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बरगी बांध नहर हादसा: भाजपा विधायक ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल
जबलपुर(म.प्र.)
नहर टूटने से किसानों की फसलें बर्बाद, अजय विश्नोई बोले—मुख्यमंत्री को कई बार बताया, सुधार नहीं हुआ
जबलपुर।जबलपुर जिले में बरगी बांध की दाईं तट नहर टूटने की घटना ने न सिर्फ दर्जनभर गांवों में अफरा-तफरी मचाई, बल्कि राज्य सरकार की सिंचाई व्यवस्था और रखरखाव पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार दोपहर करीब 12 बजे पाटन क्षेत्र के सगड़ा–झपनी गांव के पास नहर टूटने से आसपास के छह गांवों के खेतों में तेज बहाव से पानी भर गया। खड़ी फसलें डूब गईं और खेत कुछ ही घंटों में तालाब में तब्दील हो गए।
घटना के बाद पाटन से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सोशल मीडिया के जरिए नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि बरगी बांध की दोनों नहरें—दाईं तट और बाईं तट—लंबे समय से जर्जर हालत में हैं और इस बारे में वे कई बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
क्षमता से कम पानी में भी जवाब दे रही नहर
अजय विश्नोई ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि बाईं तट नहर में क्षमता से आधे से भी कम पानी प्रवाहित किया जा रहा है, फिर भी उसकी हालत बेहद खराब है। वहीं दाईं तट नहर, जिससे कटनी, सतना और रीवा तक पानी पहुंचाने की योजना है, 227 क्यूसेक पानी वहन करने के लिए डिज़ाइन की गई है, लेकिन वास्तविकता यह है कि वह 80 क्यूसेक का दबाव भी सहन नहीं कर पा रही। रविवार को नहर टूटने की घटना ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया।
उन्होंने कहा कि जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, सतना और रीवा जिलों के लाखों किसान इस नहर प्रणाली पर निर्भर हैं। मजबूरी में उन्हें यह मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाना पड़ा।
भोपाल से पहुंची जांच टीम, सवालों से दूरी
मामले के तूल पकड़ने के बाद जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम भोपाल से मौके पर पहुंची। वरिष्ठ इंजीनियर पुष्पेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने सगड़ा–झपनी क्षेत्र में टूटे नहर हिस्से का निरीक्षण किया। हालांकि, निरीक्षण के दौरान टीम के अधिकारी मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। न तो सीपेज की पुरानी शिकायतों पर स्पष्ट जवाब दिया गया और न ही मेंटेनेंस फंड के उपयोग को लेकर कोई जानकारी दी गई। अधिकारियों ने केवल जांच रिपोर्ट तैयार करने की बात कही।
प्रशासन का दावा—मरम्मत शुरू, स्थायी समाधान की तैयारी
जिला प्रशासन के अनुसार, नहर की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। कलेक्टर ने बताया कि नहर का अधिकांश पानी निकाल दिया गया है और फिलहाल वाटर लॉगिंग की स्थिति नहीं है। प्रारंभिक मरम्मत कार्य 10 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि अन्य क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था बहाल होने में एक से डेढ़ महीने का समय लग सकता है।
प्रशासन का कहना है कि पुरानी नहरों के सुधार के लिए विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जांच में यदि किसी अधिकारी या एजेंसी की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
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