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22 साल पुराने रेलवे टिकट दलाली केस में आरोपी ने किया सरेंडर, दुबई से लौटकर कोर्ट में पेश हुआ
दुर्ग,(छ.ग.)
15 साल तक दुबई में ड्राइवरी करता रहा आरोपी, रेलवे कोर्ट ने सुनाई एक दिन की सजा और लगाया 5 हजार रुपए का जुर्माना
रेलवे टिकट दलाली के एक 22 साल पुराने मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी ने आखिरकार विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में आत्मसमर्पण कर दिया। आरोपी पिछले करीब 15 वर्षों से दुबई में रहकर ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की लगातार कोशिशों, परिवार से संपर्क और कानूनी प्रक्रिया समझाने के बाद वह भारत लौटा और अपने वकील के साथ अदालत में पेश हुआ। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को एक दिन की सजा सुनाई और उस पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार यह मामला वर्ष 2004 का है। उस समय रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत रेलवे टिकटों की अवैध दलाली करने के आरोप में तिजेंदर सिंह उर्फ टिंकू के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जांच और सुनवाई के दौरान आरोपी लगातार अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके बाद विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर ने 18 अप्रैल 2012 को उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट (पीएनबीडब्ल्यू) जारी कर दिया था।
वारंट जारी होने के बाद कई वर्षों तक आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला। आरपीएफ की टीम लगातार उसकी तलाश करती रही, लेकिन वह अपने पुराने पते पर नहीं मिला। इसके बाद अधिकारियों ने मामले की दोबारा समीक्षा की और आरोपी की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया। जांच के दौरान मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पता चला कि आरोपी कई वर्ष पहले पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला स्थित अपने पैतृक गांव चला गया था।
इसके बाद आरपीएफ की टीम पंजाब पहुंची और आरोपी के परिजनों से मुलाकात की। परिवार के सदस्यों ने बताया कि तिजेंदर सिंह पिछले करीब 15 वर्षों से दुबई में रहकर ड्राइवरी का काम कर रहा है और वहीं निवास कर रहा है। टीम ने परिवार को अदालत द्वारा जारी वारंट और नोटिस की प्रति सौंपी तथा आरोपी तक कानूनी जानकारी पहुंचाने का अनुरोध किया।
आरपीएफ ने केवल नोटिस भेजकर ही अपनी कार्रवाई समाप्त नहीं की, बल्कि लगातार आरोपी और उसके परिवार के संपर्क में भी रही। अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करना ही सबसे बेहतर विकल्प है। लंबे समय तक चली बातचीत और समझाइश के बाद आरोपी भारत लौटने के लिए तैयार हुआ।
24 जुलाई को तिजेंदर सिंह अपने अधिवक्ता के साथ विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में पेश हुआ। अदालत के सामने उसने स्वीकार किया कि वारंट और नोटिस में दर्ज नाम, पता और अन्य विवरण उसी के हैं। साथ ही उसने अपने खिलाफ दर्ज अपराध को भी स्वीकार कर लिया। आरोपी के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए उसे एक दिन की "टिल द राइजिंग ऑफ कोर्ट" (टीआरसी) की सजा सुनाई। इसके साथ ही 5 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। जुर्माना जमा करने के बाद आरोपी को नियमानुसार रिहा कर दिया गया।
रेलवे सुरक्षा बल का कहना है कि पुराने लंबित मामलों और फरार आरोपियों के खिलाफ लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के महानिरीक्षक सह प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर ऐसे सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है, जिनमें आरोपी लंबे समय से फरार हैं या अदालत द्वारा जारी वारंट लंबित हैं।
वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त रायपुर के मार्गदर्शन में आरपीएफ पोस्ट दुर्ग की टीम ने इस पुराने मामले की फाइल को फिर से खोला और आधुनिक सूचना तंत्र तथा स्थानीय नेटवर्क की मदद से आरोपी का पता लगाया। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से पुराने मामलों का भी तेजी से निपटारा होगा और कानून से बचने की कोशिश करने वाले आरोपियों तक पहुंच बनाना आसान होगा।
रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत रेलवे टिकटों की अवैध खरीद-फरोख्त और दलाली को दंडनीय अपराध माना गया है। रेलवे समय-समय पर टिकट दलालों के खिलाफ अभियान चलाता है ताकि यात्रियों को निष्पक्ष तरीके से टिकट उपलब्ध हो सकें और अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके। ऑनलाइन टिकटिंग व्यवस्था लागू होने के बाद भी रेलवे ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्षों तक विदेश में रहने के बावजूद लंबित कानूनी मामलों से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता। जांच एजेंसियों की सतत कार्रवाई, परिवार से संवाद और न्यायिक प्रक्रिया के पालन के चलते आरोपी को अंततः अदालत के समक्ष उपस्थित होना पड़ा। रेलवे सुरक्षा बल ने कहा है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी और लंबित वारंटों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
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22 साल पुराने रेलवे टिकट दलाली केस में आरोपी ने किया सरेंडर, दुबई से लौटकर कोर्ट में पेश हुआ
दुर्ग,(छ.ग.)
रेलवे टिकट दलाली के एक 22 साल पुराने मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी ने आखिरकार विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में आत्मसमर्पण कर दिया। आरोपी पिछले करीब 15 वर्षों से दुबई में रहकर ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की लगातार कोशिशों, परिवार से संपर्क और कानूनी प्रक्रिया समझाने के बाद वह भारत लौटा और अपने वकील के साथ अदालत में पेश हुआ। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को एक दिन की सजा सुनाई और उस पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार यह मामला वर्ष 2004 का है। उस समय रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत रेलवे टिकटों की अवैध दलाली करने के आरोप में तिजेंदर सिंह उर्फ टिंकू के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जांच और सुनवाई के दौरान आरोपी लगातार अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके बाद विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर ने 18 अप्रैल 2012 को उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट (पीएनबीडब्ल्यू) जारी कर दिया था।
वारंट जारी होने के बाद कई वर्षों तक आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला। आरपीएफ की टीम लगातार उसकी तलाश करती रही, लेकिन वह अपने पुराने पते पर नहीं मिला। इसके बाद अधिकारियों ने मामले की दोबारा समीक्षा की और आरोपी की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया। जांच के दौरान मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पता चला कि आरोपी कई वर्ष पहले पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला स्थित अपने पैतृक गांव चला गया था।
इसके बाद आरपीएफ की टीम पंजाब पहुंची और आरोपी के परिजनों से मुलाकात की। परिवार के सदस्यों ने बताया कि तिजेंदर सिंह पिछले करीब 15 वर्षों से दुबई में रहकर ड्राइवरी का काम कर रहा है और वहीं निवास कर रहा है। टीम ने परिवार को अदालत द्वारा जारी वारंट और नोटिस की प्रति सौंपी तथा आरोपी तक कानूनी जानकारी पहुंचाने का अनुरोध किया।
आरपीएफ ने केवल नोटिस भेजकर ही अपनी कार्रवाई समाप्त नहीं की, बल्कि लगातार आरोपी और उसके परिवार के संपर्क में भी रही। अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करना ही सबसे बेहतर विकल्प है। लंबे समय तक चली बातचीत और समझाइश के बाद आरोपी भारत लौटने के लिए तैयार हुआ।
24 जुलाई को तिजेंदर सिंह अपने अधिवक्ता के साथ विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में पेश हुआ। अदालत के सामने उसने स्वीकार किया कि वारंट और नोटिस में दर्ज नाम, पता और अन्य विवरण उसी के हैं। साथ ही उसने अपने खिलाफ दर्ज अपराध को भी स्वीकार कर लिया। आरोपी के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए उसे एक दिन की "टिल द राइजिंग ऑफ कोर्ट" (टीआरसी) की सजा सुनाई। इसके साथ ही 5 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। जुर्माना जमा करने के बाद आरोपी को नियमानुसार रिहा कर दिया गया।
रेलवे सुरक्षा बल का कहना है कि पुराने लंबित मामलों और फरार आरोपियों के खिलाफ लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के महानिरीक्षक सह प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर ऐसे सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है, जिनमें आरोपी लंबे समय से फरार हैं या अदालत द्वारा जारी वारंट लंबित हैं।
वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त रायपुर के मार्गदर्शन में आरपीएफ पोस्ट दुर्ग की टीम ने इस पुराने मामले की फाइल को फिर से खोला और आधुनिक सूचना तंत्र तथा स्थानीय नेटवर्क की मदद से आरोपी का पता लगाया। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से पुराने मामलों का भी तेजी से निपटारा होगा और कानून से बचने की कोशिश करने वाले आरोपियों तक पहुंच बनाना आसान होगा।
रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत रेलवे टिकटों की अवैध खरीद-फरोख्त और दलाली को दंडनीय अपराध माना गया है। रेलवे समय-समय पर टिकट दलालों के खिलाफ अभियान चलाता है ताकि यात्रियों को निष्पक्ष तरीके से टिकट उपलब्ध हो सकें और अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके। ऑनलाइन टिकटिंग व्यवस्था लागू होने के बाद भी रेलवे ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्षों तक विदेश में रहने के बावजूद लंबित कानूनी मामलों से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता। जांच एजेंसियों की सतत कार्रवाई, परिवार से संवाद और न्यायिक प्रक्रिया के पालन के चलते आरोपी को अंततः अदालत के समक्ष उपस्थित होना पड़ा। रेलवे सुरक्षा बल ने कहा है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी और लंबित वारंटों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
