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विंबलडन में वापसी फीकी पड़ी, पहले दौर में हारकर बाहर हुईं सेरेना विलियम्स
स्पोर्ट्स डेस्क
करीब चार साल बाद ग्रैंड स्लैम कोर्ट पर लौटीं 44 वर्षीय सेरेना विलियम्स को ऑस्ट्रेलिया की युवा खिलाड़ी माया जॉइंट ने तीन सेट तक चले मुकाबले में हराया। वहीं इगा स्वियातेक और ग्रिगोर दिमित्रोव ने संघर्षपूर्ण जीत के साथ दूसरे दौर में जगह बनाई।
विंबलडन 2026 के पहले दौर में दुनिया की सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में शामिल सेरेना विलियम्स की वापसी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। लगभग चार साल बाद ग्रैंड स्लैम कोर्ट पर उतरीं 44 वर्षीय सेरेना को ऑस्ट्रेलिया की 20 वर्षीय खिलाड़ी माया जॉइंट ने तीन सेट तक चले मुकाबले में 6-3, 6-7, 6-3 से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। लंबे समय बाद कोर्ट पर लौटीं सेरेना ने दूसरे सेट में शानदार जुझारूपन दिखाया, लेकिन निर्णायक सेट में उनकी फिटनेस और मैच प्रैक्टिस की कमी साफ नजर आई। इसके बावजूद दर्शकों ने उनकी वापसी का जोरदार स्वागत किया और मुकाबले के दौरान पूरे समय उनका उत्साह बढ़ाते रहे। सेरेना विलियम्स ने वर्ष 2022 में मां बनने के बाद पेशेवर टेनिस से दूरी बना ली थी। इसके बाद यह उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट था, जिसमें उन्हें सिंगल्स और डबल्स दोनों वर्गों में वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली। पहले दौर के मुकाबले में शुरुआत से ही माया जॉइंट ने आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने पहले सेट में सेरेना की धीमी मूवमेंट और गलतियों का फायदा उठाते हुए आसानी से बढ़त बना ली। दूसरे सेट में मुकाबला पूरी तरह बदल गया। सेरेना ने अनुभव का शानदार प्रदर्शन किया और दो बार पिछड़ने के बावजूद मुकाबले को टाई-ब्रेकर तक पहुंचाया। टाई-ब्रेकर जीतने के बाद ऐसा लगा कि वह मैच में वापसी कर लेंगी, लेकिन तीसरे सेट में लगातार लंबे रैलियों के दौरान उनकी थकान साफ दिखाई दी। युवा माया ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और निर्णायक सेट अपने नाम करते हुए करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज कर ली।
हार के बाद सेरेना ने कहा कि विंबलडन में दोबारा खेलना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। उन्होंने माना कि उन्होंने इस तरह की वापसी की उम्मीद नहीं की थी, लेकिन यहां का माहौल हमेशा की तरह शानदार रहा। उन्होंने दर्शकों का समर्थन मिलने पर खुशी जताई और कहा कि इस अनुभव को वह लंबे समय तक याद रखेंगी। हालांकि सिंगल्स अभियान खत्म हो गया है, लेकिन उनका टूर्नामेंट अभी समाप्त नहीं हुआ है। अब वह महिला युगल वर्ग में अपनी बड़ी बहन वीनस विलियम्स के साथ कोर्ट पर उतरेंगी। दोनों बहनों की जोड़ी पहले भी कई ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुकी है और प्रशंसकों को एक बार फिर उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। महिला सिंगल्स में मौजूदा चैंपियन इगा स्वियातेक को भी पहले दौर में आसान जीत नहीं मिली। तीसरी वरीयता प्राप्त पोलैंड की खिलाड़ी को अमेरिका की टेलर टाउनसेंड के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। स्वियातेक ने पहला सेट आसानी से 6-1 से जीत लिया, लेकिन दूसरे सेट में उनका खेल पूरी तरह बिखर गया और टाउनसेंड ने मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। निर्णायक सेट की शुरुआत भी स्वियातेक के लिए अच्छी नहीं रही। उन्होंने पहले ही गेम में तीन डबल फॉल्ट किए, लेकिन कठिन परिस्थिति से बाहर निकलते हुए सभी महत्वपूर्ण ब्रेक प्वाइंट बचा लिए। लगभग दो घंटे तक चले मुकाबले में आखिरकार उन्होंने 6-3 से तीसरा सेट जीतकर अगले दौर में जगह बनाई। जीत के बाद वह काफी भावुक नजर आईं और कोर्ट पर ही तौलिए से चेहरा छिपाकर अपनी भावनाओं को संभालती दिखीं। यह दृश्य दर्शकों के लिए भी काफी भावुक रहा।
पुरुष सिंगल्स में बुल्गारिया के अनुभवी खिलाड़ी ग्रिगोर दिमित्रोव ने भी शानदार वापसी की कहानी लिखी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के डेन स्वीनी को सीधे सेटों में 7-6, 6-3, 7-5 से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश किया। पिछले साल इसी टूर्नामेंट में उन्हें गंभीर चोट के कारण मुकाबला बीच में छोड़ना पड़ा था। उस समय वह कोर्ट से बाहर जाते हुए भावुक हो गए थे। इस बार जीत के बाद दिमित्रोव ने मुस्कुराते हुए दर्शकों का अभिवादन किया, ऑटोग्राफ दिए और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। उनकी वापसी को लेकर टेनिस प्रेमियों ने भी खुशी जताई। टूर्नामेंट के दूसरे दिन मेजबान ब्रिटेन के खिलाड़ियों के लिए निराशाजनक तस्वीर देखने को मिली। विंबलडन के 38 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि पहले दौर में ही ब्रिटेन के 15 खिलाड़ी हारकर बाहर हो गए। इससे पहले 1988 में 16 ब्रिटिश खिलाड़ी शुरुआती दौर में बाहर हुए थे। हालांकि कुछ स्थानीय खिलाड़ियों ने जीत दर्ज कर घरेलू दर्शकों की उम्मीदें कायम रखीं। केटी स्वान ने रोमानिया की इरिना-कैमेलिया बेगु को सीधे सेटों में हराया, जबकि जैकब फर्नली ने दो सेट से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम किया। आर्थर फेरी और जान चोइंस्की ने भी जीत दर्ज कर अगले दौर में जगह बनाई। विंबलडन के शुरुआती मुकाबलों ने साफ कर दिया है कि इस बार अनुभव और युवा जोश के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। सेरेना विलियम्स की हार ने जहां उनके प्रशंसकों को निराश किया, वहीं माया जॉइंट जैसी युवा खिलाड़ी के लिए यह जीत करियर का सबसे बड़ा पड़ाव बन गई। दूसरी ओर इगा स्वियातेक और ग्रिगोर दिमित्रोव जैसे खिलाड़ियों ने संघर्ष के बाद जीत हासिल कर यह संकेत दे दिया कि इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम में हर मुकाबला आसान नहीं होने वाला।
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विंबलडन में वापसी फीकी पड़ी, पहले दौर में हारकर बाहर हुईं सेरेना विलियम्स
स्पोर्ट्स डेस्क
विंबलडन 2026 के पहले दौर में दुनिया की सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में शामिल सेरेना विलियम्स की वापसी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। लगभग चार साल बाद ग्रैंड स्लैम कोर्ट पर उतरीं 44 वर्षीय सेरेना को ऑस्ट्रेलिया की 20 वर्षीय खिलाड़ी माया जॉइंट ने तीन सेट तक चले मुकाबले में 6-3, 6-7, 6-3 से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। लंबे समय बाद कोर्ट पर लौटीं सेरेना ने दूसरे सेट में शानदार जुझारूपन दिखाया, लेकिन निर्णायक सेट में उनकी फिटनेस और मैच प्रैक्टिस की कमी साफ नजर आई। इसके बावजूद दर्शकों ने उनकी वापसी का जोरदार स्वागत किया और मुकाबले के दौरान पूरे समय उनका उत्साह बढ़ाते रहे। सेरेना विलियम्स ने वर्ष 2022 में मां बनने के बाद पेशेवर टेनिस से दूरी बना ली थी। इसके बाद यह उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट था, जिसमें उन्हें सिंगल्स और डबल्स दोनों वर्गों में वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली। पहले दौर के मुकाबले में शुरुआत से ही माया जॉइंट ने आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने पहले सेट में सेरेना की धीमी मूवमेंट और गलतियों का फायदा उठाते हुए आसानी से बढ़त बना ली। दूसरे सेट में मुकाबला पूरी तरह बदल गया। सेरेना ने अनुभव का शानदार प्रदर्शन किया और दो बार पिछड़ने के बावजूद मुकाबले को टाई-ब्रेकर तक पहुंचाया। टाई-ब्रेकर जीतने के बाद ऐसा लगा कि वह मैच में वापसी कर लेंगी, लेकिन तीसरे सेट में लगातार लंबे रैलियों के दौरान उनकी थकान साफ दिखाई दी। युवा माया ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और निर्णायक सेट अपने नाम करते हुए करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज कर ली।
हार के बाद सेरेना ने कहा कि विंबलडन में दोबारा खेलना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। उन्होंने माना कि उन्होंने इस तरह की वापसी की उम्मीद नहीं की थी, लेकिन यहां का माहौल हमेशा की तरह शानदार रहा। उन्होंने दर्शकों का समर्थन मिलने पर खुशी जताई और कहा कि इस अनुभव को वह लंबे समय तक याद रखेंगी। हालांकि सिंगल्स अभियान खत्म हो गया है, लेकिन उनका टूर्नामेंट अभी समाप्त नहीं हुआ है। अब वह महिला युगल वर्ग में अपनी बड़ी बहन वीनस विलियम्स के साथ कोर्ट पर उतरेंगी। दोनों बहनों की जोड़ी पहले भी कई ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुकी है और प्रशंसकों को एक बार फिर उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। महिला सिंगल्स में मौजूदा चैंपियन इगा स्वियातेक को भी पहले दौर में आसान जीत नहीं मिली। तीसरी वरीयता प्राप्त पोलैंड की खिलाड़ी को अमेरिका की टेलर टाउनसेंड के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। स्वियातेक ने पहला सेट आसानी से 6-1 से जीत लिया, लेकिन दूसरे सेट में उनका खेल पूरी तरह बिखर गया और टाउनसेंड ने मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। निर्णायक सेट की शुरुआत भी स्वियातेक के लिए अच्छी नहीं रही। उन्होंने पहले ही गेम में तीन डबल फॉल्ट किए, लेकिन कठिन परिस्थिति से बाहर निकलते हुए सभी महत्वपूर्ण ब्रेक प्वाइंट बचा लिए। लगभग दो घंटे तक चले मुकाबले में आखिरकार उन्होंने 6-3 से तीसरा सेट जीतकर अगले दौर में जगह बनाई। जीत के बाद वह काफी भावुक नजर आईं और कोर्ट पर ही तौलिए से चेहरा छिपाकर अपनी भावनाओं को संभालती दिखीं। यह दृश्य दर्शकों के लिए भी काफी भावुक रहा।
पुरुष सिंगल्स में बुल्गारिया के अनुभवी खिलाड़ी ग्रिगोर दिमित्रोव ने भी शानदार वापसी की कहानी लिखी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के डेन स्वीनी को सीधे सेटों में 7-6, 6-3, 7-5 से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश किया। पिछले साल इसी टूर्नामेंट में उन्हें गंभीर चोट के कारण मुकाबला बीच में छोड़ना पड़ा था। उस समय वह कोर्ट से बाहर जाते हुए भावुक हो गए थे। इस बार जीत के बाद दिमित्रोव ने मुस्कुराते हुए दर्शकों का अभिवादन किया, ऑटोग्राफ दिए और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। उनकी वापसी को लेकर टेनिस प्रेमियों ने भी खुशी जताई। टूर्नामेंट के दूसरे दिन मेजबान ब्रिटेन के खिलाड़ियों के लिए निराशाजनक तस्वीर देखने को मिली। विंबलडन के 38 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि पहले दौर में ही ब्रिटेन के 15 खिलाड़ी हारकर बाहर हो गए। इससे पहले 1988 में 16 ब्रिटिश खिलाड़ी शुरुआती दौर में बाहर हुए थे। हालांकि कुछ स्थानीय खिलाड़ियों ने जीत दर्ज कर घरेलू दर्शकों की उम्मीदें कायम रखीं। केटी स्वान ने रोमानिया की इरिना-कैमेलिया बेगु को सीधे सेटों में हराया, जबकि जैकब फर्नली ने दो सेट से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम किया। आर्थर फेरी और जान चोइंस्की ने भी जीत दर्ज कर अगले दौर में जगह बनाई। विंबलडन के शुरुआती मुकाबलों ने साफ कर दिया है कि इस बार अनुभव और युवा जोश के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। सेरेना विलियम्स की हार ने जहां उनके प्रशंसकों को निराश किया, वहीं माया जॉइंट जैसी युवा खिलाड़ी के लिए यह जीत करियर का सबसे बड़ा पड़ाव बन गई। दूसरी ओर इगा स्वियातेक और ग्रिगोर दिमित्रोव जैसे खिलाड़ियों ने संघर्ष के बाद जीत हासिल कर यह संकेत दे दिया कि इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम में हर मुकाबला आसान नहीं होने वाला।
