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रायपुर में ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 14.37 लाख की धोखाधड़ी, तीन कर्मचारियों पर गबन का आरोप
रायपुर,(छ.ग.)
कबीर नगर स्थित दुकान में बिक्री की रकम जमा न कर कर्मचारियों पर लाखों रुपए हड़पने का आरोप, पुलिस ने केस दर्ज कर स्टॉक, बिल और लेनदेन की जांच शुरू की।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऑटो पार्ट्स कारोबारी के साथ लाखों रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कबीर नगर क्षेत्र में स्थित एक ऑटो पार्ट्स दुकान के तीन कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने ग्राहकों को सामान बेचने के बाद बिक्री से प्राप्त रकम दुकान के खाते में जमा नहीं की और उसे अपने पास रख लिया। कारोबारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में करीब 14 लाख 37 हजार 226 रुपए के गबन की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता मोहम्मद अनवर रायपुर के फेस-1, कबीर नगर क्षेत्र के निवासी हैं और वे इंडियन मोटर्स ऑटो पार्ट्स नाम से व्यवसाय संचालित करते हैं। उनकी दुकान पर कई कर्मचारी बिक्री और ग्राहकों से लेनदेन का कार्य संभालते थे। आरोप है कि दुकान में कार्यरत मोहम्मद फाजिल, सर्वर खान और कायनात ने लंबे समय तक सुनियोजित तरीके से बिक्री की रकम दुकान के खाते में जमा नहीं की और आर्थिक गड़बड़ी को छिपाते रहे।
शिकायत के मुताबिक, यह कथित धोखाधड़ी 11 मार्च 2025 से 5 नवंबर 2025 के बीच की गई। इस दौरान आरोपियों ने कई ग्राहकों को ऑटो पार्ट्स बेचे, लेकिन बिक्री से मिली राशि दुकान के कैश या बैंक खाते में जमा नहीं कराई। जब कारोबारी ने नियमित रूप से स्टॉक और नकदी का मिलान कराया तो बिक्री और जमा रकम के बीच बड़ा अंतर सामने आया। इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की गई, जिसमें लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितता का पता चला।
कारोबारी का कहना है कि दुकान में सभी बिक्री का रिकॉर्ड बिलों और स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। जब रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो कई ऐसे लेनदेन सामने आए, जिनमें सामान तो ग्राहकों को दिया गया था, लेकिन उसकी राशि दुकान के खातों में दर्ज नहीं थी। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित कर्मचारियों पर भरोसे का गलत फायदा उठाकर गबन करने का आरोप लगाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत पुलिस तक पहुंचाई गई। कबीर नगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों कर्मचारियों के खिलाफ अमानत में खयानत और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज मिले हैं, लेकिन पूरे मामले की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच के दौरान पुलिस दुकान के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर, बिल बुक, कैश बुक, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। इसके अलावा जिन ग्राहकों को सामान बेचा गया था, उनसे भी संपर्क कर बिक्री और भुगतान से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि भुगतान किस माध्यम से किया गया था और रकम दुकान तक क्यों नहीं पहुंची।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीनों आरोपियों से भी पूछताछ की जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्होंने जानबूझकर बिक्री की रकम अपने पास रखी और कारोबारी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कराई जाएगी।
व्यापारिक संस्थानों में इस प्रकार की घटनाएं कारोबारियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही हैं। कई बार कर्मचारियों पर अत्यधिक भरोसा और वित्तीय निगरानी में कमी का फायदा उठाकर इस तरह की धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबारियों को नियमित रूप से स्टॉक ऑडिट, कैश वेरिफिकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करते रहना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी का समय रहते पता चल सके।
व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आधुनिक बिलिंग सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और ऑनलाइन अकाउंटिंग व्यवस्था अपनाने से ऐसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करना और समय-समय पर आंतरिक ऑडिट कराना भी जरूरी माना जाता है। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में आ सकती है।
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रायपुर में ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 14.37 लाख की धोखाधड़ी, तीन कर्मचारियों पर गबन का आरोप
रायपुर,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऑटो पार्ट्स कारोबारी के साथ लाखों रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कबीर नगर क्षेत्र में स्थित एक ऑटो पार्ट्स दुकान के तीन कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने ग्राहकों को सामान बेचने के बाद बिक्री से प्राप्त रकम दुकान के खाते में जमा नहीं की और उसे अपने पास रख लिया। कारोबारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में करीब 14 लाख 37 हजार 226 रुपए के गबन की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता मोहम्मद अनवर रायपुर के फेस-1, कबीर नगर क्षेत्र के निवासी हैं और वे इंडियन मोटर्स ऑटो पार्ट्स नाम से व्यवसाय संचालित करते हैं। उनकी दुकान पर कई कर्मचारी बिक्री और ग्राहकों से लेनदेन का कार्य संभालते थे। आरोप है कि दुकान में कार्यरत मोहम्मद फाजिल, सर्वर खान और कायनात ने लंबे समय तक सुनियोजित तरीके से बिक्री की रकम दुकान के खाते में जमा नहीं की और आर्थिक गड़बड़ी को छिपाते रहे।
शिकायत के मुताबिक, यह कथित धोखाधड़ी 11 मार्च 2025 से 5 नवंबर 2025 के बीच की गई। इस दौरान आरोपियों ने कई ग्राहकों को ऑटो पार्ट्स बेचे, लेकिन बिक्री से मिली राशि दुकान के कैश या बैंक खाते में जमा नहीं कराई। जब कारोबारी ने नियमित रूप से स्टॉक और नकदी का मिलान कराया तो बिक्री और जमा रकम के बीच बड़ा अंतर सामने आया। इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की गई, जिसमें लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितता का पता चला।
कारोबारी का कहना है कि दुकान में सभी बिक्री का रिकॉर्ड बिलों और स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। जब रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो कई ऐसे लेनदेन सामने आए, जिनमें सामान तो ग्राहकों को दिया गया था, लेकिन उसकी राशि दुकान के खातों में दर्ज नहीं थी। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित कर्मचारियों पर भरोसे का गलत फायदा उठाकर गबन करने का आरोप लगाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत पुलिस तक पहुंचाई गई। कबीर नगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों कर्मचारियों के खिलाफ अमानत में खयानत और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज मिले हैं, लेकिन पूरे मामले की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच के दौरान पुलिस दुकान के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर, बिल बुक, कैश बुक, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। इसके अलावा जिन ग्राहकों को सामान बेचा गया था, उनसे भी संपर्क कर बिक्री और भुगतान से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि भुगतान किस माध्यम से किया गया था और रकम दुकान तक क्यों नहीं पहुंची।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीनों आरोपियों से भी पूछताछ की जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्होंने जानबूझकर बिक्री की रकम अपने पास रखी और कारोबारी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कराई जाएगी।
व्यापारिक संस्थानों में इस प्रकार की घटनाएं कारोबारियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही हैं। कई बार कर्मचारियों पर अत्यधिक भरोसा और वित्तीय निगरानी में कमी का फायदा उठाकर इस तरह की धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबारियों को नियमित रूप से स्टॉक ऑडिट, कैश वेरिफिकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करते रहना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी का समय रहते पता चल सके।
व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आधुनिक बिलिंग सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और ऑनलाइन अकाउंटिंग व्यवस्था अपनाने से ऐसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करना और समय-समय पर आंतरिक ऑडिट कराना भी जरूरी माना जाता है। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में आ सकती है।
