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वर्ल्ड कप में छाया गुलाबी बूट्स का ट्रेंड, खिलाड़ियों की नई पहचान बना ‘कलर कोड’
स्पोर्ट्स डेस्क
फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में खिलाड़ियों के गुलाबी बूट्स चर्चा का विषय बने हैं। स्टाइल, आत्मविश्वास और दृश्यता के कारण यह रंग मैदान पर सबसे अलग नजर आ रहा है।
फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में जहां एक ओर रोमांचक मुकाबले, शानदार गोल और उलटफेर की कहानियां सुर्खियां बटोर रही हैं, वहीं दूसरी ओर मैदान पर एक नया ट्रेंड भी चर्चा का विषय बन गया है। इस बार दर्शकों का ध्यान सिर्फ खिलाड़ियों के खेल पर नहीं, बल्कि उनके पैरों में दिखाई दे रहे चमकीले गुलाबी बूट्स पर भी जा रहा है। टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों से ही यह रंग मैदान पर इस कदर छाया हुआ है कि इसे वर्ल्ड कप का नया ‘कलर कोड’ कहा जाने लगा है। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों से लेकर टीवी स्क्रीन पर मैच देखने वाले फुटबॉल प्रेमियों तक, हर किसी ने एक बात नोटिस की है। अलग-अलग देशों की टीमों के खिलाड़ी, चाहे वे यूरोप से हों, दक्षिण अमेरिका से हों या एशिया से, बड़ी संख्या में गुलाबी रंग के बूट्स पहनकर मैदान में उतर रहे हैं। इससे ऐसा लग रहा है मानो इस बार फुटबॉल का सबसे बड़ा महाकुंभ सिर्फ खेल ही नहीं, बल्कि एक नए फैशन ट्रेंड का भी मंच बन गया हो। खेल उपकरण बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियां नाइकी, एडिडास, प्यूमा, न्यू बैलेंस और स्केचर्स इस बदलाव की मुख्य वजह मानी जा रही हैं। इन सभी ब्रांड्स ने वर्ल्ड कप के लिए विशेष डिजाइन वाले फुटबॉल बूट्स लॉन्च किए हैं, जिनमें गुलाबी रंग प्रमुखता से दिखाई देता है। दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग कंपनियों के उत्पाद होने के बावजूद अधिकांश बूट्स का रंग और डिजाइन एक-दूसरे से काफी मिलता-जुलता नजर आता है।
फुटबॉल फुटवियर विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि सोच-समझकर बनाई गई रणनीति का हिस्सा है। खेल बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और कंपनियां खिलाड़ियों के साथ-साथ दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए नए प्रयोग कर रही हैं। ऐसे में गुलाबी रंग को एक ऐसे विकल्प के रूप में चुना गया है, जो मैदान पर सबसे ज्यादा उभरकर दिखाई देता है। हरे रंग के मैदान पर गुलाबी रंग की दृश्यता सबसे अधिक होती है। यही कारण है कि कैमरे में भी यह रंग बेहद आकर्षक दिखाई देता है। जब कोई खिलाड़ी तेज गति से दौड़ता है या गेंद पर नियंत्रण बनाता है, तो उसके बूट्स तुरंत दर्शकों की नजर में आ जाते हैं। इससे खिलाड़ी की व्यक्तिगत पहचान भी मजबूत होती है और ब्रांड को भी व्यापक प्रचार मिलता है। फुटवियर उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि आधुनिक खेलों में प्रदर्शन के साथ-साथ व्यक्तिगत ब्रांडिंग भी महत्वपूर्ण हो गई है। आज के खिलाड़ी केवल अपने खेल से ही नहीं, बल्कि अपने स्टाइल, पहनावे और मैदान पर दिखने वाले अंदाज से भी पहचाने जाते हैं। सोशल मीडिया के दौर में किसी खिलाड़ी का अलग दिखना उसकी लोकप्रियता बढ़ाने में मदद करता है। यही वजह है कि कई खिलाड़ी ऐसे रंगों का चुनाव करते हैं जो उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिला सकें।
गुलाबी रंग को लेकर एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। फुटबॉल उपकरण निर्माताओं का दावा है कि खिलाड़ियों से मिली प्रतिक्रिया में यह बात सामने आई कि चमकीले रंग उन्हें आत्मविश्वास देते हैं। बड़े टूर्नामेंट के दबाव में खिलाड़ी चाहते हैं कि वे मानसिक रूप से सकारात्मक महसूस करें और मैदान पर अपनी मौजूदगी का एहसास करा सकें। गुलाबी रंग को इसी मनोवैज्ञानिक प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्ल्ड कप 2026 में किसी भी प्रमुख टीम की मुख्य जर्सी गुलाबी रंग की नहीं है। यही वजह है कि खिलाड़ियों के बूट्स और भी ज्यादा आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। जब पूरा ध्यान पारंपरिक टीम रंगों पर होता है, तब पैरों में चमकता गुलाबी रंग तुरंत नजर पकड़ लेता है। कई फुटबॉल प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर इसे टूर्नामेंट का सबसे चर्चित फैशन ट्रेंड बताया है। हालांकि खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड हमेशा नहीं रहेगा। फुटबॉल बाजार में रंगों और डिजाइन का चलन तेजी से बदलता है। जैसे ही नया क्लब सीजन शुरू होगा, कंपनियां संभवतः किसी नए रंग और नए कॉन्सेप्ट के साथ बाजार में उतरेंगी। लेकिन फिलहाल गुलाबी रंग ने दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर अपनी अलग पहचान बना ली है। आधुनिक खेलों में फैशन और प्रदर्शन का यह मेल लगातार मजबूत होता जा रहा है। पहले जहां खेल उपकरण केवल उपयोगिता तक सीमित थे, वहीं अब वे खिलाड़ियों की पहचान, आत्मविश्वास और ब्रांड वैल्यू का हिस्सा बन चुके हैं। फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में गुलाबी बूट्स का बढ़ता प्रभाव इसी बदलाव की एक झलक है।
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वर्ल्ड कप में छाया गुलाबी बूट्स का ट्रेंड, खिलाड़ियों की नई पहचान बना ‘कलर कोड’
स्पोर्ट्स डेस्क
फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में जहां एक ओर रोमांचक मुकाबले, शानदार गोल और उलटफेर की कहानियां सुर्खियां बटोर रही हैं, वहीं दूसरी ओर मैदान पर एक नया ट्रेंड भी चर्चा का विषय बन गया है। इस बार दर्शकों का ध्यान सिर्फ खिलाड़ियों के खेल पर नहीं, बल्कि उनके पैरों में दिखाई दे रहे चमकीले गुलाबी बूट्स पर भी जा रहा है। टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों से ही यह रंग मैदान पर इस कदर छाया हुआ है कि इसे वर्ल्ड कप का नया ‘कलर कोड’ कहा जाने लगा है। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों से लेकर टीवी स्क्रीन पर मैच देखने वाले फुटबॉल प्रेमियों तक, हर किसी ने एक बात नोटिस की है। अलग-अलग देशों की टीमों के खिलाड़ी, चाहे वे यूरोप से हों, दक्षिण अमेरिका से हों या एशिया से, बड़ी संख्या में गुलाबी रंग के बूट्स पहनकर मैदान में उतर रहे हैं। इससे ऐसा लग रहा है मानो इस बार फुटबॉल का सबसे बड़ा महाकुंभ सिर्फ खेल ही नहीं, बल्कि एक नए फैशन ट्रेंड का भी मंच बन गया हो। खेल उपकरण बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियां नाइकी, एडिडास, प्यूमा, न्यू बैलेंस और स्केचर्स इस बदलाव की मुख्य वजह मानी जा रही हैं। इन सभी ब्रांड्स ने वर्ल्ड कप के लिए विशेष डिजाइन वाले फुटबॉल बूट्स लॉन्च किए हैं, जिनमें गुलाबी रंग प्रमुखता से दिखाई देता है। दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग कंपनियों के उत्पाद होने के बावजूद अधिकांश बूट्स का रंग और डिजाइन एक-दूसरे से काफी मिलता-जुलता नजर आता है।
फुटबॉल फुटवियर विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि सोच-समझकर बनाई गई रणनीति का हिस्सा है। खेल बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और कंपनियां खिलाड़ियों के साथ-साथ दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए नए प्रयोग कर रही हैं। ऐसे में गुलाबी रंग को एक ऐसे विकल्प के रूप में चुना गया है, जो मैदान पर सबसे ज्यादा उभरकर दिखाई देता है। हरे रंग के मैदान पर गुलाबी रंग की दृश्यता सबसे अधिक होती है। यही कारण है कि कैमरे में भी यह रंग बेहद आकर्षक दिखाई देता है। जब कोई खिलाड़ी तेज गति से दौड़ता है या गेंद पर नियंत्रण बनाता है, तो उसके बूट्स तुरंत दर्शकों की नजर में आ जाते हैं। इससे खिलाड़ी की व्यक्तिगत पहचान भी मजबूत होती है और ब्रांड को भी व्यापक प्रचार मिलता है। फुटवियर उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि आधुनिक खेलों में प्रदर्शन के साथ-साथ व्यक्तिगत ब्रांडिंग भी महत्वपूर्ण हो गई है। आज के खिलाड़ी केवल अपने खेल से ही नहीं, बल्कि अपने स्टाइल, पहनावे और मैदान पर दिखने वाले अंदाज से भी पहचाने जाते हैं। सोशल मीडिया के दौर में किसी खिलाड़ी का अलग दिखना उसकी लोकप्रियता बढ़ाने में मदद करता है। यही वजह है कि कई खिलाड़ी ऐसे रंगों का चुनाव करते हैं जो उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिला सकें।
गुलाबी रंग को लेकर एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। फुटबॉल उपकरण निर्माताओं का दावा है कि खिलाड़ियों से मिली प्रतिक्रिया में यह बात सामने आई कि चमकीले रंग उन्हें आत्मविश्वास देते हैं। बड़े टूर्नामेंट के दबाव में खिलाड़ी चाहते हैं कि वे मानसिक रूप से सकारात्मक महसूस करें और मैदान पर अपनी मौजूदगी का एहसास करा सकें। गुलाबी रंग को इसी मनोवैज्ञानिक प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्ल्ड कप 2026 में किसी भी प्रमुख टीम की मुख्य जर्सी गुलाबी रंग की नहीं है। यही वजह है कि खिलाड़ियों के बूट्स और भी ज्यादा आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। जब पूरा ध्यान पारंपरिक टीम रंगों पर होता है, तब पैरों में चमकता गुलाबी रंग तुरंत नजर पकड़ लेता है। कई फुटबॉल प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर इसे टूर्नामेंट का सबसे चर्चित फैशन ट्रेंड बताया है। हालांकि खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड हमेशा नहीं रहेगा। फुटबॉल बाजार में रंगों और डिजाइन का चलन तेजी से बदलता है। जैसे ही नया क्लब सीजन शुरू होगा, कंपनियां संभवतः किसी नए रंग और नए कॉन्सेप्ट के साथ बाजार में उतरेंगी। लेकिन फिलहाल गुलाबी रंग ने दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर अपनी अलग पहचान बना ली है। आधुनिक खेलों में फैशन और प्रदर्शन का यह मेल लगातार मजबूत होता जा रहा है। पहले जहां खेल उपकरण केवल उपयोगिता तक सीमित थे, वहीं अब वे खिलाड़ियों की पहचान, आत्मविश्वास और ब्रांड वैल्यू का हिस्सा बन चुके हैं। फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में गुलाबी बूट्स का बढ़ता प्रभाव इसी बदलाव की एक झलक है।
