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पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा में बड़ा कदम, दोनों देशों के बीच हुए सेमीकंडक्टर-ग्रीन एनर्जी समेत 17 बड़े समझौते
नेशनल डेस्क
पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा में 17 बड़े समझौते हुए। सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, शिक्षा और निवेश सहयोग से भारत-नीदरलैंड रिश्तों को नई मजबूती मिली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 से 17 मई 2026 तक की नीदरलैंड यात्रा ने भारत और नीदरलैंड के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया। हेग में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच व्यापक चर्चा हुई, जिसके नतीजे में दोनों देशों ने 17 महत्वपूर्ण समझौतों और साझेदारियों पर सहमति जताई। बातचीत से यह स्पष्ट हुआ कि अब दोनों देश अपने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जिसमें तकनीक, निवेश, शिक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। यह दौरा काफी खास है, क्योंकि लंबे समय से दोनों देशों के बीच सहयोग तो था, लेकिन इस बार इसका दायरा और गहराई दोनों बढ़ी हैं। हेग में हुई बैठकों के बाद यह साफ दिखा कि आने वाले समय में सहयोग मात्र कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर वास्तविकता में भी नजर आएगा।
यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान सेमीकंडक्टर सेक्टर में हुए समझौते पर था, जहाँ गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब को लेकर Tata Electronics और वैश्विक कंपनी ASML के बीच MoU पर सहमति बनी। इसे भारत की चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा, ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए विशेष रोडमैप और जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने पर चर्चा हुई। क्रिटिकल मिनरल्स, जल प्रबंधन और गुजरात के महत्वाकांक्षी काल्पसर प्रोजेक्ट पर भी तकनीकी सहयोग के समझौते किए गए हैं। वहीं Mobility and Migration समझौते के जरिए छात्रों, पेशेवरों और कुशल कार्यकर्ताओं की आवाजाही को सुगम बनाने पर सहमति बनी है। सांस्कृतिक स्तर पर, ऐतिहासिक चोल ताम्रपत्र भारत को लौटाने पर भी नीदरलैंड ने अपनी सहमति जताई, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जैसे कि Nalanda University और University of Groningen के बीच अकादमिक सहयोग, Leiden University Libraries और Archaeological Survey of India के बीच साझेदारी, और उच्च शिक्षा से जुड़ी कई MoU शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, Indian Council of Medical Research और नीदरलैंड के RIVM के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा दी गई है। सीमा शुल्क सहयोग को मजबूत करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है।
इन सभी समझौतों के साथ, दोनों देशों ने 2026 से 2030 के लिए ‘India–Netherlands Strategic Partnership Roadmap’ या ‘विजन 2030’ को भी पेश किया है। इस रोडमैप में स्पष्ट किया गया है कि आने वाले समय में ध्यान केवल पारंपरिक व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, नई तकनीक, साइबर सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक रणनीति और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा। नीति आयोग और नीदरलैंड सरकार के बीच ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं को लेकर भी एक संयुक्त सहमति बनी है। कृषि, डेयरी और हेल्थ सेक्टर में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस योजनाएँ बनाई गई हैं। कुल मिलाकर, ये समझौते भारत और नीदरलैंड के रिश्तों को एक नई तकनीकी और रणनीतिक दिशा देने के प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं, जहाँ विकास, रोजगार और वैश्विक सप्लाई चेन में दोनों देशों की भूमिका को और मजबूत करने की आशा है।
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पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा में बड़ा कदम, दोनों देशों के बीच हुए सेमीकंडक्टर-ग्रीन एनर्जी समेत 17 बड़े समझौते
नेशनल डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 से 17 मई 2026 तक की नीदरलैंड यात्रा ने भारत और नीदरलैंड के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया। हेग में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच व्यापक चर्चा हुई, जिसके नतीजे में दोनों देशों ने 17 महत्वपूर्ण समझौतों और साझेदारियों पर सहमति जताई। बातचीत से यह स्पष्ट हुआ कि अब दोनों देश अपने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जिसमें तकनीक, निवेश, शिक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। यह दौरा काफी खास है, क्योंकि लंबे समय से दोनों देशों के बीच सहयोग तो था, लेकिन इस बार इसका दायरा और गहराई दोनों बढ़ी हैं। हेग में हुई बैठकों के बाद यह साफ दिखा कि आने वाले समय में सहयोग मात्र कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर वास्तविकता में भी नजर आएगा।
यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान सेमीकंडक्टर सेक्टर में हुए समझौते पर था, जहाँ गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब को लेकर Tata Electronics और वैश्विक कंपनी ASML के बीच MoU पर सहमति बनी। इसे भारत की चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा, ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए विशेष रोडमैप और जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने पर चर्चा हुई। क्रिटिकल मिनरल्स, जल प्रबंधन और गुजरात के महत्वाकांक्षी काल्पसर प्रोजेक्ट पर भी तकनीकी सहयोग के समझौते किए गए हैं। वहीं Mobility and Migration समझौते के जरिए छात्रों, पेशेवरों और कुशल कार्यकर्ताओं की आवाजाही को सुगम बनाने पर सहमति बनी है। सांस्कृतिक स्तर पर, ऐतिहासिक चोल ताम्रपत्र भारत को लौटाने पर भी नीदरलैंड ने अपनी सहमति जताई, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जैसे कि Nalanda University और University of Groningen के बीच अकादमिक सहयोग, Leiden University Libraries और Archaeological Survey of India के बीच साझेदारी, और उच्च शिक्षा से जुड़ी कई MoU शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, Indian Council of Medical Research और नीदरलैंड के RIVM के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा दी गई है। सीमा शुल्क सहयोग को मजबूत करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है।
इन सभी समझौतों के साथ, दोनों देशों ने 2026 से 2030 के लिए ‘India–Netherlands Strategic Partnership Roadmap’ या ‘विजन 2030’ को भी पेश किया है। इस रोडमैप में स्पष्ट किया गया है कि आने वाले समय में ध्यान केवल पारंपरिक व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, नई तकनीक, साइबर सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक रणनीति और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा। नीति आयोग और नीदरलैंड सरकार के बीच ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं को लेकर भी एक संयुक्त सहमति बनी है। कृषि, डेयरी और हेल्थ सेक्टर में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस योजनाएँ बनाई गई हैं। कुल मिलाकर, ये समझौते भारत और नीदरलैंड के रिश्तों को एक नई तकनीकी और रणनीतिक दिशा देने के प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं, जहाँ विकास, रोजगार और वैश्विक सप्लाई चेन में दोनों देशों की भूमिका को और मजबूत करने की आशा है।
