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भोपाल में नापतौल विभाग में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते रिटायर्ड इंस्पेक्टर गिरफ्तार
भोपाल,(म.प्र.)
प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर के इशारे पर पेट्रोल पंप संचालक से रिश्वत लेने पहुंचे रिटायर्ड निरीक्षक को लोकायुक्त पुलिस ने रंगेहाथ पकड़ा। मामले में डिप्टी कंट्रोलर को भी मुख्य आरोपी बनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
भोपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए नापतौल विभाग से जुड़े एक रिश्वतखोरी मामले का खुलासा किया। लोकायुक्त की टीम ने विभाग के रिटायर्ड निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि यह रकम विभाग के प्रभारी उप नियंत्रक (डिप्टी कंट्रोलर) नसीमुद्दीन के कथित निर्देश पर ली जा रही थी। कार्रवाई के बाद लोकायुक्त पुलिस ने नसीमुद्दीन को भी मामले का मुख्य आरोपी बनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार शिकायत भोपाल के एमपी नगर जोन-2 स्थित प्रगति पेट्रोल पंप के संचालक अमित सिंह बघेल ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नापतौल विभाग की ओर से उनके पेट्रोल पंप के खिलाफ दर्ज प्रकरण समाप्त करने और सील किए गए तीन नोजल दोबारा चालू कराने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस ने पूरे मामले की निगरानी शुरू की और ट्रैप की योजना बनाई।
शिकायत के अनुसार शुरुआत में चार लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में बातचीत के दौरान सौदा साढ़े तीन लाख रुपये में तय हुआ। तय राशि की पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये देने का समय और स्थान निश्चित किया गया। लोकायुक्त की टीम पहले से ही पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थी। गुरुवार को फरियादी को पहले मनोहर डेयरी बुलाया गया। कुछ देर बाद रिटायर्ड निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल ने फोन कर उन्हें बोर्ड ऑफिस क्षेत्र के पास आने के लिए कहा। वहां से दोनों इंडियन कॉफी हाउस पहुंचे, जहां रिश्वत की पहली किस्त दी जानी थी।
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार जैसे ही फरियादी ने एक लाख रुपये हरिप्रसाद पटेल को दिए और उन्होंने रकम अपनी कार में रखी, पहले से तैनात टीम ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया। कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी अजय मिश्रा और उनकी टीम ने किया।ट्रैप की कार्रवाई पूरी होने के बाद लोकायुक्त की दूसरी टीम जेके रोड स्थित नापतौल विभाग के कार्यालय पहुंची। यहां प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर नसीमुद्दीन के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। अधिकारियों ने कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की।
लोकायुक्त के अनुसार शिकायत की पृष्ठभूमि जून महीने में हुई विभागीय कार्रवाई से जुड़ी है। निरीक्षण के दौरान नापतौल विभाग ने प्रगति पेट्रोल पंप के तीन नोजल सील कर दिए थे। विभाग का दावा था कि इन नोजलों से निर्धारित मात्रा से एक से पांच मिलीलीटर तक कम पेट्रोल निकल रहा था। हालांकि बाद में संबंधित कंपनी के अधिकृत जांच अधिकारी ने दोबारा परीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में नोजल निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके बावजूद पेट्रोल पंप संचालक का आरोप था कि केस समाप्त करने और नोजलों की दोबारा स्टैंपिंग कराने के लिए रिश्वत की मांग लगातार की जा रही थी।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि हरिप्रसाद पटेल वर्ष 2023 में निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे। इसके बावजूद वे विभागीय मामलों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे और कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेने तथा संदेश पहुंचाने का काम कर रहे थे। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि रिटायरमेंट के बाद भी वे विभाग के कुछ मामलों में अनधिकृत रूप से हस्तक्षेप कर रहे थे। अब जांच इस दिशा में भी की जाएगी कि वे किन परिस्थितियों में विभागीय गतिविधियों से जुड़े रहे और किन-किन मामलों में उनकी भूमिका रही।
लोकायुक्त जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर नसीमुद्दीन सीधे तौर पर रिश्वत की बातचीत से बचते थे। शिकायत के अनुसार वे अलग-अलग स्थानों पर बुलाकर बातचीत करते थे, लेकिन रकम का जिक्र मौखिक रूप से करने के बजाय कागज पर लिखते और तुरंत उसे फाड़ या काट देते थे, ताकि भविष्य में कोई प्रत्यक्ष या ऑडियो साक्ष्य उपलब्ध न हो सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिश्वत मांगने का यह तरीका सबूत मिटाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप कार्रवाई के बाद संबंधित दस्तावेज, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वत मांगने की पूरी प्रक्रिया, बातचीत और विभागीय फाइलों की भी पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
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भोपाल में नापतौल विभाग में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते रिटायर्ड इंस्पेक्टर गिरफ्तार
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए नापतौल विभाग से जुड़े एक रिश्वतखोरी मामले का खुलासा किया। लोकायुक्त की टीम ने विभाग के रिटायर्ड निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि यह रकम विभाग के प्रभारी उप नियंत्रक (डिप्टी कंट्रोलर) नसीमुद्दीन के कथित निर्देश पर ली जा रही थी। कार्रवाई के बाद लोकायुक्त पुलिस ने नसीमुद्दीन को भी मामले का मुख्य आरोपी बनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार शिकायत भोपाल के एमपी नगर जोन-2 स्थित प्रगति पेट्रोल पंप के संचालक अमित सिंह बघेल ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नापतौल विभाग की ओर से उनके पेट्रोल पंप के खिलाफ दर्ज प्रकरण समाप्त करने और सील किए गए तीन नोजल दोबारा चालू कराने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस ने पूरे मामले की निगरानी शुरू की और ट्रैप की योजना बनाई।
शिकायत के अनुसार शुरुआत में चार लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में बातचीत के दौरान सौदा साढ़े तीन लाख रुपये में तय हुआ। तय राशि की पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये देने का समय और स्थान निश्चित किया गया। लोकायुक्त की टीम पहले से ही पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थी। गुरुवार को फरियादी को पहले मनोहर डेयरी बुलाया गया। कुछ देर बाद रिटायर्ड निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल ने फोन कर उन्हें बोर्ड ऑफिस क्षेत्र के पास आने के लिए कहा। वहां से दोनों इंडियन कॉफी हाउस पहुंचे, जहां रिश्वत की पहली किस्त दी जानी थी।
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार जैसे ही फरियादी ने एक लाख रुपये हरिप्रसाद पटेल को दिए और उन्होंने रकम अपनी कार में रखी, पहले से तैनात टीम ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया। कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी अजय मिश्रा और उनकी टीम ने किया।ट्रैप की कार्रवाई पूरी होने के बाद लोकायुक्त की दूसरी टीम जेके रोड स्थित नापतौल विभाग के कार्यालय पहुंची। यहां प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर नसीमुद्दीन के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। अधिकारियों ने कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की।
लोकायुक्त के अनुसार शिकायत की पृष्ठभूमि जून महीने में हुई विभागीय कार्रवाई से जुड़ी है। निरीक्षण के दौरान नापतौल विभाग ने प्रगति पेट्रोल पंप के तीन नोजल सील कर दिए थे। विभाग का दावा था कि इन नोजलों से निर्धारित मात्रा से एक से पांच मिलीलीटर तक कम पेट्रोल निकल रहा था। हालांकि बाद में संबंधित कंपनी के अधिकृत जांच अधिकारी ने दोबारा परीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में नोजल निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके बावजूद पेट्रोल पंप संचालक का आरोप था कि केस समाप्त करने और नोजलों की दोबारा स्टैंपिंग कराने के लिए रिश्वत की मांग लगातार की जा रही थी।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि हरिप्रसाद पटेल वर्ष 2023 में निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे। इसके बावजूद वे विभागीय मामलों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे और कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेने तथा संदेश पहुंचाने का काम कर रहे थे। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि रिटायरमेंट के बाद भी वे विभाग के कुछ मामलों में अनधिकृत रूप से हस्तक्षेप कर रहे थे। अब जांच इस दिशा में भी की जाएगी कि वे किन परिस्थितियों में विभागीय गतिविधियों से जुड़े रहे और किन-किन मामलों में उनकी भूमिका रही।
लोकायुक्त जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर नसीमुद्दीन सीधे तौर पर रिश्वत की बातचीत से बचते थे। शिकायत के अनुसार वे अलग-अलग स्थानों पर बुलाकर बातचीत करते थे, लेकिन रकम का जिक्र मौखिक रूप से करने के बजाय कागज पर लिखते और तुरंत उसे फाड़ या काट देते थे, ताकि भविष्य में कोई प्रत्यक्ष या ऑडियो साक्ष्य उपलब्ध न हो सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिश्वत मांगने का यह तरीका सबूत मिटाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप कार्रवाई के बाद संबंधित दस्तावेज, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वत मांगने की पूरी प्रक्रिया, बातचीत और विभागीय फाइलों की भी पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
