गंदे पानी के विरोध में भाजपा पार्षद की दंडवत यात्रा, महापौर पर साधा निशाना

ग्वालियर (म.प्र.)

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शुद्ध पेयजल की मांग को लेकर परिषद कार्यालय तक प्रदर्शन, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप

ग्वालियर शहर में गंदे और बदबूदार पानी की आपूर्ति को लेकर जनअसंतोष सोमवार को सड़कों पर दिखाई दिया, जब भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास ने प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर दंडवत यात्रा निकालकर नगर निगम और महापौर का ध्यान नागरिक समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। पार्षद ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

यह दंडवत यात्रा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा से शुरू होकर परिषद कार्यालय तक पहुंची। यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “स्वच्छ पानी दो”, “गंदे पानी से परेशान जनता” और “जल संकट का समाधान करो” जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लोगों की नाराजगी साफ नजर आई।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में नलों से गंदा, बदबूदार और दूषित पानी आ रहा है। इससे बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई बार नगर निगम में शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। नागरिकों ने कहा कि पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा की अनदेखी गंभीर लापरवाही है।

दंडवत यात्रा के दौरान लगाए गए बैनरों में केवल जल संकट ही नहीं, बल्कि शहर की अन्य समस्याएं भी उजागर की गईं। इनमें टूटी सड़कें, खराब सफाई व्यवस्था, उफनते सीवर, जलभराव और कॉलोनियों में स्ट्रीट लाइट की कमी जैसे मुद्दे शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने इसे “नगर सरकार को जगाने की कोशिश” बताया।

भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास ने कहा,
“यह आंदोलन किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि आम जनता की पीड़ा को सामने लाने के लिए है। जब तक ग्वालियर के नागरिकों को साफ और सुरक्षित पेयजल नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष चलता रहेगा।”

वहीं, महापौर शोभा सिकरवार ने इस विरोध को “मीडिया में आने की स्टंटबाजी” बताया। उन्होंने कहा कि नगर निगम और प्रशासन मिलकर समस्याओं के समाधान पर काम कर रहे हैं। महापौर ने तर्क दिया कि जब अन्य शहरों में भी इसी तरह की दिक्कतें हैं, तो केवल ग्वालियर प्रशासन को दोषी ठहराना उचित नहीं है।

फिलहाल नगर निगम ने जल आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की बात कही है, लेकिन नागरिक ठोस कार्रवाई और समयबद्ध समाधान की मांग कर रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस विरोध को चेतावनी मानकर जल संकट पर कितनी जल्दी प्रभावी कदम उठाता है।

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