भारत के खिलाफ मुकाबले से इनकार: वर्ल्ड कप में एक फैसले के दूरगामी असर

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ICC नियमों के तहत ग्रुप स्टेज से बाहर होने से लेकर भविष्य की मेजबानी तक संकट

टी-20 वर्ल्ड कप में एक टीम द्वारा भारत के खिलाफ मैच न खेलने का फैसला टूर्नामेंट में बड़ा विवाद बन गया है। संबंधित देश की सरकार ने स्पष्ट किया है कि टीम प्रतियोगिता में हिस्सा लेगी, लेकिन भारत से आमना-सामना नहीं करेगी। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बोर्ड से दोबारा विचार करने को कहा है।अब सवाल यह है कि इस कदम का असर उस टीम और उसके क्रिकेट बोर्ड पर किस तरह पड़ सकता है।


ग्रुप स्टेज में ही टूर्नामेंट से बाहर होने का जोखिम

ICC के नियमों के अनुसार अगर कोई टीम जानबूझकर मैच नहीं खेलती, तो उसे उस मुकाबले में 20 ओवर में शून्य रन का स्कोर मान लिया जाता है। वहीं विरोधी टीम का एक भी ओवर नहीं गिना जाता।
इस स्थिति में संबंधित टीम का नेट रन रेट बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

ग्रुप में मौजूद अन्य टीमें पहले ही मजबूत प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं। अगर एक भी अतिरिक्त मुकाबला हार हुआ, तो सेमीफाइनल की उम्मीद लगभग खत्म हो सकती है।

ICC द्वारा टूर्नामेंट से बाहर किया जा सकता है

ICC इस मामले में बोर्ड से आधिकारिक जवाब मांगेगा। अगर दिया गया कारण नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया, तो विश्व संस्था इसी वर्ल्ड कप से टीम को बाहर करने का फैसला भी ले सकती है।
अतीत में भी ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं, जब मैच न खेलने पर कड़ी कार्रवाई की गई।


 घरेलू लीग पर भी पड़ सकता है प्रभाव

अगर बोर्ड किसी अन्य देश के समर्थन या राजनीतिक कारणों का हवाला देता है, तो इसका असर उसकी घरेलू टी-20 लीग पर भी पड़ सकता है।
ICC पहले ही संकेत दे चुका है कि ऐसे मामलों में नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी खतरे में पड़ सकती है।


नॉकआउट मुकाबले में फिर भारत सामने आया तो क्या होगा?

ग्रुप स्टेज के बाद अगर नॉकआउट मुकाबले में भारत से सामना होता है, तो बोर्ड का रुख क्या रहेगा, यह अब तक साफ नहीं किया गया है।
ICC इस स्थिति को लेकर पहले से स्पष्टता चाहता है, ताकि आगे किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। अस्पष्ट जवाब मिलने पर कठोर दंड तय माना जा रहा है


भविष्य में मेजबानी मिलने की संभावना घटेगी

भारत से होने वाले मुकाबले ICC टूर्नामेंट्स की सबसे बड़ी कमाई का जरिया माने जाते हैं। ऐसे मैच न होने से प्रसारण अधिकार और स्पॉन्सरशिप रेवेन्यू पर सीधा असर पड़ता है।
इसी कारण भविष्य में उस देश से ICC टूर्नामेंट की मेजबानी छीनी जा सकती है या सालाना राजस्व हिस्सेदारी में कटौती की जा सकती है।

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