानुषी छिल्लर और ऋषभ रिखीराम की प्रस्तुतियों ने दुनिया को दिखाई भारतीय संस्कृति की झलक
स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में 11 दिनों तक चले कॉमनवेल्थ गेम्स का रविवार रात रंगारंग और यादगार समापन हुआ। ओवो हाइड्रो एरिना में आयोजित क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान भारत के लिए सबसे बड़ा और गर्व का क्षण तब आया, जब आधिकारिक रूप से वर्ष 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की जिम्मेदारी भारत को सौंप दी गई। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स के अध्यक्ष डॉ. डोनाल्ड रुका ने परंपरा के अनुसार कॉमनवेल्थ ध्वज और मशाल भारतीय प्रतिनिधिमंडल को सौंपकर अगले मेजबान देश की घोषणा की।
इस ऐतिहासिक अवसर पर ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पीटी ऊषा और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी मंच पर मौजूद रहे। जैसे ही भारत ने कॉमनवेल्थ ध्वज ग्रहण किया, पूरे एरिना में तालियों की गूंज सुनाई दी और भारतीय दल ने गर्व के साथ तिरंगा लहराया।
क्लोजिंग सेरेमनी में दिखी भारतीय संस्कृति की भव्य झलक
ध्वज हस्तांतरण के बाद भारत की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का विशेष आयोजन किया गया। प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन ने अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम के साथ मंच पर शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने ‘ऐ वतन’, ‘भाग मिल्खा भाग’ और ‘परचम लहरा दो’ जैसे गीतों से माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुति देकर भारतीय संस्कृति की सुंदरता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया। वहीं सितार वादक ऋषभ रिखीराम ने स्कॉटिश कलाकार रॉस एंसली के साथ भारतीय सितार और स्कॉटिश बैगपाइप की अनूठी जुगलबंदी पेश की। शिव तांडव स्तोत्र की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायिका भूमि त्रिवेदी ने भी अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
स्कॉटिश संस्कृति के साथ हुई विदाई
समापन समारोह की शुरुआत ऑस्ट्रेलियाई गायिका डेल्टा गूडरेम की शानदार प्रस्तुति से हुई। उनके साथ कैमी बार्न्स और अन्य कलाकारों ने संगीत के माध्यम से स्कॉटलैंड की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
मशहूर बैंड ‘एलीफेंट सेशंस’ ने लोक संगीत, रॉक, इलेक्ट्रॉनिक और आधुनिक धुनों का मिश्रण पेश किया। समारोह के दौरान 74 देशों के खिलाड़ी अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज के साथ एरिना में पहुंचे, जिसने कॉमनवेल्थ परिवार की एकता और विविधता को दर्शाया।
भारत के लिए गर्व का अवसर
भारत के लिए यह केवल मेजबानी की घोषणा नहीं, बल्कि वैश्विक खेल आयोजनों में बढ़ते विश्वास और क्षमता का भी प्रतीक माना जा रहा है। भारत इससे पहले वर्ष 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की सफल मेजबानी कर चुका है। अब 20 वर्षों बाद एक बार फिर देश इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा। 2030 के आयोजन से भारत में खेल बुनियादी ढांचे का और अधिक विस्तार होगा। इससे खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और पर्यटन, रोजगार तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
100 साल पूरे करेगा कॉमनवेल्थ गेम्स
वर्ष 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह प्रतियोगिता अपने 100 वर्ष पूरे करेगी। पहला कॉमनवेल्थ गेम्स वर्ष 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में आयोजित किया गया था। इन सौ वर्षों में कई देशों ने इसकी मेजबानी की, लेकिन ऑस्ट्रेलिया सबसे अधिक पांच बार मेजबान बना। स्कॉटलैंड और कनाडा चार-चार बार आयोजन कर चुके हैं। अब भारत दूसरी बार इस प्रतिष्ठित आयोजन का मेजबान बनेगा।
भारत के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां
2030 के आयोजन के लिए भारत को आधुनिक स्टेडियम, खिलाड़ियों के आवास, परिवहन व्यवस्था, सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण अनुकूल आयोजन जैसी कई चुनौतियों पर काम करना होगा। यदि तैयारियां समय पर शुरू की जाती हैं तो भारत न केवल सफल आयोजन करेगा, बल्कि दुनिया के सामने अपनी सांस्कृतिक विरासत, तकनीकी क्षमता और खेल प्रबंधन का भी उत्कृष्ट उदाहरण पेश करेगा।
कॉमनवेल्थ ध्वज मिलने के बाद भारतीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने भारत को मिली इस जिम्मेदारी का स्वागत किया। कई पूर्व खिलाड़ियों ने इसे भारतीय खेल इतिहास का नया अध्याय बताया। सरकार, खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ आने वाले वर्षों में आयोजन की तैयारियों का विस्तृत रोडमैप तैयार करेंगे, ताकि शताब्दी संस्करण को ऐतिहासिक बनाया जा सके। भारत को मिली यह मेजबानी केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि दुनिया के सामने भारतीय संस्कृति, आतिथ्य, खेल प्रतिभा और आयोजन क्षमता को प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर है। आने वाले वर्षों में पूरी दुनिया की नजरें भारत की तैयारियों पर रहेंगी और देश एक बार फिर वैश्विक खेल मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार होगा।
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भारत ने संभाली 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की जिम्मेदारी, ग्लासगो में मशाल हस्तांतरण के साथ हुआ भव्य स्वागत
स्पोर्ट्स डेस्क
स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में 11 दिनों तक चले कॉमनवेल्थ गेम्स का रविवार रात रंगारंग और यादगार समापन हुआ। ओवो हाइड्रो एरिना में आयोजित क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान भारत के लिए सबसे बड़ा और गर्व का क्षण तब आया, जब आधिकारिक रूप से वर्ष 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की जिम्मेदारी भारत को सौंप दी गई। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स के अध्यक्ष डॉ. डोनाल्ड रुका ने परंपरा के अनुसार कॉमनवेल्थ ध्वज और मशाल भारतीय प्रतिनिधिमंडल को सौंपकर अगले मेजबान देश की घोषणा की।
इस ऐतिहासिक अवसर पर ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पीटी ऊषा और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी मंच पर मौजूद रहे। जैसे ही भारत ने कॉमनवेल्थ ध्वज ग्रहण किया, पूरे एरिना में तालियों की गूंज सुनाई दी और भारतीय दल ने गर्व के साथ तिरंगा लहराया।
क्लोजिंग सेरेमनी में दिखी भारतीय संस्कृति की भव्य झलक
ध्वज हस्तांतरण के बाद भारत की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का विशेष आयोजन किया गया। प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन ने अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम के साथ मंच पर शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने ‘ऐ वतन’, ‘भाग मिल्खा भाग’ और ‘परचम लहरा दो’ जैसे गीतों से माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुति देकर भारतीय संस्कृति की सुंदरता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया। वहीं सितार वादक ऋषभ रिखीराम ने स्कॉटिश कलाकार रॉस एंसली के साथ भारतीय सितार और स्कॉटिश बैगपाइप की अनूठी जुगलबंदी पेश की। शिव तांडव स्तोत्र की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायिका भूमि त्रिवेदी ने भी अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
स्कॉटिश संस्कृति के साथ हुई विदाई
समापन समारोह की शुरुआत ऑस्ट्रेलियाई गायिका डेल्टा गूडरेम की शानदार प्रस्तुति से हुई। उनके साथ कैमी बार्न्स और अन्य कलाकारों ने संगीत के माध्यम से स्कॉटलैंड की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
मशहूर बैंड ‘एलीफेंट सेशंस’ ने लोक संगीत, रॉक, इलेक्ट्रॉनिक और आधुनिक धुनों का मिश्रण पेश किया। समारोह के दौरान 74 देशों के खिलाड़ी अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज के साथ एरिना में पहुंचे, जिसने कॉमनवेल्थ परिवार की एकता और विविधता को दर्शाया।
भारत के लिए गर्व का अवसर
भारत के लिए यह केवल मेजबानी की घोषणा नहीं, बल्कि वैश्विक खेल आयोजनों में बढ़ते विश्वास और क्षमता का भी प्रतीक माना जा रहा है। भारत इससे पहले वर्ष 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की सफल मेजबानी कर चुका है। अब 20 वर्षों बाद एक बार फिर देश इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा। 2030 के आयोजन से भारत में खेल बुनियादी ढांचे का और अधिक विस्तार होगा। इससे खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और पर्यटन, रोजगार तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
100 साल पूरे करेगा कॉमनवेल्थ गेम्स
वर्ष 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह प्रतियोगिता अपने 100 वर्ष पूरे करेगी। पहला कॉमनवेल्थ गेम्स वर्ष 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में आयोजित किया गया था। इन सौ वर्षों में कई देशों ने इसकी मेजबानी की, लेकिन ऑस्ट्रेलिया सबसे अधिक पांच बार मेजबान बना। स्कॉटलैंड और कनाडा चार-चार बार आयोजन कर चुके हैं। अब भारत दूसरी बार इस प्रतिष्ठित आयोजन का मेजबान बनेगा।
भारत के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां
2030 के आयोजन के लिए भारत को आधुनिक स्टेडियम, खिलाड़ियों के आवास, परिवहन व्यवस्था, सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण अनुकूल आयोजन जैसी कई चुनौतियों पर काम करना होगा। यदि तैयारियां समय पर शुरू की जाती हैं तो भारत न केवल सफल आयोजन करेगा, बल्कि दुनिया के सामने अपनी सांस्कृतिक विरासत, तकनीकी क्षमता और खेल प्रबंधन का भी उत्कृष्ट उदाहरण पेश करेगा।
कॉमनवेल्थ ध्वज मिलने के बाद भारतीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने भारत को मिली इस जिम्मेदारी का स्वागत किया। कई पूर्व खिलाड़ियों ने इसे भारतीय खेल इतिहास का नया अध्याय बताया। सरकार, खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ आने वाले वर्षों में आयोजन की तैयारियों का विस्तृत रोडमैप तैयार करेंगे, ताकि शताब्दी संस्करण को ऐतिहासिक बनाया जा सके। भारत को मिली यह मेजबानी केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि दुनिया के सामने भारतीय संस्कृति, आतिथ्य, खेल प्रतिभा और आयोजन क्षमता को प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर है। आने वाले वर्षों में पूरी दुनिया की नजरें भारत की तैयारियों पर रहेंगी और देश एक बार फिर वैश्विक खेल मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार होगा।
