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रेल बजट ब्रीफिंग में लापरवाही उजागर: मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान झपकी लेते दिखे वरिष्ठ अधिकारी
बिलासपुर (छ.ग.)
बिलासपुर जोन को बजट में 545 करोड़ की बढ़ोतरी, लेकिन नई रेल परियोजना को नहीं मिली मंजूरी
रेल बजट 2026–27 को लेकर आयोजित केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिलासपुर जोनल मुख्यालय से सामने आई एक तस्वीर ने प्रशासनिक गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जोन के दो वरिष्ठ अधिकारी—प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (PCCM) जेएस बिंद्रा और प्रमुख मुख्य अभियंता मुरीत भटनागर—नींद में झपकी लेते हुए कैमरे में कैद हो गए। यह घटना उस समय हुई, जब रेल मंत्री राज्य में चल रही परियोजनाओं और बजटीय प्रावधानों की जानकारी साझा कर रहे थे।
इस वर्चुअल कार्यक्रम में बिलासपुर जोन के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, डीआरएम राकेश रंजन सहित एक दर्जन से अधिक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। रेल मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बताया कि छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विस्तार के लिए इस वर्ष 7,470 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले बजट की तुलना में 545 करोड़ रुपये अधिक है। दावा किया गया कि यह राशि कांग्रेस शासन काल के औसत बजट से लगभग 24 गुना अधिक है।
हालांकि बजटीय आवंटन में वृद्धि के बावजूद इस वर्ष छत्तीसगढ़ या बिलासपुर जोन को कोई भी नई रेल परियोजना स्वीकृत नहीं की गई है। यह तथ्य स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य में लगभग 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं विभिन्न चरणों में चल रही हैं, जिनके पूर्ण होने पर यात्री और माल परिवहन दोनों में उल्लेखनीय सुधार होगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रेल मंत्री ने रावघाट परियोजना, परमालकसा–खरसिया रेल कॉरिडोर और अन्य महत्वपूर्ण लाइन विस्तार कार्यों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने से बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और ट्रेनों की संख्या मौजूदा स्तर से लगभग दोगुनी हो जाएगी। इसका लाभ ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगा।
रेल मंत्रालय के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में छत्तीसगढ़ के लिए रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां औसत वार्षिक आवंटन 311 करोड़ रुपये था, वहीं 2026–27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस राशि का उपयोग नई लाइन, डबलिंग-ट्रिपलिंग, स्टेशन पुनर्विकास, रेल सुरक्षा और ग्रेड सेपरेशन कार्यों में किया जा रहा है।
राज्य में अमृत स्टेशन योजना के तहत 32 स्टेशनों के पुनर्विकास को मंजूरी दी गई है, जिन पर 1,674 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इनमें डोंगरगढ़ (प्रथम चरण), अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा स्टेशनों का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अन्य पर निर्माण जारी है।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में प्रीमियम रेल सेवाओं का भी विस्तार किया गया है। वर्तमान में दो जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस और एक जोड़ी अमृत भारत एक्सप्रेस का संचालन हो रहा है, जिससे प्रमुख शहरों की राष्ट्रीय स्तर पर कनेक्टिविटी बेहतर हुई है।
हालांकि, बजट प्रस्तुति जैसे अहम अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों का इस तरह असावधान नजर आना प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही को लेकर कई सवाल छोड़ गया है।
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