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एक कमरे में दो कक्षाएं, अलमारी से बना ऑफिस: दुर्ग के गुरुनानक प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं का संकट
दुर्ग-भिलाई (छ.ग.)
चार साल से अस्थायी व्यवस्था में चल रहा स्कूल, 3 कमरों में 5 कक्षाएं; DEO बोले—प्रिंसिपल को कक्ष व्यवस्था सुधारने के निर्देश
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के मालवीय नगर क्षेत्र में स्थित गुरुनानक प्राथमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था गंभीर अव्यवस्था से जूझ रही है। प्राथमिक स्तर की इस शासकीय शाला में पिछले चार वर्षों से एक ही कमरे में दो-दो कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। स्थिति इतनी विकट है कि शिक्षकों को कक्षा कक्ष में ही अलमारी रखकर पार्टिशन बनाकर कार्यालय चलाना पड़ रहा है। न तो प्रधानाध्यापक के लिए अलग कक्ष है, न स्टाफ रूम और न ही बच्चों के लिए सुरक्षित व पर्याप्त स्थान।
यह स्कूल पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए संचालित है, लेकिन कुल मिलाकर केवल तीन कमरे ही उपलब्ध हैं। मजबूरी में एक कमरे में दो कक्षाओं को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। बच्चों के बैठने, पढ़ने और शिक्षक के संचालन कार्यों में लगातार व्यवधान बना रहता है। मध्यान्ह भोजन के लिए भी स्कूल परिसर में कोई समुचित स्थान नहीं है, जिसके कारण बच्चों को बाहर खुले में भोजन करना पड़ता है।
गुरुनानक प्राथमिक शाला को वर्ष 2022 में दीपक नगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय परिसर में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया था। इससे पहले यह स्कूल अपने मूल भवन में संचालित हो रहा था। प्रधानाध्यापक रतिदास सिरमौर के अनुसार, पुराने भवन में एक छोटा छज्जा गिरने की घटना के बाद मरम्मत कराने के बजाय स्कूल को आनन-फानन में खाली करा दिया गया। अस्थायी व्यवस्था के नाम पर स्कूल को नए परिसर में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन वहां पर्याप्त कमरे नहीं दिए गए।
चार साल बीतने के बावजूद यह अस्थायी व्यवस्था स्थायी समस्या बन चुकी है। प्रधानाध्यापक का कहना है कि अधिकांश छात्र पैदल स्कूल आते हैं और स्कूल तक पहुंचने के लिए उन्हें व्यस्त सड़क पार करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद असुरक्षित है, लेकिन विकल्प न होने के कारण अभिभावक मजबूर हैं।
स्थिति को और कठिन बनाता है पास के स्कूल में चलने वाला माइक सिस्टम। तेज आवाज में होने वाली घोषणाओं और पढ़ाई के कारण गुरुनानक प्राथमिक शाला की कक्षाओं में पढ़ाई बाधित होती है। शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि शोर के कारण छोटे बच्चे ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते।
स्कूल में केवल तीन शिक्षक पदस्थ हैं। प्रधानाध्यापक स्वयं तीसरी कक्षा पढ़ाते हैं। एक शिक्षक चौथी-पांचवीं और एक शिक्षिका पहली-दूसरी कक्षा को एक साथ संभालती हैं। सीमित स्टाफ और अपर्याप्त संसाधनों के बीच पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए चुनौती बन गया है।
प्रधानाध्यापक ने अक्टूबर 2025 में स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर भवन निर्माण और स्थायी समाधान की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला। इस मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने कहा है कि संबंधित परिसर के प्रिंसिपल को कक्ष व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
यह मामला एक बार फिर सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे, छात्र सुरक्षा और प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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