मंत्रि-परिषद के बड़े फैसले: सरदार सरोवर विस्थापितों को बड़ी राहत, सिंचाई और सामाजिक योजनाओं पर सरकार का फोकस

भोपाल (म.प्र.)

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में 15 हजार करोड़ से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी

मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा घाटी क्षेत्र के सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित विस्थापित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए उनके आवासीय भूखंडों का पंजीयन पूरी तरह नि:शुल्क कराने का निर्णय लिया है। यह फैसला मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में लिया गया। इस निर्णय से 25,600 से अधिक विस्थापित परिवारों को लाभ मिलेगा और राज्य शासन पर करीब 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।

सरकार के मुताबिक, विस्थापितों को पहले से आवंटित आवासीय भूखंडों के पंजीयन पर लगने वाला शुल्क और स्टांप ड्यूटी मानक संचालन प्रक्रिया के तहत नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा वहन की जाएगी। लंबे समय से विस्थापित परिवार इस राहत की मांग कर रहे थे, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।

सिंचाई परियोजनाओं को भी हरी झंडी
मंत्रि-परिषद ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से मैहर और कटनी जिलों में दो महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल 620 करोड़ 65 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

मैहर और कटनी की धनवाही सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना पर 53 करोड़ 73 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे करीब 3,500 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी और दोनों जिलों के 9 गांवों के लगभग 2,810 किसान लाभान्वित होंगे।

इसके अलावा कटनी जिले की बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना को 566 करोड़ 92 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना से बरही और विजयराघवगढ़ तहसील के 27 गांवों के करीब 11,500 किसानों को फायदा होगा और लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की जाएगी।

योजनाओं की निरंतरता पर बड़ा बजट
बैठक में 6 विभागों की 10 प्रमुख योजनाओं को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 15,009 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति भी दी गई। इनमें श्रम विभाग की मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपये, पशुपालन एवं डेयरी विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए 6,472 करोड़ रुपये और योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की योजनाओं के लिए 3,376 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान शामिल है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की किशोर कल्याण निधि और घरेलू हिंसा पीड़ित सहायता योजना के लिए भी बजट मंजूर किया गया, वहीं पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजनाओं को भी निरंतरता दी गई।

प्रशासनिक निर्णय भी अहम
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग करने और उसके कर्मचारियों का संविलयन महिला एवं बाल विकास विभाग में करने का भी निर्णय लिया। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली सरल होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

कुल मिलाकर, मंत्रि-परिषद के ये फैसले विस्थापितों को राहत, किसानों को सिंचाई सुविधा और सामाजिक योजनाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।

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