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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दमदार प्रदर्शन, 15 मिनट में दो गोल्ड जीतकर रचा इतिहास
स्पोर्ट्स डेस्क
जूडो में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने दिलाए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक, भारत के खाते में अब 19 मेडल; बॉक्सिंग और जेवलिन थ्रो में भी गोल्ड की उम्मीद बरकरार
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी खेल क्षमता का दम दिखाया है। शुक्रवार की रात भारतीय खिलाड़ियों ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया। महज 15 मिनट के भीतर भारत ने दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। जूडो में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग के फाइनल मुकाबले जीतकर देश को गोल्ड मेडल दिलाए। खास बात यह रही कि कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार भारत ने जूडो में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस उपलब्धि के बाद भारतीय दल का उत्साह काफी बढ़ गया है और मेडल तालिका में भी भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
महिलाओं की 48 किलोग्राम वर्ग की स्पर्धा में त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे ने कनाडा की खिलाड़ी हेइडी क्वाच का सामना किया। मुकाबले की शुरुआत आसान नहीं रही। शुरुआती दौर में अस्मिता एक अंक से पीछे हो गई थीं और उन्हें एक पेनल्टी भी मिली। ऐसा लग रहा था कि कनाडाई खिलाड़ी बढ़त बनाए रखेंगी, लेकिन अस्मिता ने शानदार वापसी की। उन्होंने लगातार आक्रामक खेल दिखाया और मुकाबले को बराबरी पर लाकर अंत में 2-1 से जीत दर्ज की। जैसे ही निर्णायक अंक मिला, भारतीय खेमे में जश्न शुरू हो गया।
अस्मिता की जीत के करीब 15 मिनट बाद भारत को दूसरा स्वर्ण पदक भी मिल गया। पुरुषों की 60 किलोग्राम वर्ग की स्पर्धा में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को एकतरफा अंदाज में 10-0 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। मुकाबले की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन हर्ष ने बेहतरीन बचाव किया। पूरे मुकाबले में उन्होंने संयम बनाए रखा और अंतिम मिनट में निर्णायक दांव लगाकर बढ़त बनाई। इसके बाद उन्होंने विरोधी खिलाड़ी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया और शानदार जीत दर्ज कर ली।
इन दोनों ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। पहली बार जूडो में स्वर्ण पदक मिलने को भारतीय खेल इतिहास की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि यह जीत आने वाले वर्षों में जूडो के प्रति युवाओं का आकर्षण भी बढ़ाएगी और नए खिलाड़ियों को प्रेरणा देगी।
भारत का अभियान यहीं नहीं रुका। जूडो की महिलाओं की 57 किलोग्राम वर्ग में यामिनी मौर्य भी फाइनल में पहुंचीं और उनसे भी स्वर्ण पदक की उम्मीद जताई जा रही है। यदि वह भी जीत दर्ज करती हैं तो भारत का प्रदर्शन और मजबूत हो जाएगा। इस समय भारतीय दल का आत्मविश्वास ऊंचाई पर है और खिलाड़ी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
मेडल तालिका की बात करें तो भारत अब तक 5 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदक सहित कुल 19 पदक जीत चुका है। इस प्रदर्शन के साथ भारत शीर्ष दस देशों में अपनी जगह मजबूत करने में सफल रहा है। प्रतियोगिता के अगले चरणों में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदकों की संख्या और बढ़ाने का मौका होगा।
बॉक्सिंग में भी भारत का प्रदर्शन लगातार शानदार बना हुआ है। पांच भारतीय मुक्केबाज फाइनल में पहुंच चुके हैं और उन्होंने कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया है। अब इन सभी खिलाड़ियों से स्वर्ण पदक की उम्मीद की जा रही है। जादुमणि सिंह, प्रीति पवार, जैस्मीन लम्बोरिया, अरुंधति चौधरी और अंकुश पंघाल ने सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई है। यदि इनमें से अधिकांश खिलाड़ी गोल्ड जीतते हैं तो भारत की मेडल संख्या में बड़ा इजाफा होगा।
पुरुषों की 80 किलोग्राम वर्ग में अंकुश पंघाल ने कनाडा के खिलाड़ी को 5-0 से हराया और पूरे मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा। वहीं महिलाओं की स्पर्धाओं में भी भारतीय मुक्केबाजों ने तकनीकी और आक्रामक खेल का शानदार प्रदर्शन किया। खेल विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बॉक्सिंग इस बार भारत के लिए सबसे सफल खेलों में शामिल हो सकता है।
इधर भारतीय खेल प्रेमियों की नजर देर रात होने वाले जेवलिन थ्रो फाइनल पर भी टिकी हुई है। ओलिंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा स्वर्ण पदक के सबसे बड़े दावेदारों में शामिल हैं। उनके सामने पाकिस्तान के अरशद नदीम और श्रीलंका के रुमेश पाथिराजे जैसी मजबूत चुनौती होगी। नीरज और अरशद की प्रतिद्वंद्विता पिछले कई वर्षों से चर्चा में रही है और दोनों खिलाड़ी एक बार फिर आमने-सामने होंगे।
नीरज चोपड़ा ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दी है। वे 90 मीटर से अधिक भाला फेंकने वाले भारत के पहले खिलाड़ी हैं और उनके नाम राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज है। ऐसे में देशवासियों को उनसे एक और यादगार प्रदर्शन की उम्मीद है। यदि नीरज स्वर्ण पदक जीतते हैं तो भारत की मेडल तालिका और मजबूत होगी।
दूसरी ओर लॉन बॉल्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया है। पुरुष पेयर्स स्पर्धा में दिनेश कुमार और नवनीत सिंह की जोड़ी ने लगातार चौथी जीत दर्ज कर सेमीफाइनल की उम्मीदें कायम रखी हैं। टीम का संतुलित प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में भी भारत को सफलता मिल सकती है।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दमदार प्रदर्शन, 15 मिनट में दो गोल्ड जीतकर रचा इतिहास
स्पोर्ट्स डेस्क
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी खेल क्षमता का दम दिखाया है। शुक्रवार की रात भारतीय खिलाड़ियों ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया। महज 15 मिनट के भीतर भारत ने दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। जूडो में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग के फाइनल मुकाबले जीतकर देश को गोल्ड मेडल दिलाए। खास बात यह रही कि कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार भारत ने जूडो में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस उपलब्धि के बाद भारतीय दल का उत्साह काफी बढ़ गया है और मेडल तालिका में भी भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
महिलाओं की 48 किलोग्राम वर्ग की स्पर्धा में त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे ने कनाडा की खिलाड़ी हेइडी क्वाच का सामना किया। मुकाबले की शुरुआत आसान नहीं रही। शुरुआती दौर में अस्मिता एक अंक से पीछे हो गई थीं और उन्हें एक पेनल्टी भी मिली। ऐसा लग रहा था कि कनाडाई खिलाड़ी बढ़त बनाए रखेंगी, लेकिन अस्मिता ने शानदार वापसी की। उन्होंने लगातार आक्रामक खेल दिखाया और मुकाबले को बराबरी पर लाकर अंत में 2-1 से जीत दर्ज की। जैसे ही निर्णायक अंक मिला, भारतीय खेमे में जश्न शुरू हो गया।
अस्मिता की जीत के करीब 15 मिनट बाद भारत को दूसरा स्वर्ण पदक भी मिल गया। पुरुषों की 60 किलोग्राम वर्ग की स्पर्धा में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को एकतरफा अंदाज में 10-0 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। मुकाबले की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन हर्ष ने बेहतरीन बचाव किया। पूरे मुकाबले में उन्होंने संयम बनाए रखा और अंतिम मिनट में निर्णायक दांव लगाकर बढ़त बनाई। इसके बाद उन्होंने विरोधी खिलाड़ी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया और शानदार जीत दर्ज कर ली।
इन दोनों ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। पहली बार जूडो में स्वर्ण पदक मिलने को भारतीय खेल इतिहास की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि यह जीत आने वाले वर्षों में जूडो के प्रति युवाओं का आकर्षण भी बढ़ाएगी और नए खिलाड़ियों को प्रेरणा देगी।
भारत का अभियान यहीं नहीं रुका। जूडो की महिलाओं की 57 किलोग्राम वर्ग में यामिनी मौर्य भी फाइनल में पहुंचीं और उनसे भी स्वर्ण पदक की उम्मीद जताई जा रही है। यदि वह भी जीत दर्ज करती हैं तो भारत का प्रदर्शन और मजबूत हो जाएगा। इस समय भारतीय दल का आत्मविश्वास ऊंचाई पर है और खिलाड़ी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
मेडल तालिका की बात करें तो भारत अब तक 5 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदक सहित कुल 19 पदक जीत चुका है। इस प्रदर्शन के साथ भारत शीर्ष दस देशों में अपनी जगह मजबूत करने में सफल रहा है। प्रतियोगिता के अगले चरणों में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदकों की संख्या और बढ़ाने का मौका होगा।
बॉक्सिंग में भी भारत का प्रदर्शन लगातार शानदार बना हुआ है। पांच भारतीय मुक्केबाज फाइनल में पहुंच चुके हैं और उन्होंने कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया है। अब इन सभी खिलाड़ियों से स्वर्ण पदक की उम्मीद की जा रही है। जादुमणि सिंह, प्रीति पवार, जैस्मीन लम्बोरिया, अरुंधति चौधरी और अंकुश पंघाल ने सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई है। यदि इनमें से अधिकांश खिलाड़ी गोल्ड जीतते हैं तो भारत की मेडल संख्या में बड़ा इजाफा होगा।
पुरुषों की 80 किलोग्राम वर्ग में अंकुश पंघाल ने कनाडा के खिलाड़ी को 5-0 से हराया और पूरे मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा। वहीं महिलाओं की स्पर्धाओं में भी भारतीय मुक्केबाजों ने तकनीकी और आक्रामक खेल का शानदार प्रदर्शन किया। खेल विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बॉक्सिंग इस बार भारत के लिए सबसे सफल खेलों में शामिल हो सकता है।
इधर भारतीय खेल प्रेमियों की नजर देर रात होने वाले जेवलिन थ्रो फाइनल पर भी टिकी हुई है। ओलिंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा स्वर्ण पदक के सबसे बड़े दावेदारों में शामिल हैं। उनके सामने पाकिस्तान के अरशद नदीम और श्रीलंका के रुमेश पाथिराजे जैसी मजबूत चुनौती होगी। नीरज और अरशद की प्रतिद्वंद्विता पिछले कई वर्षों से चर्चा में रही है और दोनों खिलाड़ी एक बार फिर आमने-सामने होंगे।
नीरज चोपड़ा ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दी है। वे 90 मीटर से अधिक भाला फेंकने वाले भारत के पहले खिलाड़ी हैं और उनके नाम राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज है। ऐसे में देशवासियों को उनसे एक और यादगार प्रदर्शन की उम्मीद है। यदि नीरज स्वर्ण पदक जीतते हैं तो भारत की मेडल तालिका और मजबूत होगी।
दूसरी ओर लॉन बॉल्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया है। पुरुष पेयर्स स्पर्धा में दिनेश कुमार और नवनीत सिंह की जोड़ी ने लगातार चौथी जीत दर्ज कर सेमीफाइनल की उम्मीदें कायम रखी हैं। टीम का संतुलित प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में भी भारत को सफलता मिल सकती है।
