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AAP के संदीप पाठक समेत 7 सांसद BJP में शामिल, सियासत गरमाई
रायपुर (छ.ग.)
AAP से BJP में शामिल होने पर संदीप पाठक चर्चा में, छत्तीसगढ़ में संगठन पर असर की आशंका AAP के बड़े रणनीतिक चेहरे के पाला बदलते ही सियासी हलचल तेज हो गई है।इस फैसले का असर कई राज्यों की राजनीति पर पड़ता दिख रहा है।
देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां संदीप पाठक समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। शुक्रवार शाम दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इन नेताओं ने औपचारिक रूप से भाजपा मुख्यालय पहुंचकर पार्टी जॉइन की। इस घटनाक्रम ने खासतौर पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि संदीप पाठक को AAP का प्रमुख रणनीतिकार और संगठन का मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है।
बताया जा रहा है कि इस राजनीतिक बदलाव के साथ AAP के भीतर संगठनात्मक संतुलन पर असर पड़ सकता है। खासकर उन राज्यों में जहां पार्टी विस्तार की कोशिश कर रही थी। छत्तीसगढ़ में पाठक की सक्रिय भूमिका को देखते हुए उनके भाजपा में जाने को बड़ा झटका माना जा रहा है।
कौन-कौन शामिल
इस घटनाक्रम में राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने BJP जॉइन की। इनमें अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता जैसे नेता भी शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद सभी नेता भाजपा मुख्यालय पहुंचे और औपचारिक सदस्यता ली। इस दौरान पार्टी नेतृत्व ने उनका स्वागत किया और इसे भाजपा के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत बताया।
छत्तीसगढ़ कनेक्शन
संदीप पाठक का छत्तीसगढ़ से गहरा जुड़ाव रहा है। वे राज्य के प्रभारी रह चुके हैं और यहां संगठन खड़ा करने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। बताया जा रहा है कि उनके जाने से प्रदेश में AAP कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
AAP के कार्यकारी अध्यक्षों ने हालांकि दावा किया है कि पाठक पिछले दो वर्षों से राज्य में सक्रिय नहीं थे और उनके जाने से पार्टी को बड़ा नुकसान नहीं होगा। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP को भाजपा की ‘बी टीम’ करार दिया। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे भाजपा की नीतियों में बढ़ते भरोसे का संकेत बताया।
रणनीतिक भूमिका
AAP के भीतर संदीप पाठक की पहचान एक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर रही है। उन्होंने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। उम्मीदवार चयन, बूथ मैनेजमेंट और कैडर निर्माण में उनकी रणनीति को सफल माना गया।
पार्टी ने उन्हें गुजरात, गोवा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विस्तार की जिम्मेदारी भी दी थी। ऐसे में उनका जाना सिर्फ एक नेता का बदलाव नहीं, बल्कि संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।फिलहाल, AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को मजबूत बनाए रखना और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है।
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AAP के संदीप पाठक समेत 7 सांसद BJP में शामिल, सियासत गरमाई
रायपुर (छ.ग.)
देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां संदीप पाठक समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। शुक्रवार शाम दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इन नेताओं ने औपचारिक रूप से भाजपा मुख्यालय पहुंचकर पार्टी जॉइन की। इस घटनाक्रम ने खासतौर पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि संदीप पाठक को AAP का प्रमुख रणनीतिकार और संगठन का मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है।
बताया जा रहा है कि इस राजनीतिक बदलाव के साथ AAP के भीतर संगठनात्मक संतुलन पर असर पड़ सकता है। खासकर उन राज्यों में जहां पार्टी विस्तार की कोशिश कर रही थी। छत्तीसगढ़ में पाठक की सक्रिय भूमिका को देखते हुए उनके भाजपा में जाने को बड़ा झटका माना जा रहा है।
कौन-कौन शामिल
इस घटनाक्रम में राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने BJP जॉइन की। इनमें अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता जैसे नेता भी शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद सभी नेता भाजपा मुख्यालय पहुंचे और औपचारिक सदस्यता ली। इस दौरान पार्टी नेतृत्व ने उनका स्वागत किया और इसे भाजपा के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत बताया।
छत्तीसगढ़ कनेक्शन
संदीप पाठक का छत्तीसगढ़ से गहरा जुड़ाव रहा है। वे राज्य के प्रभारी रह चुके हैं और यहां संगठन खड़ा करने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। बताया जा रहा है कि उनके जाने से प्रदेश में AAP कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
AAP के कार्यकारी अध्यक्षों ने हालांकि दावा किया है कि पाठक पिछले दो वर्षों से राज्य में सक्रिय नहीं थे और उनके जाने से पार्टी को बड़ा नुकसान नहीं होगा। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP को भाजपा की ‘बी टीम’ करार दिया। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे भाजपा की नीतियों में बढ़ते भरोसे का संकेत बताया।
रणनीतिक भूमिका
AAP के भीतर संदीप पाठक की पहचान एक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर रही है। उन्होंने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। उम्मीदवार चयन, बूथ मैनेजमेंट और कैडर निर्माण में उनकी रणनीति को सफल माना गया।
पार्टी ने उन्हें गुजरात, गोवा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विस्तार की जिम्मेदारी भी दी थी। ऐसे में उनका जाना सिर्फ एक नेता का बदलाव नहीं, बल्कि संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।फिलहाल, AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को मजबूत बनाए रखना और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है।
