करनाल के सैन्य अधिकारी ने सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता

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2000 मीटर की रेस 7 मिनट 12 सेकेंड में पूरी कर रचा नया कीर्तिमान, 18 खिलाड़ियों को छोड़ा पीछे

करनाल।हरियाणा के करनाल जिले से जुड़े एक भारतीय सैन्य अधिकारी ने सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। यह प्रतियोगिता 27 जनवरी से 1 फरवरी के बीच पुणे में आयोजित की गई थी। 2000 मीटर की सिंगल स्कल्स रेस में उन्होंने 7 मिनट 12 सेकेंड का समय लेकर पहला स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में देशभर से कुल 18 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।

भारतीय सेना में नायब सूबेदार पद पर तैनात इस खिलाड़ी ने आर्मी सर्विसेज का प्रतिनिधित्व करते हुए यह सफलता अर्जित की। प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में उन्होंने शुरुआत से ही बढ़त बना ली और अंतिम 500 मीटर में रफ्तार बनाए रखकर गोल्ड मेडल पक्का किया।

सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप का आयोजन महाराष्ट्र के पुणे शहर में किया गया, जहां देश की शीर्ष सैन्य और राज्य स्तरीय टीमें शामिल हुईं। यह प्रतियोगिता आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स के लिए चयन और तैयारी के लिहाज से अहम मानी जाती है।

कैसे मिली जीत
रेस के दौरान हवा की दिशा और पानी की धार ने मुकाबले को चुनौतीपूर्ण बना दिया था, लेकिन अनुभव और संतुलित रणनीति के दम पर सैन्य खिलाड़ी ने हालात पर काबू पाया। पहले 1000 मीटर में संयम रखते हुए उन्होंने अंतिम चरण में स्पीड बढ़ाई, जिससे प्रतिद्वंद्वी उनसे पीछे रह गए।

प्रतियोगिता का परिणाम
स्वर्ण पदक आर्मी सर्विसेज के खाते में गया, जबकि दूसरा स्थान भी सेना की टीम ने हासिल किया। तीसरे स्थान पर हरियाणा और चौथे पर झारखंड की टीम रही। आयोजन समिति के अनुसार यह रेस चैंपियनशिप की सबसे प्रतिस्पर्धी स्पर्धाओं में से एक रही।

करनाल जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले इस खिलाड़ी का सफर आसान नहीं रहा। बचपन में पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच मेहनत और अनुशासन ने उन्हें आगे बढ़ाया। सेना में भर्ती होने के बाद उनकी लंबी कद-काठी को देखते हुए कोचों ने रोइंग के लिए चुना। शुरुआती वर्षों में ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना ली।

पेरिस ओलिंपिक में भाग लेने के बाद अब उनका फोकस एशियन गेम्स और अगले ओलिंपिक पर है। सैन्य रोइंग नोड में नियमित अभ्यास के जरिए वे तकनीक और सहनशक्ति पर काम कर रहे हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा फॉर्म को बरकरार रखा गया तो यह खिलाड़ी आने वाले वर्षों में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि दिला सकता है।

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