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छत्तीसगढ़ में ठंड का तीखा प्रकोप: बलरामपुर में जमी ओस बनी बर्फ, 8 जिलों में शीतलहर का अलर्ट
रायपुर (छ.ग.)
हिमालय से आ रहीं सर्द हवाओं ने बढ़ाई कंपकंपी, अगले 48 घंटे तक तापमान में राहत के आसार नहीं
छत्तीसगढ़ में सर्दी ने एक बार फिर तीखा रूप ले लिया है। हिमालयी क्षेत्रों से सक्रिय ठंडी हवाओं के कारण प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में तापमान तेजी से गिरा है। बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र में रात के समय ओस की बूंदें जमकर बर्फ में तब्दील हो गईं, जिससे कड़ाके की ठंड का असर साफ नजर आया। मौसम विभाग ने रायपुर-दुर्ग समेत आठ जिलों में शीतलहर को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है और अगले दो दिनों तक हालात में खास सुधार की संभावना नहीं जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार, सरगुजा संभाग में ठंड का प्रभाव सबसे अधिक बना हुआ है। रामानुजगंज में न्यूनतम तापमान 1 से 2 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया, जबकि अंबिकापुर में पारा 3.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सूरज ढलते ही तापमान में अचानक गिरावट हो रही है, जिससे सुबह और रात के समय ठिठुरन बढ़ गई है।
मध्य छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भी सर्द हवाओं का असर तेज हो गया है। मौसम विभाग ने खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, मोहल्ला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, दुर्ग, बालोद, कबीरधाम, बेमेतरा और रायपुर में शीतलहर चलने की चेतावनी दी है। इन क्षेत्रों में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
पिछले 24 घंटों के मौसम आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान दुर्ग में 29.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में सबसे कम रहा। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगले दो दिनों तक तापमान में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है और ठंडी हवाओं का असर बना रह सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, लगातार बढ़ती ठंड का असर लोगों की सेहत पर भी दिखने लगा है। बीते 28 दिनों में प्रदेश में ठंड से जुड़ी तीन मौतों की पुष्टि हो चुकी है। चिकित्सकों का कहना है कि अचानक तापमान गिरने से हाइपोथर्मिया, सांस की तकलीफ और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में लोगों को गर्म कपड़े पहनने, रात में खुले में न सोने और बुजुर्गों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी जा रही है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं के कारण बनी हुई है। जब तक यह सिस्टम कमजोर नहीं पड़ता, तब तक छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में ठंड का असर जारी रह सकता है। खासकर सुबह और रात के समय कोहरा और ठंडी हवा लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
प्रशासन ने स्थानीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि रैन बसेरों और सार्वजनिक स्थलों पर ठंड से बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पर नजर रखें और आवश्यक सावधानियां बरतें।
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