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दोस्त को कार देना पड़ा भारी, मर्डर केस में फंसी SUV, अब हाईकोर्ट के आदेश पर असली मालिक को लौटाएगी पुलिस
भोपाल (म.प्र.)
नरसिंहपुर मर्डर केस में फंसी लग्जरी SUV को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया। जांच पूरी होने पर मालिक को कार लौटाने पर पुनर्विचार के निर्देश।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने थानों में जब्त वाहनों की स्थिति और असली मालिकों के अधिकारों के बारे में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। यह मामला नरसिंहपुर जिले के एक चर्चित मर्डर केस से जुड़ा है, जिसमें एक लग्जरी SUV का इस्तेमाल हत्या के लिए किया गया था। अदालत ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद, ऐसे वाहनों को लंबे समय तक थानों में रखना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे वाहन खराब होते हैं और सरकारी व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ पड़ता है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वो वाहन को उसके असली मालिक को सौंपने पर फिर से विचार करे।
यह मामला अगस्त 2025 का है, जब गाडरवारा निवासी आदित्य राजपूत ने अपनी लग्जरी SUV अपने दोस्त शिवम राय को भोपाल जाने के लिए दी थी। कहा जाता है कि शिवम ने बाद में वही गाड़ी नितिन दुबे को दे दी, जिसके बाद एक गंभीर घटना हुई। आरोप है कि इसी चलती कार में नितिन दुबे ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहन को सबूत के तौर पर जब्त कर लिया और मामला जांच में चला गया।
गाड़ी के मालिक आदित्य राजपूत ने अदालत में स्पष्ट कहा कि उनका इस अपराध से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना था कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और उन्हें उनकी सम्पत्ति, यानी SUV, वापस मिलनी चाहिए। लेकिन निचली अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने निचली अदालत के फैसले को गलत बताया और कहा कि कानून के अनुसार निर्दोष व्यक्ति की सम्पत्ति को अनावश्यक रूप से रोका नहीं जा सकता।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ‘भजनलाल बनाम मध्य प्रदेश राज्य’ केस का हवाला देते हुए कहा कि यदि वाहन मालिक कोर्ट की शर्तों को मानने के लिए तैयार है और आगे किसी विवाद में इस वाहन का उपयोग नहीं होगा, तो उसे सुपुर्दनामा पर वाहन सौंपा जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में संतुलन जरूरी है, ताकि एक ओर जांच प्रभावित न हो और दूसरी ओर निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न हो।
अदालत ने पुलिस थानों में खड़े जब्त वाहनों की स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणी की। कहा गया कि लंबे समय तक खुले में पड़े वाहन धीरे-धीरे खराब हो जाते हैं और कबाड़ में बदल जाते हैं, जिससे राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान होता है। इसके अलावा, पुलिस व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ता है क्योंकि इन वाहनों की देखरेख और सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
हाईकोर्ट के इस रुख को ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश माना जा रहा है, जहाँ जांच के बाद भी वाहन वर्षों तक थानों में पड़े रहते हैं। अब ट्रायल कोर्ट को यह तय करना होगा कि SUV को शर्तों के साथ मालिक को सौंपा जाए या नहीं।
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दोस्त को कार देना पड़ा भारी, मर्डर केस में फंसी SUV, अब हाईकोर्ट के आदेश पर असली मालिक को लौटाएगी पुलिस
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने थानों में जब्त वाहनों की स्थिति और असली मालिकों के अधिकारों के बारे में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। यह मामला नरसिंहपुर जिले के एक चर्चित मर्डर केस से जुड़ा है, जिसमें एक लग्जरी SUV का इस्तेमाल हत्या के लिए किया गया था। अदालत ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद, ऐसे वाहनों को लंबे समय तक थानों में रखना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे वाहन खराब होते हैं और सरकारी व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ पड़ता है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वो वाहन को उसके असली मालिक को सौंपने पर फिर से विचार करे।
यह मामला अगस्त 2025 का है, जब गाडरवारा निवासी आदित्य राजपूत ने अपनी लग्जरी SUV अपने दोस्त शिवम राय को भोपाल जाने के लिए दी थी। कहा जाता है कि शिवम ने बाद में वही गाड़ी नितिन दुबे को दे दी, जिसके बाद एक गंभीर घटना हुई। आरोप है कि इसी चलती कार में नितिन दुबे ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहन को सबूत के तौर पर जब्त कर लिया और मामला जांच में चला गया।
गाड़ी के मालिक आदित्य राजपूत ने अदालत में स्पष्ट कहा कि उनका इस अपराध से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना था कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और उन्हें उनकी सम्पत्ति, यानी SUV, वापस मिलनी चाहिए। लेकिन निचली अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने निचली अदालत के फैसले को गलत बताया और कहा कि कानून के अनुसार निर्दोष व्यक्ति की सम्पत्ति को अनावश्यक रूप से रोका नहीं जा सकता।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ‘भजनलाल बनाम मध्य प्रदेश राज्य’ केस का हवाला देते हुए कहा कि यदि वाहन मालिक कोर्ट की शर्तों को मानने के लिए तैयार है और आगे किसी विवाद में इस वाहन का उपयोग नहीं होगा, तो उसे सुपुर्दनामा पर वाहन सौंपा जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में संतुलन जरूरी है, ताकि एक ओर जांच प्रभावित न हो और दूसरी ओर निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न हो।
अदालत ने पुलिस थानों में खड़े जब्त वाहनों की स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणी की। कहा गया कि लंबे समय तक खुले में पड़े वाहन धीरे-धीरे खराब हो जाते हैं और कबाड़ में बदल जाते हैं, जिससे राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान होता है। इसके अलावा, पुलिस व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ता है क्योंकि इन वाहनों की देखरेख और सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
हाईकोर्ट के इस रुख को ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश माना जा रहा है, जहाँ जांच के बाद भी वाहन वर्षों तक थानों में पड़े रहते हैं। अब ट्रायल कोर्ट को यह तय करना होगा कि SUV को शर्तों के साथ मालिक को सौंपा जाए या नहीं।
