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भोपाल में वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह का शुभारंभ: डॉ. यशोधर मठपाल सम्मानित, पुरातत्व पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू
भोपाल, (म.प्र.)
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया उद्घाटन, विरासत संरक्षण और शोध में जनभागीदारी पर दिया जोर
भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में शुक्रवार को डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का औपचारिक शुभारंभ हुआ। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय निदेशालय द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। समारोह में देशभर से आए पुरातत्वविद्, अभिलेख विशेषज्ञ, संग्रहालय पेशेवर और शोधार्थी शामिल हुए।

मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल को पुरातत्व और शैलचित्र अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन विभाग की सचिव उर्मिला शुक्ला सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल पर लगाए गए सूचना और संवादात्मक स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रदर्शकों से चर्चा की और एक लाइव पॉटरी स्टॉल पर स्वयं मिट्टी का बर्तन बनाकर पारंपरिक शिल्प और जनसंपर्क गतिविधियों के बीच संवाद को प्रोत्साहित किया। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य विरासत संरक्षण को आमजन से जोड़ना है।
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औपचारिक सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसमें मुख्यमंत्री के साथ पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल शामिल हुए। इसके बाद डॉ. वाकणकर और मां सरस्वती के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया। स्वागत भाषण में संस्कृति सचिव उर्मिला शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार विरासत स्थलों के संरक्षण और पुनर्स्थापन को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि सतत प्रयासों के चलते मध्य प्रदेश के 15 विरासत स्थलों को यूनेस्को की मान्यता मिली है, जिससे राज्य की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हुई है।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी विशेष आकर्षण जोड़ा। स्मिता नागदेव के सितार वादन और राहुल शर्मा के कविता पाठ को श्रोताओं ने सराहा। इसके बाद प्रशस्ति वाचन में डॉ. यशोधर मठपाल के शैलचित्र अनुसंधान और पुरातत्वीय योगदान को रेखांकित किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि विरासत संरक्षण केवल अकादमिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने डॉ. वाकणकर के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका कार्य आज भी शोधकर्ताओं को दिशा देता है। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक संरक्षण को आगे बढ़ाने में केंद्र सरकार की भूमिका का उल्लेख किया।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने अभिलेखागार निदेशालय द्वारा प्रकाशित स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े दुर्लभ दस्तावेजों पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया। पुरस्कार ग्रहण करते हुए डॉ. यशोधर मठपाल ने राज्य सरकार और संस्कृति विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया और डॉ. वाकणकर से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
इसके बाद राष्ट्रीय संगोष्ठी के तकनीकी सत्र शुरू हुए, जिनमें पुरातत्व, अभिलेख प्रबंधन, संग्रहालय विज्ञान और डिजिटल क्यूरेशन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। आयोजकों के अनुसार, तीन दिवसीय यह संगोष्ठी हालिया शोध और नई तकनीकों पर गहन विमर्श का मंच प्रदान करेगी।
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