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रीवा विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद की 11 फीट प्रतिमा का अनावरण, युवाओं को प्रेरणा देने की पहल
रीवा,(म.प्र.)
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर में किया लोकार्पण, पांच लाख रुपये की लागत से राजस्थान के कारीगरों ने तैयार की प्रतिमा
रीवा स्थित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार को स्वामी विवेकानंद की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने प्रशासनिक भवन के सामने विकसित पार्क में स्थापित इस प्रतिमा का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक महान संन्यासी ही नहीं, बल्कि युवाओं के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके जीवनकाल में थीं। विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित की गई यह प्रतिमा करीब 11 फीट ऊंची है और इसे लगभग पांच लाख रुपये की लागत से तैयार कराया गया है। प्रतिमा का निर्माण राजस्थान के कुशल शिल्पकारों और विशेष कारीगरों द्वारा किया गया है। इसे प्रशासनिक भवन के ठीक सामने स्थित पार्क में स्थापित किया गया है, ताकि विश्वविद्यालय आने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आगंतुकों को स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा मिल सके।
प्रतिमा अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और मानव सेवा का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि यदि युवा उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाएं तो वे व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि ऐसे स्थान होते हैं जहां से भविष्य के नेतृत्व का निर्माण होता है। ऐसे में महापुरुषों की प्रतिमाएं विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजेन्द्र कुड़रिया ने बताया कि परिसर में महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की योजना पहले से बनाई गई थी। इसी क्रम में सबसे पहले स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार शिक्षा, आत्मनिर्भरता और चरित्र निर्माण पर आधारित हैं, इसलिए उनकी प्रतिमा विश्वविद्यालय के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई।
डॉ. कुड़रिया ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य में अन्य राष्ट्रीय महापुरुषों और महान शिक्षाविदों की प्रतिमाएं भी परिसर में स्थापित करेगा। इसके लिए आवश्यक कार्यवाही और योजना तैयार की जा रही है। उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय को केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और प्रेरणादायी विचारों का केंद्र बनाना है। कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी इस पहल का स्वागत किया। विद्यार्थियों का कहना था कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज के युवाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनके जीवन से आत्मविश्वास, संघर्ष, अनुशासन और सकारात्मक सोच की प्रेरणा मिलती है। विश्वविद्यालय परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित होने से छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन उनके संदेशों को याद करने का अवसर मिलेगा।प्रतिमा का निर्माण बेहद आकर्षक शैली में किया गया है। राजस्थान के अनुभवी शिल्पकारों ने इसे पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक के समन्वय से तैयार किया है। प्रतिमा के आसपास पार्क का भी सौंदर्यीकरण किया गया है, जिससे यह स्थान विश्वविद्यालय परिसर का प्रमुख आकर्षण बन गया है। प्रशासनिक भवन के सामने स्थित होने के कारण यहां आने वाले सभी लोग प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, उनके विचारों और युवाओं के लिए उनके संदेश पर आधारित विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने युवाओं से सदैव अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और कठिनाइयों से बिना डरे आगे बढ़ने का संदेश दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में परिसर के विभिन्न हिस्सों में महापुरुषों के विचारों से जुड़े सूचना पट्ट भी लगाए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी उनके जीवन और योगदान के बारे में विस्तार से जान सकें। इसके साथ ही समय-समय पर व्याख्यान, संगोष्ठी और प्रेरक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
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रीवा विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद की 11 फीट प्रतिमा का अनावरण, युवाओं को प्रेरणा देने की पहल
रीवा,(म.प्र.)
रीवा स्थित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार को स्वामी विवेकानंद की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने प्रशासनिक भवन के सामने विकसित पार्क में स्थापित इस प्रतिमा का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक महान संन्यासी ही नहीं, बल्कि युवाओं के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके जीवनकाल में थीं। विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित की गई यह प्रतिमा करीब 11 फीट ऊंची है और इसे लगभग पांच लाख रुपये की लागत से तैयार कराया गया है। प्रतिमा का निर्माण राजस्थान के कुशल शिल्पकारों और विशेष कारीगरों द्वारा किया गया है। इसे प्रशासनिक भवन के ठीक सामने स्थित पार्क में स्थापित किया गया है, ताकि विश्वविद्यालय आने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आगंतुकों को स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा मिल सके।
प्रतिमा अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और मानव सेवा का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि यदि युवा उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाएं तो वे व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि ऐसे स्थान होते हैं जहां से भविष्य के नेतृत्व का निर्माण होता है। ऐसे में महापुरुषों की प्रतिमाएं विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजेन्द्र कुड़रिया ने बताया कि परिसर में महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की योजना पहले से बनाई गई थी। इसी क्रम में सबसे पहले स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार शिक्षा, आत्मनिर्भरता और चरित्र निर्माण पर आधारित हैं, इसलिए उनकी प्रतिमा विश्वविद्यालय के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई।
डॉ. कुड़रिया ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य में अन्य राष्ट्रीय महापुरुषों और महान शिक्षाविदों की प्रतिमाएं भी परिसर में स्थापित करेगा। इसके लिए आवश्यक कार्यवाही और योजना तैयार की जा रही है। उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय को केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और प्रेरणादायी विचारों का केंद्र बनाना है। कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी इस पहल का स्वागत किया। विद्यार्थियों का कहना था कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज के युवाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनके जीवन से आत्मविश्वास, संघर्ष, अनुशासन और सकारात्मक सोच की प्रेरणा मिलती है। विश्वविद्यालय परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित होने से छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन उनके संदेशों को याद करने का अवसर मिलेगा।प्रतिमा का निर्माण बेहद आकर्षक शैली में किया गया है। राजस्थान के अनुभवी शिल्पकारों ने इसे पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक के समन्वय से तैयार किया है। प्रतिमा के आसपास पार्क का भी सौंदर्यीकरण किया गया है, जिससे यह स्थान विश्वविद्यालय परिसर का प्रमुख आकर्षण बन गया है। प्रशासनिक भवन के सामने स्थित होने के कारण यहां आने वाले सभी लोग प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, उनके विचारों और युवाओं के लिए उनके संदेश पर आधारित विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने युवाओं से सदैव अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और कठिनाइयों से बिना डरे आगे बढ़ने का संदेश दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में परिसर के विभिन्न हिस्सों में महापुरुषों के विचारों से जुड़े सूचना पट्ट भी लगाए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी उनके जीवन और योगदान के बारे में विस्तार से जान सकें। इसके साथ ही समय-समय पर व्याख्यान, संगोष्ठी और प्रेरक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
