25 जुलाई महाकाल भस्म आरती: शिवमय आभा में सजे बाबा महाकाल, भक्तों ने किए दिव्य दर्शन

धर्म डेस्क

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आषाढ़ शुक्ल एकादशी पर विशेष भस्म आरती संपन्न, पंचामृत अभिषेक और दिव्य श्रृंगार के बाद जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार, 25 जुलाई की तड़के ब्रह्म मुहूर्त में भगवान महाकाल की अलौकिक भस्म आरती श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुई। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के पावन अवसर पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इसके बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन, जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक और विशेष श्रृंगार के साथ भगवान महाकाल की भस्म आरती की गई। इस दौरान मंदिर परिसर में "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

मंदिर के पट खुलते ही सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न हुई, जिसमें मंदिर के पुजारी और पुरोहित शामिल रहे।

अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग, चंदन, सुगंधित इत्र और विभिन्न प्रकार के आभूषणों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही रुद्राक्ष की मालाएं, रंग-बिरंगे पुष्पों की मालाएं और विशेष पूजा सामग्री अर्पित की गई। श्रृंगार के बाद भगवान का स्वरूप अत्यंत मनोहारी और आकर्षक दिखाई दिया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु उत्साहित नजर आए।

भस्म आरती की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रों और शिव स्तुति के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को परंपरा के अनुसार वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह महाकाल मंदिर की सबसे विशेष और प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और विभिन्न प्रकार के पुष्प अर्पित किए गए। सुगंधित फूलों और आभूषणों से सुसज्जित बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। मंदिर के गर्भगृह और सभामंडप में उपस्थित श्रद्धालु लगातार भगवान के जयकारे लगाते रहे और पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया गया।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल का दर्शन करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सुबह होने से पहले ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं। देश के अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की प्रार्थना की। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे दर्शन प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकी।

भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। बड़ी संख्या में भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते हुए नजर आए। ऐसी मान्यता है कि नंदी महाराज भगवान शिव तक भक्तों की प्रार्थना पहुंचाते हैं और सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इस परंपरा का पालन करने के लिए भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती देश की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इस दिव्य अनुष्ठान को देखने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। विशेष पर्व, एकादशी, सोमवार और सावन जैसे धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। मंदिर प्रशासन दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए समय-समय पर आवश्यक प्रबंध करता है।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे सनातन धर्म के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। यहां होने वाली भस्म आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शिव भक्ति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक आस्था का अद्भुत संगम मानी जाती है। भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु यहां से आध्यात्मिक शांति और नई ऊर्जा का अनुभव लेकर लौटते हैं।

25 जुलाई की भस्म आरती भी इसी आस्था, श्रद्धा और भक्ति का सजीव उदाहरण बनी। वैदिक मंत्रों की गूंज, घंटों की मधुर ध्वनि, सुगंधित पुष्पों की महक और बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार ने पूरे मंदिर परिसर को शिवमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया और सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना की।

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25 Jul 2026 By Vaishnavi.J

25 जुलाई महाकाल भस्म आरती: शिवमय आभा में सजे बाबा महाकाल, भक्तों ने किए दिव्य दर्शन

धर्म डेस्क

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार, 25 जुलाई की तड़के ब्रह्म मुहूर्त में भगवान महाकाल की अलौकिक भस्म आरती श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुई। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के पावन अवसर पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इसके बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन, जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक और विशेष श्रृंगार के साथ भगवान महाकाल की भस्म आरती की गई। इस दौरान मंदिर परिसर में "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

मंदिर के पट खुलते ही सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न हुई, जिसमें मंदिर के पुजारी और पुरोहित शामिल रहे।

अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग, चंदन, सुगंधित इत्र और विभिन्न प्रकार के आभूषणों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही रुद्राक्ष की मालाएं, रंग-बिरंगे पुष्पों की मालाएं और विशेष पूजा सामग्री अर्पित की गई। श्रृंगार के बाद भगवान का स्वरूप अत्यंत मनोहारी और आकर्षक दिखाई दिया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु उत्साहित नजर आए।

भस्म आरती की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रों और शिव स्तुति के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को परंपरा के अनुसार वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह महाकाल मंदिर की सबसे विशेष और प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और विभिन्न प्रकार के पुष्प अर्पित किए गए। सुगंधित फूलों और आभूषणों से सुसज्जित बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। मंदिर के गर्भगृह और सभामंडप में उपस्थित श्रद्धालु लगातार भगवान के जयकारे लगाते रहे और पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया गया।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल का दर्शन करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सुबह होने से पहले ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं। देश के अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की प्रार्थना की। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे दर्शन प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकी।

भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। बड़ी संख्या में भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते हुए नजर आए। ऐसी मान्यता है कि नंदी महाराज भगवान शिव तक भक्तों की प्रार्थना पहुंचाते हैं और सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इस परंपरा का पालन करने के लिए भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती देश की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इस दिव्य अनुष्ठान को देखने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। विशेष पर्व, एकादशी, सोमवार और सावन जैसे धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। मंदिर प्रशासन दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए समय-समय पर आवश्यक प्रबंध करता है।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे सनातन धर्म के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। यहां होने वाली भस्म आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शिव भक्ति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक आस्था का अद्भुत संगम मानी जाती है। भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु यहां से आध्यात्मिक शांति और नई ऊर्जा का अनुभव लेकर लौटते हैं।

25 जुलाई की भस्म आरती भी इसी आस्था, श्रद्धा और भक्ति का सजीव उदाहरण बनी। वैदिक मंत्रों की गूंज, घंटों की मधुर ध्वनि, सुगंधित पुष्पों की महक और बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार ने पूरे मंदिर परिसर को शिवमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया और सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना की।

https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/25-july-mahakal-bhasma-aarti-baba-mahakal-devotees-dressed-in/article-59713

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