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एम्स भोपाल की 8 सेवाएं अब व्हाट्सएप पर, मोबाइल से मिलेगा अपॉइंटमेंट से रिपोर्ट तक का अपडेट
भोपाल (म.प्र.)
मरीजों को अस्पताल के चक्कर से राहत, क्यूआर कोड और ओटीपी के जरिए जुड़ सकेंगे डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से
एम्स भोपाल में इलाज कराने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए अस्पताल से जुड़ी कई जरूरी प्रक्रियाएं अब पहले के मुकाबले आसान होने जा रही हैं। अस्पताल ने ‘एम्स भोपाल व्हाट्सएप स्वास्थ्य सेवाएं’ नाम से एक नई डिजिटल सुविधा शुरू की है। इसके जरिए मरीज अपने मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप के माध्यम से अस्पताल की अलग-अलग सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस पहल का मकसद मरीजों को छोटी-छोटी जानकारी या दस्तावेजी सेवाओं के लिए बार-बार अस्पताल आने से बचाना है। फिलहाल यह सुविधा सार्वजनिक परीक्षण के तौर पर शुरू की गई है। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि व्हाट्सएप के जरिए सेवाओं तक पहुंच बनाना उन लोगों के लिए भी सुविधाजनक होगा, जिन्हें वेबसाइट या अलग-अलग स्वास्थ्य ऐप चलाने में परेशानी होती है।
मोबाइल से मिलेंगी कई जरूरी सुविधाएं
नई व्यवस्था के तहत मरीजों को व्हाट्सएप चैट के माध्यम से अस्पताल से संबंधित कई सेवाओं तक पहुंच दी जाएगी। इनमें ओपीडी अपॉइंटमेंट, लैब रिपोर्ट, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र और डिस्चार्ज समरी जैसी जरूरी सुविधाएं शामिल हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल की सेवाओं के लिए अलग-अलग माध्यम तलाशने की जरूरत कम होगी। अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं की सूची में कुल आठ सुविधाएं शामिल की गई हैं। मरीज अपनी जरूरत के अनुसार व्हाट्सएप चैट में संबंधित विकल्प चुनकर आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
क्यूआर कोड स्कैन करके शुरू होगी प्रक्रिया
एम्स भोपाल की ओर से इस सुविधा के लिए विशेष व्हाट्सएप नंबर और क्यूआर कोड उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पताल के ओपीडी क्षेत्र और मरीजों की अधिक आवाजाही वाले स्थानों पर भी क्यूआर कोड लगाए जाने की व्यवस्था की जा रही है। मरीज अपने मोबाइल कैमरे से क्यूआर कोड स्कैन करके सीधे व्हाट्सएप सेवा से जुड़ सकेंगे। इसके बाद उन्हें पहली बार अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। नंबर की पुष्टि ओटीपी के माध्यम से की जाएगी। सत्यापन पूरा होने के बाद ही संबंधित डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
मरीजों की जानकारी की सुरक्षा पर जोर
अस्पताल प्रबंधन ने डिजिटल सुविधा शुरू करते समय मरीजों की निजी स्वास्थ्य जानकारी की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण माना है। ओटीपी आधारित सत्यापन का प्रावधान इसलिए रखा गया है, ताकि बिना अनुमति किसी दूसरे व्यक्ति को मरीज की जानकारी तक पहुंच न मिल सके। इस प्रक्रिया के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति पहले अपने मोबाइल नंबर का सत्यापन करे और उसके बाद ही संबंधित रिकॉर्ड या सेवा तक पहुंचे।
हिंदी और अंग्रेजी में मिलेगा विकल्प
व्हाट्सएप सेवा में मरीजों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में विकल्प उपलब्ध होंगे। सेवा शुरू करने के बाद उपयोगकर्ता अपनी पसंद की भाषा चुन सकेगा। इसके बाद चैट स्क्रीन पर अलग-अलग सेवाओं के विकल्प दिखाई देंगे। मरीज को जिस सुविधा की आवश्यकता होगी, वह संबंधित विकल्प चुनकर आगे बढ़ सकेगा। इस तरह किसी वेबसाइट पर अलग से लॉगिन करने या अलग-अलग पोर्टल तलाशने की जरूरत कम होगी।
स्मार्टफोन और व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं को फायदा
अस्पताल की इस पहल के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन स्मार्टफोन और व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पहले से इस्तेमाल किए जा रहे प्लेटफॉर्म के जरिए अस्पताल की डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने से प्रक्रिया को ज्यादा सरल बनाया जा सकता है। खासकर दूर-दराज से आने वाले मरीजों के लिए रिपोर्ट, अपॉइंटमेंट या डिस्चार्ज से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी के लिए बार-बार अस्पताल आने की आवश्यकता कम हो सकती है।
सार्वजनिक परीक्षण के तौर पर शुरू हुई सुविधा
एम्स भोपाल ने फिलहाल इस व्हाट्सएप आधारित व्यवस्था को सार्वजनिक परीक्षण के रूप में शुरू किया है। परीक्षण के दौरान मरीजों के इस्तेमाल और प्रतिक्रिया के आधार पर सेवा को आगे और बेहतर किए जाने की संभावना है।
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