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लोकसभा में गरजे अमित शाह, बोले - बस्तर में खत्म हुआ लाल आतंक, 3 साल में 706 नक्सली ढेर, 4800 ने किया सरेंडर
रायपुर (छ.ग.)
लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि भारत अब लगभग नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि बस्तर समेत कई इलाकों में विकास बढ़ा है, 706 नक्सली मारे गए और 4800 से ज्यादा ने सरेंडर किया।
लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सरकार की ओर से एक बड़ा दावा पेश किया। उन्होंने कहा कि देश अब लगभग नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है और 31 मार्च 2026 तक तय लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अपने विस्तृत संबोधन में उन्होंने न केवल उपलब्धियां गिनाईं, बल्कि विपक्ष और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की पूर्व सरकार पर भी तीखा हमला बोला।
बस्तर में विकास और सुरक्षा का नया दौर
गृह मंत्री ने कहा कि कभी नक्सलवाद का गढ़ माने जाने वाले बस्तर क्षेत्र में अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि वहां गांव-गांव में स्कूल खोले गए हैं, राशन की दुकानों की पहुंच सुनिश्चित की गई है और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया है। आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसी योजनाओं के जरिए लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा गया है। उनके मुताबिक अब क्षेत्र में विकास का माहौल है और भय का माहौल काफी हद तक समाप्त हो गया है।
नक्सलवाद के समर्थकों पर सवाल
अपने भाषण में अमित शाह ने उन लोगों पर भी सवाल उठाए, जो नक्सलवाद के पक्ष में बोलते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों में विकास नहीं पहुंचने का बड़ा कारण नक्सल हिंसा ही रही है। उनका मानना है कि अब जब हालात सुधर रहे हैं, तो यह स्पष्ट हो रहा है कि नक्सलवाद ने क्षेत्र को पीछे धकेलने का काम किया।
कांग्रेस पर आरोप और इतिहास का जिक्र
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी ने इस समस्या का समाधान नहीं किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) और मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सलवाद उसी दौरान फैलकर कई राज्यों तक पहुंचा। शाह ने यह भी कहा कि खुद मनमोहन सिंह ने माओवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया था।
राष्ट्रीय सुरक्षा और हालिया बदलाव
शाह ने अपने संबोधन में पिछले कुछ वर्षों में हुए बड़े फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कई ठोस कदम उठाए गए, जिनमें Article 370 और Article 35A को हटाना शामिल है। उनके अनुसार इन फैसलों से देश की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हुई है।
भगत सिंह और बिरसा मुंडा से तुलना पर आपत्ति
गृह मंत्री ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि कुछ लोग नक्सलियों की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से करते हैं। उन्होंने कहा कि भगत सिंह (Bhagat Singh) और बिरसा मुंडा (Birsa Munda) जैसे महानायकों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया, जबकि नक्सली हिंसा और संविधान विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। उन्होंने इस तुलना को अनुचित और अस्वीकार्य बताया।
अर्बन नक्सल और मानवता पर सवाल
अमित शाह ने ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कुछ लोग केवल हथियार उठाने वालों के प्रति सहानुभूति दिखाते हैं, जबकि आम नागरिकों की पीड़ा को नजरअंदाज करते हैं। उन्होंने कहा कि मानवता का दायरा सभी के लिए समान होना चाहिए, न कि केवल हिंसा करने वालों के लिए।
तीन वर्षों का आंकड़ा और उपलब्धियां
गृह मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 706 नक्सली मारे गए हैं और 4800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाया है। उनके अनुसार अब देश में केवल दो जिले ही नक्सल प्रभावित बचे हैं। उन्होंने इसे सुरक्षा बलों और सरकार की रणनीति की बड़ी सफलता बताया।
डेडलाइन और लक्ष्य की प्राप्ति
शाह ने कहा कि सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा था और अब यह लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश में नक्सल हिंसा में भारी कमी आई है और अधिकांश क्षेत्रों में इसका प्रभाव खत्म हो गया है।
भूपेश बघेल पर सीधा हमला
अपने भाषण के दौरान शाह ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश भघेल (Bhupesh Baghel) पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई बरती। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो वे इसके प्रमाण भी दे सकते हैं। इस बयान पर सदन में काफी हंगामा भी देखने को मिला।
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लोकसभा में गरजे अमित शाह, बोले - बस्तर में खत्म हुआ लाल आतंक, 3 साल में 706 नक्सली ढेर, 4800 ने किया सरेंडर
रायपुर (छ.ग.)
लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सरकार की ओर से एक बड़ा दावा पेश किया। उन्होंने कहा कि देश अब लगभग नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है और 31 मार्च 2026 तक तय लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अपने विस्तृत संबोधन में उन्होंने न केवल उपलब्धियां गिनाईं, बल्कि विपक्ष और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की पूर्व सरकार पर भी तीखा हमला बोला।
बस्तर में विकास और सुरक्षा का नया दौर
गृह मंत्री ने कहा कि कभी नक्सलवाद का गढ़ माने जाने वाले बस्तर क्षेत्र में अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि वहां गांव-गांव में स्कूल खोले गए हैं, राशन की दुकानों की पहुंच सुनिश्चित की गई है और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया है। आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसी योजनाओं के जरिए लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा गया है। उनके मुताबिक अब क्षेत्र में विकास का माहौल है और भय का माहौल काफी हद तक समाप्त हो गया है।
नक्सलवाद के समर्थकों पर सवाल
अपने भाषण में अमित शाह ने उन लोगों पर भी सवाल उठाए, जो नक्सलवाद के पक्ष में बोलते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों में विकास नहीं पहुंचने का बड़ा कारण नक्सल हिंसा ही रही है। उनका मानना है कि अब जब हालात सुधर रहे हैं, तो यह स्पष्ट हो रहा है कि नक्सलवाद ने क्षेत्र को पीछे धकेलने का काम किया।
कांग्रेस पर आरोप और इतिहास का जिक्र
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी ने इस समस्या का समाधान नहीं किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) और मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सलवाद उसी दौरान फैलकर कई राज्यों तक पहुंचा। शाह ने यह भी कहा कि खुद मनमोहन सिंह ने माओवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया था।
राष्ट्रीय सुरक्षा और हालिया बदलाव
शाह ने अपने संबोधन में पिछले कुछ वर्षों में हुए बड़े फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कई ठोस कदम उठाए गए, जिनमें Article 370 और Article 35A को हटाना शामिल है। उनके अनुसार इन फैसलों से देश की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हुई है।
भगत सिंह और बिरसा मुंडा से तुलना पर आपत्ति
गृह मंत्री ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि कुछ लोग नक्सलियों की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से करते हैं। उन्होंने कहा कि भगत सिंह (Bhagat Singh) और बिरसा मुंडा (Birsa Munda) जैसे महानायकों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया, जबकि नक्सली हिंसा और संविधान विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। उन्होंने इस तुलना को अनुचित और अस्वीकार्य बताया।
अर्बन नक्सल और मानवता पर सवाल
अमित शाह ने ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कुछ लोग केवल हथियार उठाने वालों के प्रति सहानुभूति दिखाते हैं, जबकि आम नागरिकों की पीड़ा को नजरअंदाज करते हैं। उन्होंने कहा कि मानवता का दायरा सभी के लिए समान होना चाहिए, न कि केवल हिंसा करने वालों के लिए।
तीन वर्षों का आंकड़ा और उपलब्धियां
गृह मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 706 नक्सली मारे गए हैं और 4800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाया है। उनके अनुसार अब देश में केवल दो जिले ही नक्सल प्रभावित बचे हैं। उन्होंने इसे सुरक्षा बलों और सरकार की रणनीति की बड़ी सफलता बताया।
डेडलाइन और लक्ष्य की प्राप्ति
शाह ने कहा कि सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा था और अब यह लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश में नक्सल हिंसा में भारी कमी आई है और अधिकांश क्षेत्रों में इसका प्रभाव खत्म हो गया है।
भूपेश बघेल पर सीधा हमला
अपने भाषण के दौरान शाह ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश भघेल (Bhupesh Baghel) पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई बरती। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो वे इसके प्रमाण भी दे सकते हैं। इस बयान पर सदन में काफी हंगामा भी देखने को मिला।
