भोपाल के बड़ा तालाब किनारे अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, FTL क्षेत्र से फार्म हाउस और बंगले हटाने शुरू

भोपाल,(म.प्र.)

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एनजीटी के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई तेज, पहले चरण में छह अवैध निर्माण हटाए जाएंगे; 21 चिन्हित अतिक्रमणों पर चलेगा अभियान

भोपाल के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बड़ा तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम ने शनिवार से व्यापक अभियान शुरू कर दिया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों और नगर निगम की कार्ययोजना के तहत फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र में बने अवैध फार्म हाउस, बंगले और अन्य निर्माणों को हटाने की कार्रवाई प्रारंभ की गई। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य भोज वेटलैंड और बड़ा तालाब के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखना है।

शनिवार सुबह से ही जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीमें गौरागांव, बिशनखेड़ी और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचीं। जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से चिन्हित अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अभियान के पहले दिन छह अतिक्रमणों को हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पूरे अभियान की निगरानी नगर निगम के उपायुक्त भुवन गुप्ता कर रहे हैं, जबकि टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राउत सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। नगर निगम ने कुछ दिन पहले ही एनजीटी में अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि बड़ा तालाब के आसपास एफटीएल क्षेत्र में चिन्हित 21 अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसी योजना के तहत अब अभियान को धरातल पर लागू किया जा रहा है।

प्रशासन के अनुसार जिन निर्माणों को हटाया जा रहा है, वे फुल टैंक लेवल और उसके निर्धारित सुरक्षा दायरे के भीतर आते हैं। संबंधित भवन मालिकों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि भोज वेटलैंड के सीमांकन के बाद एफटीएल से 50 मीटर के भीतर आने वाले सभी अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद जब अवैध निर्माण नहीं हटाए गए, तब प्रशासन ने संयुक्त अभियान शुरू किया। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार सेवनिया गौंड, गौरा विशनखेड़ी और प्रेमपुरा क्षेत्र में कुल 21 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से तीन निर्माण वर्ष 2022 से पहले के बताए गए हैं, जबकि शेष 18 निर्माण वर्ष 2022 के बाद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश निर्माण बिना किसी वैध भवन अनुमति के किए गए हैं, इसलिए नियमानुसार इन्हें हटाया जा रहा है।

बड़ा तालाब भोपाल ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की पहचान माना जाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। यहां अनेक दुर्लभ पक्षियों का निवास है और यह शहर के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब के कैचमेंट और एफटीएल क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध निर्माणों से जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण समय-समय पर न्यायालयों और पर्यावरण संस्थाओं ने अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया है। हालांकि यह पहला अवसर नहीं है जब बड़ा तालाब क्षेत्र में कार्रवाई की जा रही हो। जानकारी के अनुसार इस वर्ष सीमांकन अभियान के दौरान प्रशासन ने कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए थे, लेकिन अब तक केवल 51 छोटे अतिक्रमण ही हटाए जा सके थे। इनमें टीटी नगर क्षेत्र के 39 और बैरागढ़ क्षेत्र के 12 निर्माण शामिल थे। अभी भी लगभग 296 अतिक्रमण शेष हैं, जिन पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई की जा रही है। जिन निर्माणों को हटाया जा रहा है, उनके पास वैध स्वीकृति या भवन निर्माण की अनुमति उपलब्ध नहीं है। प्रशासन का दावा है कि अभियान पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर संचालित किया जा रहा है। बड़ा तालाब के आसपास भू-माफियाओं की सक्रियता भी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। आरोप हैं कि कई क्षेत्रों में कम कीमत पर प्लॉट बेचने के नाम पर लोगों को गुमराह किया गया। इतना ही नहीं, एफटीएल सीमा को लेकर भ्रम पैदा करने के लिए कथित तौर पर अलग-अलग प्रकार की सीमांकन मुनारें भी स्थापित कर दी गईं। मौके पर पांच प्रकार की मुनारें मिलने की बात सामने आई है, जिनमें केवल कुछ पर ही नगर निगम का स्पष्ट चिन्ह अंकित है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की भी जांच की जाएगी।

बड़ा तालाब की सीमा निर्धारण को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई सर्वे किए जा चुके हैं। वर्ष 2016 में डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (DGPS) तकनीक से सर्वे कराया गया था, जिसमें तालाब का क्षेत्रफल पहले की तुलना में अधिक दर्ज किया गया। इसके बाद एनजीटी के निर्देश पर सीमांकन हुआ, जिसमें कई मुनारें गायब मिलीं। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भी नया सर्वे कराया गया, हालांकि उसकी विस्तृत रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। राज्य सरकार भी बड़ा तालाब संरक्षण को लेकर गंभीरता जता चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले संबंधित विभागों को नए सिरे से सर्वे कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। वहीं भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी बड़ा तालाब के संरक्षण के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि दीर्घकालिक योजना के बिना तालाब क्षेत्र को सुरक्षित रखना कठिन होगा। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सभी चिन्हित अवैध निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि भोपाल की इस ऐतिहासिक जल धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित रखना भी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय महत्व का लाभ उठा सकें।

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04 Jul 2026 By Vaishnavi.J

भोपाल के बड़ा तालाब किनारे अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, FTL क्षेत्र से फार्म हाउस और बंगले हटाने शुरू

भोपाल,(म.प्र.)

भोपाल के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बड़ा तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम ने शनिवार से व्यापक अभियान शुरू कर दिया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों और नगर निगम की कार्ययोजना के तहत फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र में बने अवैध फार्म हाउस, बंगले और अन्य निर्माणों को हटाने की कार्रवाई प्रारंभ की गई। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य भोज वेटलैंड और बड़ा तालाब के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखना है।

शनिवार सुबह से ही जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीमें गौरागांव, बिशनखेड़ी और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचीं। जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से चिन्हित अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अभियान के पहले दिन छह अतिक्रमणों को हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पूरे अभियान की निगरानी नगर निगम के उपायुक्त भुवन गुप्ता कर रहे हैं, जबकि टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राउत सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। नगर निगम ने कुछ दिन पहले ही एनजीटी में अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि बड़ा तालाब के आसपास एफटीएल क्षेत्र में चिन्हित 21 अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसी योजना के तहत अब अभियान को धरातल पर लागू किया जा रहा है।

प्रशासन के अनुसार जिन निर्माणों को हटाया जा रहा है, वे फुल टैंक लेवल और उसके निर्धारित सुरक्षा दायरे के भीतर आते हैं। संबंधित भवन मालिकों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि भोज वेटलैंड के सीमांकन के बाद एफटीएल से 50 मीटर के भीतर आने वाले सभी अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद जब अवैध निर्माण नहीं हटाए गए, तब प्रशासन ने संयुक्त अभियान शुरू किया। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार सेवनिया गौंड, गौरा विशनखेड़ी और प्रेमपुरा क्षेत्र में कुल 21 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से तीन निर्माण वर्ष 2022 से पहले के बताए गए हैं, जबकि शेष 18 निर्माण वर्ष 2022 के बाद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश निर्माण बिना किसी वैध भवन अनुमति के किए गए हैं, इसलिए नियमानुसार इन्हें हटाया जा रहा है।

बड़ा तालाब भोपाल ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की पहचान माना जाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। यहां अनेक दुर्लभ पक्षियों का निवास है और यह शहर के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब के कैचमेंट और एफटीएल क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध निर्माणों से जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण समय-समय पर न्यायालयों और पर्यावरण संस्थाओं ने अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया है। हालांकि यह पहला अवसर नहीं है जब बड़ा तालाब क्षेत्र में कार्रवाई की जा रही हो। जानकारी के अनुसार इस वर्ष सीमांकन अभियान के दौरान प्रशासन ने कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए थे, लेकिन अब तक केवल 51 छोटे अतिक्रमण ही हटाए जा सके थे। इनमें टीटी नगर क्षेत्र के 39 और बैरागढ़ क्षेत्र के 12 निर्माण शामिल थे। अभी भी लगभग 296 अतिक्रमण शेष हैं, जिन पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई की जा रही है। जिन निर्माणों को हटाया जा रहा है, उनके पास वैध स्वीकृति या भवन निर्माण की अनुमति उपलब्ध नहीं है। प्रशासन का दावा है कि अभियान पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर संचालित किया जा रहा है। बड़ा तालाब के आसपास भू-माफियाओं की सक्रियता भी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। आरोप हैं कि कई क्षेत्रों में कम कीमत पर प्लॉट बेचने के नाम पर लोगों को गुमराह किया गया। इतना ही नहीं, एफटीएल सीमा को लेकर भ्रम पैदा करने के लिए कथित तौर पर अलग-अलग प्रकार की सीमांकन मुनारें भी स्थापित कर दी गईं। मौके पर पांच प्रकार की मुनारें मिलने की बात सामने आई है, जिनमें केवल कुछ पर ही नगर निगम का स्पष्ट चिन्ह अंकित है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की भी जांच की जाएगी।

बड़ा तालाब की सीमा निर्धारण को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई सर्वे किए जा चुके हैं। वर्ष 2016 में डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (DGPS) तकनीक से सर्वे कराया गया था, जिसमें तालाब का क्षेत्रफल पहले की तुलना में अधिक दर्ज किया गया। इसके बाद एनजीटी के निर्देश पर सीमांकन हुआ, जिसमें कई मुनारें गायब मिलीं। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भी नया सर्वे कराया गया, हालांकि उसकी विस्तृत रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। राज्य सरकार भी बड़ा तालाब संरक्षण को लेकर गंभीरता जता चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले संबंधित विभागों को नए सिरे से सर्वे कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। वहीं भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी बड़ा तालाब के संरक्षण के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि दीर्घकालिक योजना के बिना तालाब क्षेत्र को सुरक्षित रखना कठिन होगा। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सभी चिन्हित अवैध निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि भोपाल की इस ऐतिहासिक जल धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित रखना भी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय महत्व का लाभ उठा सकें।

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