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भ्रष्टाचार से लेकर नक्सल तक, भूपेश के आरोपों से सियासत गरम
बिलासपुर (छ.ग.)
पूर्व मुख्यमंत्री बोले—मंत्रियों को छोड़नी चाहिए Z+ सुरक्षा, बस्तर से कैंप हटें तभी नक्सलवाद खत्म माना जाएगा; कृषि विभाग पर भी गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को बिलासपुर में प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। वे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के भाई के निधन पर आयोजित शोक सभा में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद, भ्रष्टाचार, कृषि नीति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
बघेल ने कहा कि राज्य में ऐसा कोई विभाग नहीं बचा है, जहां भ्रष्टाचार न हो रहा हो। उन्होंने पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन और कृषि विभाग का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि कई जगह टेंडर प्रक्रिया से पहले ही काम के आदेश जारी कर दिए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी व्यक्ति जांच की मांग करता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
कृषि विभाग को लेकर दिए गए बयान में उन्होंने दावा किया कि विभाग की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और अफीम तथा गांजे की खेती को बढ़ावा देने जैसी चिंताजनक स्थिति बन रही है। हालांकि उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया।
नक्सलवाद के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर वास्तव में नक्सलवाद खत्म हो चुका है, तो बस्तर से सुरक्षा कैंप हटाए जाएं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इसी तरह मंत्रियों और विधायकों को अपनी Z+ सुरक्षा भी छोड़ देनी चाहिए, तभी सरकार के दावों पर भरोसा किया जा सकता है।
धर्मांतरण कानून को लेकर भी बघेल ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले भी इस मुद्दे पर कार्रवाई की जाती रही है और वर्तमान संशोधनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और सवाल पूछने पर कार्रवाई की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और सवाल उठाना अपराध नहीं माना जाना चाहिए।
बघेल ने यह भी कहा कि प्रदेश में पेयजल संकट गहराता जा रहा है, जबकि दूसरी ओर शराब की उपलब्धता को लेकर स्थिति चिंताजनक है। उनके अनुसार, जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने असम चुनाव और बढ़ते मतदान प्रतिशत को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की।भूपेश बघेल के इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। सत्तापक्ष की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का मौका मान रहा है।
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भ्रष्टाचार से लेकर नक्सल तक, भूपेश के आरोपों से सियासत गरम
बिलासपुर (छ.ग.)
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को बिलासपुर में प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। वे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के भाई के निधन पर आयोजित शोक सभा में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद, भ्रष्टाचार, कृषि नीति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
बघेल ने कहा कि राज्य में ऐसा कोई विभाग नहीं बचा है, जहां भ्रष्टाचार न हो रहा हो। उन्होंने पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन और कृषि विभाग का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि कई जगह टेंडर प्रक्रिया से पहले ही काम के आदेश जारी कर दिए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी व्यक्ति जांच की मांग करता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
कृषि विभाग को लेकर दिए गए बयान में उन्होंने दावा किया कि विभाग की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और अफीम तथा गांजे की खेती को बढ़ावा देने जैसी चिंताजनक स्थिति बन रही है। हालांकि उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया।
नक्सलवाद के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर वास्तव में नक्सलवाद खत्म हो चुका है, तो बस्तर से सुरक्षा कैंप हटाए जाएं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इसी तरह मंत्रियों और विधायकों को अपनी Z+ सुरक्षा भी छोड़ देनी चाहिए, तभी सरकार के दावों पर भरोसा किया जा सकता है।
धर्मांतरण कानून को लेकर भी बघेल ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले भी इस मुद्दे पर कार्रवाई की जाती रही है और वर्तमान संशोधनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और सवाल पूछने पर कार्रवाई की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और सवाल उठाना अपराध नहीं माना जाना चाहिए।
बघेल ने यह भी कहा कि प्रदेश में पेयजल संकट गहराता जा रहा है, जबकि दूसरी ओर शराब की उपलब्धता को लेकर स्थिति चिंताजनक है। उनके अनुसार, जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने असम चुनाव और बढ़ते मतदान प्रतिशत को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की।भूपेश बघेल के इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। सत्तापक्ष की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का मौका मान रहा है।
