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11 महीने बाद भिलाई आश्रम में मिली मां, बेटी रोते हुए बोली- उम्मीद खत्म हो गई थी
दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)
भागलपुर की महिला 11 महीने बाद भिलाई के आश्रम में मिली। बेटी पूजा मां से मिलते ही फूट-फूटकर रो पड़ी, वीडियो भी सामने आया।
भागलपुर, बिहार की रहने वाली पूजा की ज़िंदगी पिछले 11 महीनों से बस एक खोज में बदल गई थी। उनकी मां, बबीता देवी, अचानक लापता हो गई थीं, और परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि वह कहां गईं। अब, लगभग 11 महीने बाद, छत्तीसगढ़ के भिलाई के एक आश्रम में मां के मिलने की खबर आई, और पूजा खुद को रोक नहीं पाई। आश्रम पहुंचते ही मां-बेटी ने एक-दूसरे को गले लगाकर रोना शुरू कर दिया। वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। इस पूरे दृश्य का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पूजा अपनी मां को पकड़कर लगातार रोती नजर आ रही हैं। बताया गया है कि बबीता देवी 3 जून 2025 को अपने मायके जगतपुर बांका जाने के लिए घर से निकली थीं। उन्होंने परिवार को कहा था कि 10 दिन में लौटेंगी, लेकिन उसके बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला। शुरू में परिवार को लगा कि शायद वो किसी रिश्तेदार के पास रुक गई हैं, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उनकी चिंता बढ़ती गई। पूजा ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मंदिरों और वृद्धाश्रमों में मां को खोजा। उन्होंने पोस्टर लगवाए और पुलिस थानों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई खाता नहीं मिला।
पूजा ने बताया कि धीरे-धीरे परिवार की उम्मीदें कम होने लगीं। इसी दौरान, वह मथुरा और वृंदावन गईं, जहां संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में जाकर अपनी परेशानी बताई। पूजा का कहना है कि वहां उन्हें एक विशेष पाठ करने की सलाह दी गई, जिसे वह रोज लगभग ढाई से तीन घंटे तक करती थीं। उनका कहना है कि जब हर रास्ता बंद हो गया था, तब उन्होंने सिर्फ भगवान पर भरोसा रखा। कुछ दिन पहले अचानक बांका थाने से फोन आया कि उनकी मां छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित ‘फील परमार्थम’ आश्रम में हैं। यह सुनते ही पूजा रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि उस समय वह कोचिंग इंस्टिट्यूट में थीं, लेकिन बिना समय गंवाए नौकरी छोड़कर ट्रेन पकड़ ली। रिजर्वेशन नहीं मिलने पर जनरल डिब्बे में सफर कर भिलाई पहुंचीं। पूजा के मुताबिक, पूरे रास्ते एक ही डर था कि कहीं मां को फिर से न खो दें। जब वह आश्रम पहुंचीं और अपनी मां को देखा, तो विश्वास ही नहीं हुआ। वह लगातार मां का चेहरा देखती रहीं और रोते हुए कहती रहीं कि अब कहीं मत जाना।
शुरूआती जानकारी के अनुसार, बबीता देवी भिलाई के पास कचांदुर मोड़ इलाके में भटकती मिली थीं। इसके बाद ‘फील परमार्थम’ आश्रम के लोगों ने उन्हें अपने पास रखा और उनकी देखभाल की। आश्रम के लोगों ने बताया कि बबीता देवी अक्सर सिर्फ यही कहती थीं कि उन्हें घर जाना है, लेकिन उन्हें अपना पूरा पता याद नहीं था। बाद में बातचीत के दौरान उन्हें ‘जगतपुर बांका’ नाम याद आया। इसी जानकारी के आधार पर आश्रम ने पुलिस से संपर्क किया, और आखिरकार परिवार को सूचना मिल गई। पूजा ने आश्रम के लोगों का आभार जताया, कहा कि उन्होंने उनकी मां को सुरक्षित रखा, वरना शायद वह कभी नहीं मिल पातीं। पूजा ने बताया कि उनके पिता का अपहरण उनके जन्म से पहले हो गया था और तभी से उनका कोई सुराग नहीं मिला। मां ने ही उन्हें अकेले पाला और दोनों एक-दूसरे के लिए पूरी दुनिया थे। ऐसे में मां का अचानक गायब हो जाना उनके लिए एक बड़े सदमे जैसा था। फिलहाल, मां अब बेटी के साथ बिहार लौट चुकी हैं, और परिवार इसे भगवान का आशीर्वाद मान रहा है।
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11 महीने बाद भिलाई आश्रम में मिली मां, बेटी रोते हुए बोली- उम्मीद खत्म हो गई थी
दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)
भागलपुर, बिहार की रहने वाली पूजा की ज़िंदगी पिछले 11 महीनों से बस एक खोज में बदल गई थी। उनकी मां, बबीता देवी, अचानक लापता हो गई थीं, और परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि वह कहां गईं। अब, लगभग 11 महीने बाद, छत्तीसगढ़ के भिलाई के एक आश्रम में मां के मिलने की खबर आई, और पूजा खुद को रोक नहीं पाई। आश्रम पहुंचते ही मां-बेटी ने एक-दूसरे को गले लगाकर रोना शुरू कर दिया। वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। इस पूरे दृश्य का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पूजा अपनी मां को पकड़कर लगातार रोती नजर आ रही हैं। बताया गया है कि बबीता देवी 3 जून 2025 को अपने मायके जगतपुर बांका जाने के लिए घर से निकली थीं। उन्होंने परिवार को कहा था कि 10 दिन में लौटेंगी, लेकिन उसके बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला। शुरू में परिवार को लगा कि शायद वो किसी रिश्तेदार के पास रुक गई हैं, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उनकी चिंता बढ़ती गई। पूजा ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मंदिरों और वृद्धाश्रमों में मां को खोजा। उन्होंने पोस्टर लगवाए और पुलिस थानों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई खाता नहीं मिला।
पूजा ने बताया कि धीरे-धीरे परिवार की उम्मीदें कम होने लगीं। इसी दौरान, वह मथुरा और वृंदावन गईं, जहां संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में जाकर अपनी परेशानी बताई। पूजा का कहना है कि वहां उन्हें एक विशेष पाठ करने की सलाह दी गई, जिसे वह रोज लगभग ढाई से तीन घंटे तक करती थीं। उनका कहना है कि जब हर रास्ता बंद हो गया था, तब उन्होंने सिर्फ भगवान पर भरोसा रखा। कुछ दिन पहले अचानक बांका थाने से फोन आया कि उनकी मां छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित ‘फील परमार्थम’ आश्रम में हैं। यह सुनते ही पूजा रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि उस समय वह कोचिंग इंस्टिट्यूट में थीं, लेकिन बिना समय गंवाए नौकरी छोड़कर ट्रेन पकड़ ली। रिजर्वेशन नहीं मिलने पर जनरल डिब्बे में सफर कर भिलाई पहुंचीं। पूजा के मुताबिक, पूरे रास्ते एक ही डर था कि कहीं मां को फिर से न खो दें। जब वह आश्रम पहुंचीं और अपनी मां को देखा, तो विश्वास ही नहीं हुआ। वह लगातार मां का चेहरा देखती रहीं और रोते हुए कहती रहीं कि अब कहीं मत जाना।
शुरूआती जानकारी के अनुसार, बबीता देवी भिलाई के पास कचांदुर मोड़ इलाके में भटकती मिली थीं। इसके बाद ‘फील परमार्थम’ आश्रम के लोगों ने उन्हें अपने पास रखा और उनकी देखभाल की। आश्रम के लोगों ने बताया कि बबीता देवी अक्सर सिर्फ यही कहती थीं कि उन्हें घर जाना है, लेकिन उन्हें अपना पूरा पता याद नहीं था। बाद में बातचीत के दौरान उन्हें ‘जगतपुर बांका’ नाम याद आया। इसी जानकारी के आधार पर आश्रम ने पुलिस से संपर्क किया, और आखिरकार परिवार को सूचना मिल गई। पूजा ने आश्रम के लोगों का आभार जताया, कहा कि उन्होंने उनकी मां को सुरक्षित रखा, वरना शायद वह कभी नहीं मिल पातीं। पूजा ने बताया कि उनके पिता का अपहरण उनके जन्म से पहले हो गया था और तभी से उनका कोई सुराग नहीं मिला। मां ने ही उन्हें अकेले पाला और दोनों एक-दूसरे के लिए पूरी दुनिया थे। ऐसे में मां का अचानक गायब हो जाना उनके लिए एक बड़े सदमे जैसा था। फिलहाल, मां अब बेटी के साथ बिहार लौट चुकी हैं, और परिवार इसे भगवान का आशीर्वाद मान रहा है।
