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रायपुर में 11 आईएएस अफसरों के प्रभार बदले, कुलदीप शर्मा बने बलौदाबाजार-भाटापारा कलेक्टर
रायपुर (छ.ग.)
प्रशासनिक फेरबदल में आशीष टिकरिहा को वेयरहाउस कॉर्पोरेशन का एमडी; पदोन्नति के बाद नई जिम्मेदारियां, शासन ने क्रियान्वयन क्षमता बढ़ाने पर दिया जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शुक्रवार देर शाम बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 11 आईएएस अधिकारियों के प्रभार में बदलाव किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार पदोन्नति के बाद कई अफसरों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ को पूर्व पदों पर ही कार्य जारी रखने को कहा गया है। यह निर्णय प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से लिया गया बताया जा रहा है।
आदेश के तहत वेयरहाउस और सहकारी संस्थाओं का दायित्व संभाल रहे कुलदीप शर्मा को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वहीं वित्त मंत्री के विशेष सहायक के रूप में कार्यरत रहे आशीष टिकरिहा को छत्तीसगढ़ वेयरहाउस कॉर्पोरेशन का प्रबंध संचालक बनाया गया है। शासन का मानना है कि इन नियुक्तियों से प्रशासनिक समन्वय और नीति क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह फेरबदल केवल पदस्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। सहकारिता विभाग में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू करते हुए सचिव, आयुक्त और रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) का प्रभार एक ही अधिकारी को सौंपा गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में समय की बचत होगी और योजनाओं की निगरानी बेहतर हो सकेगी।
फेरबदल का एक महत्वपूर्ण पहलू मंत्रियों के स्टाफ में कार्यरत अधिकारियों की मुख्यधारा में वापसी भी माना जा रहा है। शासन स्तर पर इन अधिकारियों के अनुभव का उपयोग नीति-निर्माण और क्रियान्वयन में करने की रणनीति पर जोर दिया गया है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि जिला स्तर पर अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति से विकास कार्यों की गति और जनसेवा तंत्र की जवाबदेही दोनों मजबूत होती हैं।
कैडर अपग्रेडेशन की तकनीकी प्रक्रिया भी इस आदेश का हिस्सा है। इससे अधिकारियों के पद, वेतनमान और सेवा शर्तों में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। शासन का मानना है कि प्रशासनिक ढांचे में स्पष्टता और पदानुक्रम की पारदर्शिता से निर्णय प्रक्रिया अधिक सुगम होती है।
राज्य सरकार के इस कदम को प्रशासनिक पुनर्संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। आगामी महीनों में विकास परियोजनाओं, सहकारिता क्षेत्र और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में अपेक्षित सुधारों की जिम्मेदारी अब नए पदस्थ अधिकारियों पर होगी। यह फेरबदल प्रशासनिक प्रणाली को अधिक परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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