- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- “साहब मुझे डॉक्टर बनना है” — सीधी में सीएम से मिलने को रोकी गई बैगा समाज की छात्रा, सुरक्षा घेरे में...
“साहब मुझे डॉक्टर बनना है” — सीधी में सीएम से मिलने को रोकी गई बैगा समाज की छात्रा, सुरक्षा घेरे में फूट-फूटकर रोई
सीधी (म.प्र.)
सीएम मोहन यादव के कार्यक्रम के दौरान भावुक दृश्य, आर्थिक मदद की आस में पहुंची छात्रा मंच तक नहीं पहुंच सकी
मध्यप्रदेश के सीधी जिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने कार्यक्रम की चमक-दमक के बीच एक गरीब आदिवासी छात्रा के संघर्ष को उजागर कर दिया। बैगा समाज से आने वाली अनामिका बैगा, जो डॉक्टर बनने का सपना देख रही है, मुख्यमंत्री से मिलने और अपनी पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाने पहुंची थी। लेकिन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते वह मंच तक नहीं पहुंच सकी और निराश होकर मौके पर ही फूट-फूटकर रोने लगी।
यह घटना शुक्रवार को उस समय हुई, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीधी जिले के बहरी क्षेत्र में सिंहावल विधानसभा अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 201 करोड़ 64 लाख रुपये की लागत से जुड़े 209 विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। इसी दौरान धौहनी विधानसभा क्षेत्र के डेबा गांव की रहने वाली अनामिका बैगा मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश कर रही थी।
अनामिका का कहना है कि वह पढ़ाई में आगे बढ़कर डॉक्टर बनना चाहती है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उसके पिता इतने सक्षम नहीं हैं कि मेडिकल की पढ़ाई का खर्च उठा सकें। इसी उम्मीद के साथ वह मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाना चाहती थी, ताकि उसे पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता मिल सके।
कार्यक्रम स्थल पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने अनामिका को सुरक्षा घेरे के बाहर ही रोक दिया। बार-बार आग्रह करने के बावजूद जब उसे आगे नहीं बढ़ने दिया गया, तो वह भावनात्मक रूप से टूट गई। रोते हुए उसने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा साझा की और कहा कि सरकार बेटियों के हित की बात करती है, लेकिन जब वह खुद मदद मांगने आती है तो कोई सुनने वाला नहीं होता।
अनामिका ने बताया कि यह पहला मौका नहीं है जब उसने मदद की गुहार लगाई हो। इससे पहले वह दो बार जिला कलेक्टर से मिल चुकी है और अपने क्षेत्रीय विधायक कुंवर सिंह टेकाम से भी संपर्क किया था। हालांकि, हर बार उसे सिर्फ आश्वासन ही मिला, ठोस मदद नहीं। इसी वजह से उसने अंतिम उम्मीद के तौर पर मुख्यमंत्री से सीधे मिलने का फैसला किया था।
मुख्यमंत्री का काफिला कार्यक्रम के बाद रवाना हो गया और अनामिका उनसे मिल नहीं सकी। मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया कर्मियों ने इस दृश्य को देखा, जिसने सरकारी कार्यक्रमों में आम लोगों की पहुंच और संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
----------------------------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!
