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कोरबा के कृषि महाविद्यालय में डामर फैक्ट्री का प्रदूषण बना छात्रों के स्वास्थ्य पर खतरा
कोरबा (छ.ग.)
धुएं और धूल से बिगड़ी हॉस्टल की हवा, एबीवीपी ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की
कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र स्थित कृषि महाविद्यालय परिसर में संचालित डामर फैक्ट्री से फैल रहे प्रदूषण ने छात्रों की सेहत और पढ़ाई दोनों पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। कॉलेज के सामने चल रही इस फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं, धूल और रासायनिक कण सीधे शैक्षणिक परिसर और छात्रावासों तक पहुंच रहे हैं। बढ़ती समस्या को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने पोड़ी-उपरोड़ा के अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि फैक्ट्री से लगातार उठने वाला धुआं बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल के कमरों तक भर जाता है। इसके कारण सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, सिरदर्द और लगातार खांसी जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। कई विद्यार्थियों को रात के समय नींद लेने में परेशानी हो रही है, जिससे उनकी दिनचर्या और मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
महाविद्यालय परिसर में पढ़ाई का माहौल भी तेजी से खराब हुआ है। विद्यार्थियों के अनुसार, 20 जनवरी से शुरू हो रही प्रायोगिक परीक्षाओं की तैयारी इस प्रदूषित वातावरण में करना बेहद कठिन हो गया है। खुले स्थानों पर बैठकर पढ़ना लगभग असंभव हो चुका है, जबकि बंद कमरों में भी हवा दूषित बनी रहती है। छात्रों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे, तो परीक्षा परिणामों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
एबीवीपी ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि डामर फैक्ट्री पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं कर रही है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि फैक्ट्री की तत्काल जांच कराई जाए, प्रदूषण नियंत्रण नियमों के अनुपालन की समीक्षा हो और आवश्यकता पड़ने पर फैक्ट्री संचालन पर रोक लगाई जाए। परिषद का कहना है कि यह समस्या केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकती है।
एबीवीपी के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। संगठन का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास इस तरह की औद्योगिक गतिविधियां नियमों के खिलाफ हैं और छात्रों के भविष्य से सीधा खिलवाड़ हैं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अमरजीत सिंह राजपूत, जिला संगठन मंत्री प्रदीप साहू, नगर स्टडी सर्कल प्रमुख सुमित साहू सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
फिलहाल छात्र प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन तेज करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
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कोरबा के कृषि महाविद्यालय में डामर फैक्ट्री का प्रदूषण बना छात्रों के स्वास्थ्य पर खतरा
कोरबा (छ.ग.)
कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र स्थित कृषि महाविद्यालय परिसर में संचालित डामर फैक्ट्री से फैल रहे प्रदूषण ने छात्रों की सेहत और पढ़ाई दोनों पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। कॉलेज के सामने चल रही इस फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं, धूल और रासायनिक कण सीधे शैक्षणिक परिसर और छात्रावासों तक पहुंच रहे हैं। बढ़ती समस्या को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने पोड़ी-उपरोड़ा के अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि फैक्ट्री से लगातार उठने वाला धुआं बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल के कमरों तक भर जाता है। इसके कारण सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, सिरदर्द और लगातार खांसी जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। कई विद्यार्थियों को रात के समय नींद लेने में परेशानी हो रही है, जिससे उनकी दिनचर्या और मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
महाविद्यालय परिसर में पढ़ाई का माहौल भी तेजी से खराब हुआ है। विद्यार्थियों के अनुसार, 20 जनवरी से शुरू हो रही प्रायोगिक परीक्षाओं की तैयारी इस प्रदूषित वातावरण में करना बेहद कठिन हो गया है। खुले स्थानों पर बैठकर पढ़ना लगभग असंभव हो चुका है, जबकि बंद कमरों में भी हवा दूषित बनी रहती है। छात्रों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे, तो परीक्षा परिणामों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
एबीवीपी ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि डामर फैक्ट्री पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं कर रही है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि फैक्ट्री की तत्काल जांच कराई जाए, प्रदूषण नियंत्रण नियमों के अनुपालन की समीक्षा हो और आवश्यकता पड़ने पर फैक्ट्री संचालन पर रोक लगाई जाए। परिषद का कहना है कि यह समस्या केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकती है।
एबीवीपी के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। संगठन का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास इस तरह की औद्योगिक गतिविधियां नियमों के खिलाफ हैं और छात्रों के भविष्य से सीधा खिलवाड़ हैं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अमरजीत सिंह राजपूत, जिला संगठन मंत्री प्रदीप साहू, नगर स्टडी सर्कल प्रमुख सुमित साहू सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
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