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छत्तीसगढ़: चैतन्य बघेल 170 दिन बाद रिहा, जेल के बाहर जश्न
Digital Desk
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को रायपुर सेंट्रल जेल से लगभग 170 दिन बाद रिहा कर दिया गया। रिहाई के मौके पर कांग्रेस समर्थकों ने ढोल-नगाड़े बजाकर और आतिशबाजी करके खुशी मनाई। भूपेश बघेल खुद कार चलाकर जेल पहुंचे और अपने बेटे को रिसीव किया।
चैतन्य बघेल ने रिहाई के बाद कहा कि उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध और बदले की भावना से हुई थी। उनका यह भी आरोप है कि जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ मनगढ़ंत मामले बनाकर कार्रवाई की। इसी बीच, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी आरोप लगाया कि ED, IT और EOW का राजनीतिक उद्देश्य से दुरुपयोग किया गया। चैतन्य की रिहाई उनके जन्मदिन पर हुई, जबकि ED ने उन्हें उसी दिन गिरफ्तार कर उनके जश्न में खलल डालने की कोशिश की थी।

हाईकोर्ट ने चैतन्य को EOW में ₹2 लाख और ED में ₹1 लाख के मुचलके पर जमानत दी। इस बीच, शराब घोटाले की जांच एजेंसियों के अनुसार, यह घोटाला 2019–2022 के बीच हुआ, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। आरोप है कि चैतन्य ने लगभग ₹1,000 करोड़ का लेन-देन संभाला। घोटाला तीन प्रमुख हिस्सों में हुआ — डिस्टलरी संचालकों से कमीशन वसूलना, सरकारी दुकानों में नकली होलोग्राम वाली शराब की बिक्री, और डिस्टलरी सप्लाई ज़ोन बदलकर अवैध धन अर्जित करना।
हाईकोर्ट ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल की गिरफ्तारी न होने पर पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई। चैतन्य के वकील फैजल रिजवी ने बयान दिया कि उनके खिलाफ जबरन सबूत बनाकर गिरफ्तारी की गई। उन्होंने कहा कि चैतन्य ने जांच में पूरा सहयोग किया, लेकिन उनके अपराध का कोई प्रमाण नहीं है।

वर्तमान में ED और ACB की जांच जारी है। वित्तीय लेन-देन और घोटाले के अन्य पहलुओं की सतत जांच अगले महीनों में जारी रहने की संभावना है, जिससे पूरी घटनाक्रम की गहन पड़ताल हो सकेगी।
