बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में 153 अवैध निर्माण चिन्हित, प्रशासन सख्त

भोपाल (म.प्र.)

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Bhopal में वेटलैंड नियमों के बाद हुए निर्माणों पर कार्रवाई की तैयारी, सरकारी जमीनों पर कब्जे भी सामने आए

भोपाल की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़ा तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 50 मीटर के भीतर हुए निर्माणों को अवैध मानते हुए प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। हालिया सर्वे में 153 झुग्गियां और पक्के निर्माण चिन्हित किए गए हैं। इनमें कुछ बड़े और प्रभावशाली लोगों के मकान भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई वेटलैंड नियम लागू होने के बाद हुए निर्माणों के खिलाफ की जा रही है। 

जिला प्रशासन के अनुसार 16 मार्च 2022 के बाद शहरी सीमा में एफटीएल से 50 मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर के भीतर किए गए सभी निर्माण नियमों के विरुद्ध माने जाएंगे। प्रशासन ने संबंधित विभागों को सीमांकन प्रक्रिया तेज करने और होली से पहले सर्वे कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

टीटी नगर अनुभाग के सेवनिया गौड़, धर्मपुरी, प्रेमपुरा, आमखेड़ा, पीपलखेड़ी, कोटरा सुल्तानाबाद और बरखेड़ी खुर्द सहित कई इलाकों में निर्माण चिन्हित हुए हैं। खानूगांव क्षेत्र में 15 सरकारी जमीनों पर कब्जे सामने आए हैं। कोहेफिजा, हलालपुरा और भदभदा इलाके में भी निर्माण सीमा के भीतर पाए गए। प्रशासन ने कई स्थानों पर लाल निशान लगाकर सीमांकन शुरू कर दिया है।

अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई दो स्तर पर होगी। पहला, वेटलैंड नियम लागू होने के बाद हुए निर्माणों को सीधे अवैध मानते हुए हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। दूसरा, पुराने निर्माणों के मामलों में संबंधित व्यक्तियों से अनुमतियों के दस्तावेज मांगे जाएंगे। अनुमति देने वाले विभागों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार तालाब के कैचमेंट एरिया में निर्माण जल संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए गंभीर खतरा है। बड़ा तालाब अंतरराष्ट्रीय महत्व का रामसर स्थल भी है, इसलिए संरक्षण की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो जल गुणवत्ता और शहर की जल आपूर्ति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

पिछले एक दशक में तीन बार सर्वे होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमण बढ़ते गए। इस बार प्रशासन ने रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सौंपने और जल स्रोतों को प्रदूषित करने वाले नालों की पहचान करने का निर्णय लिया है। प्रशासन का कहना है कि जल संरक्षण और शहरी पर्यावरण संतुलन के लिए यह अभियान निर्णायक होगा।

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